13 साल बाद झीरम घाटी नरसंहार में आया फैसला; 10 नक्सली आरोपी दोषी करार, सुनाई गई सजा

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी कानूनी खबर सामने आ रही है। वर्ष 2013 के बहुचर्चित और वीभत्स झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में जगदलपुर स्थित विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। अदालत ने मामले में सुनवाई पूरी करते हुए सभी 10 आरोपियों को यूएपीए (UAPA), हत्या, साजिश और विस्फोटक अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) नई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 06/2013 से जुड़ा हुआ है। 25 मई 2013 को झीरम घाटी में हुए इस भयानक नक्सली हमले में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व सहित कई वरिष्ठ नेता और जवान शहीद हो गए थे।
मामले की विस्तृत जांच और 101 गवाहों के बयानों के आधार पर चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आज अदालत ने आरोपियों को कानून के कटघरे में खड़ा करते हुए सजा का ऐलान किया।

कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों की सूची:
1. प्रमिला मोडियम
2. चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना
3. सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम
4. मुक्का मांडवी
5. कोसा कवासी उर्फ कोसाराम
6. आयता मरकाम
7. मदकामी देवा
8. जोगा मदकामी
9. बनजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा
10. महादेव नाग
मामले में आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 341, 121, 121A, 122, 307, 302, 427, 396, 397 और 120B के अलावा भारतीय शस्त्र अधिनियम की धारा 25 व 27, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की कठोर धारा 16, 18, 20, 38(2), 39(2) तथा 40(2) के तहत दोष सिद्ध हुआ है। लंबे समय तक चले इस संवेदनशील मामले में कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की दिशा में एक बड़ी राहत मानी जा रही है।



