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27 KG सोना, 1116 KG चांदी और 1526 एकड़ जमीन के कागजात…पूर्व मुख्यमंत्री की करोड़ों की संपत्ति सरकार को ट्रांसफर…

बेंगलुरु। आय से अधिक मामले में जब्त तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की करोडों की संपत्ति को आज तमिलनाडु सरकार को ट्रांसफर कर दिया गया है. तमिलनाडु सरकार को ट्रांसफर की गई संपत्तियों में 27 किलोग्राम सोना, 1116 किलो चांदी और जमीन के कागजात शामिल हैं. पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता का लंबी बीमारी के बाद 5 दिसंबर 2016 को निधन हो गया था. अदालत के एक फैसले के बाद जयललिता की संपत्तियों को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुक्रवार 14 फरवरी को सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी की गई. ये संपत्तियां उनके खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले की जांच के दौरान एजेंसियों ने जब्त किए थे.

जांच एजेंसियों ने जो संपत्ति जब्त की थी उसमें सोना, चांदी और जमीनें थीं. इनकी डिटेल इस तरह हैं. सोना- 27 किलो 558 ग्राम सोने के जेवरात चांदी- 1116 किलो 1526 एकड़ जमीनों के दस्तावेज जांच के दौरान ये संपत्ति कर्नाटक विधानसभा के कोषागार में रखी गई थी. इन संपत्तियों को ही कोर्ट और सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में ट्रांसफर किया गया. तगड़ी सुरक्षा और वीडियोग्राफी तमिलनाडु गृह विभाग के एक संयुक्त सचिव इन कीमती सामानों को प्राप्त करने के लिए अदालत में मौजूद थे. ट्रेजरी अधिकारियों ने कड़ी सुरक्षा के बीच सावधानीपूर्वक संपत्ति सौंप दी. तमिलनाडु के अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि इन संपत्तियों के बारे में रिकॉर्ड दर्ज कराने के दौरान पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग हो.

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ये पूरी कार्यवाही को बंद कमरे में संचालित किया गया. उचित कानूनी प्रक्रियाओं के बाद कीमती सामान औपचारिक रूप से तमिलनाडु के अधिकारियों को सौंप दिया गया. बता दें कि जयललिता के निधन के बाद इन संपत्तियों के मालिकाना हक को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी गई. जयललिता की भतीजी जे दीपा ने इन संपत्तियों पर दावा किया था और इनपर मालिकाना हक की मांग को लेकर कोर्ट गई थीं. लेकिन अदालत ने इनके खिलाफ फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में जब्त की गई संपत्तियां सही मायने में तमिलनाडु सरकार की हैं.

बता दें कि जयललिता पर आय से अधिक संपत्ति का मामला 1991-1996 के दौरान उनके पहले कार्यकाल के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए लगाया गया था. आरोप के अनुसार उन्होंने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की. आरोप था कि उन्होंने लगभग 67 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा की, जो उनकी वैध आय से मेल नहीं खाती थी. यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज किया गया. इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग द्वारा की गई थी.

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27 सितंबर 2014 को, बेंगलुरु की विशेष अदालत ने जयललिता को दोषी ठहराया और उन्हें चार साल की सजा के साथ 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया. इस फैसले के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और जेल जाना पड़ा. लेकिन मई 2015 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया, जिसके बाद वह दोबारा मुख्यमंत्री बन सकीं. फरवरी 2017 में, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया और निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा. हालांकि, चूंकि जयललिता का निधन 2016 में हो चुका था, इसलिए उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो गई.

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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