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कोसा हत्याकांड का पर्दाफाश: प्रेम प्रसंग में युवक की हत्या, महिला समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

रात 1:30 बजे तक फोन पर हुई बातचीत, 2:30 बजे मिलने पहुंचा अमित; बहन के साथ देख भाई ने खोया आपा, फावड़े से सिर-छाती पर किए वार, शव छिपाने के बाद पुलिस को गुमराह करने रचा गुमशुदगी का नाटक, 200 से अधिक टावर डंप, CDR, IPDR, CCTV और आधुनिक फोरेंसिक तकनीक से खुला राज

जांजगीर-चांपा, 9 सितंबर 2026। थाना मुलमुला क्षेत्र के ग्राम कोसा में करीब दो माह से पुलिस के लिए पहेली बने अमित भंडारी हत्याकांड का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस के अनुसार हत्या के पीछे प्रेम प्रसंग का मामला सामने आया है। मामले में बजरंग सिंह क्षत्रिय, पप्पू सिंह क्षत्रिय और संतोषी सिंह क्षत्रिय को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त छोटा फावड़ा/रापा तथा लोहे की छोटी सीढ़ी भी बरामद की है।

पुलिस ने इस मामले की जांच में पारंपरिक विवेचना के साथ आधुनिक तकनीकी और फोरेंसिक तरीकों का इस्तेमाल किया। 200 से अधिक टावर डंप, CDR, IPDR, GPS, CCTV फुटेज, संदिग्धों की लोकेशन, नार्को टेस्ट, पॉलीग्राफ, ब्रेन मैपिंग सहित अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। घटना स्थल का पुनर्निर्माण और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का पुनर्विश्लेषण भी जांच का हिस्सा रहा।

27 जून की रात घर से निकला था अमित

पुलिस के मुताबिक 27 जून 2026 की रात ग्राम कोसा में अमित भंडारी अपने घर से निकला था। उसका शव 29 जून की सुबह गांव के ही अहदा तालाब के पास स्थित एक निर्जन बाड़ी में मिला था। गांव के बीचो-बीच हुई इस हत्या ने पुलिस के सामने कई सवाल खड़े कर दिए थे। शुरुआती जांच में प्रेम प्रसंग, गांव में रात के समय होने वाले जुआ-सट्टा व शराब से जुड़े असामाजिक तत्वों तथा पिछले ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान हुए विवाद समेत कई पहलुओं को जांच के दायरे में रखा गया।

शादी के बाद भी जारी था प्रेम प्रसंग

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जांच में सामने आया कि अमित भंडारी का गांव की ही संतोषी सिंह से विवाह के पूर्व से प्रेम प्रसंग था। विवाह के बाद भी दोनों के बीच बातचीत जारी थी। पुलिस के अनुसार अमित बाहर रहकर काम करता था और जब वह गांव लौटता था, तब संतोषी भी अपने पति से विवाद के बाद गांव आ जाती थी। दोनों के बीच रात-रातभर फोन पर बातचीत होती थी।
घटना वाली रात भी अमित और संतोषी के बीच करीब रात 1:30 बजे तक फोन पर बातचीत हुई। इसके बाद करीब 2:30 बजे अमित, संतोषी से मिलने उसके घर के पीछे पहुंचा। इसी दौरान संतोषी का भाई बजरंग सिंह टेंट का काम खत्म कर घर लौटा। घर के पीछे कुछ आवाज सुनकर वह वहां पहुंचा और अपनी बहन के साथ अमित को देखकर आक्रोशित हो गया।

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दीवार फांदकर भागने की कोशिश, फावड़े से हमला

पुलिस की जांच के अनुसार बजरंग सिंह और अमित के बीच विवाद और मारपीट शुरू हो गई। इसी दौरान अंधेरे में अमित का सिर पीछे की दीवार से टकराया, जिससे दीवार पर खून का धब्बा लग गया। अमित जान बचाकर वहां से भागने के लिए पीछे की दीवार फांदने का प्रयास कर रहा था। तभी पास पड़े छोटे फावड़े/रापा से बजरंग सिंह ने अमित के सिर और छाती पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

शव को बाड़ी में छिपाया, फिर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश

हत्या के बाद आरोपी बजरंग सिंह घबरा गया। उसने अमित के शव को पीछे की बाड़ी में ही झाड़ियों के नीचे छिपा दिया। पुलिस के मुताबिक उसी रात गांव में चोरी होने की सूचना पर डायल-112 की टीम गांव पहुंची थी और गांव में लोग जाग रहे थे। ऐसी स्थिति में शव को कहीं और ले जाने पर आरोपियों को पकड़े जाने का डर था। इसलिए शव को तत्काल कहीं अन्य स्थान पर ले जाने के बजाय वहीं छिपा दिया गया।
पूरी घटना संतोषी सिंह ने देखी थी और मृतक के शव को छिपाने में उसने भी मदद की थी।

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भाई के लौटने के बाद बनाई गई नई योजना
अगले दिन 28 जून को जब आरोपी बजरंग सिंह का बड़ा भाई पप्पू सिंह काम के बाद गांव लौटा, तब बजरंग ने उसे बीती रात की पूरी घटना बताई। पुलिस के अनुसार इसके बाद दोनों ने घटना को छिपाने और पुलिस को गुमराह करने की योजना बनाई। आरोपियों ने मृतक के परिजनों के साथ अमित भंडारी को ढूंढने का नाटक किया। यहां तक कि पुलिस को भ्रमित करने के लिए परिजनों के साथ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने थाना मुलमुला भी गए।

बाद में 28 जून की मध्यरात्रि करीब 12 बजे मौका देखकर आरोपियों ने अमित के शव को गांव के बीचो-बीच ऐसे स्थान पर रख दिया, जहां पुलिस को तत्काल उन पर शक न हो। इसके बाद 29 जून को पुलिस को शव बरामद हुआ और अज्ञात अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।

तकनीकी जांच से खुलती गईं कड़ियां

पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन और घटना के समय की गतिविधियों का बारीकी से विश्लेषण किया। 200 से अधिक टावर डंप खंगाले गए। CCTV फुटेज और GPS समेत अन्य तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया गया।

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पूछताछ के दौरान आरोपियों के बयान में बार-बार बदलाव सामने आया। इसके बाद पुलिस ने नार्को टेस्ट, पॉलीग्राफ और ब्रेन मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद ली। इन तमाम साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य तथ्यों को जोड़ने के बाद पुलिस का संदेह आरोपियों पर मजबूत होता गया।

सख्ती से पूछताछ में कबूला अपराध

पुलिस के अनुसार आरोपियों से दोबारा सख्ती से पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्होंने घटना करना स्वीकार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त छोटा फावड़ा/रापा और मृतक के शव को ले जाने के लिए उपयोग में लाई गई छोटी लोहे की सीढ़ी बरामद की गई। पुलिस ने तीनों आरोपियों बजरंग सिंह क्षत्रिय, पप्पू सिंह क्षत्रिय और संतोषी सिंह क्षत्रिय को विधिवत गिरफ्तार कर लिया है। संतोषी सिंह और पप्पू सिंह को न्यायिक रिमांड पर भेजे जाने की जानकारी दी गई है, जबकि बजरंग सिंह का पुलिस रिमांड लेकर फोरेंसिक जांच की आधुनिक तकनीकों से परीक्षण कराया जाएगा।

अनुभवी विशेषज्ञ की भी रही भूमिका

पुलिस ने मामले की गुत्थी सुलझाने में अनुभवी विशेषज्ञ डॉ. विमला की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार उन्हें सात वर्षों से अधिक का अनुभव है और जांच में आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों के उपयोग में उनकी विशिष्ट भूमिका रही। पुलिस की लंबी और तकनीकी जांच के बाद सामने आई यह कहानी इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि हत्या के बाद आरोपियों ने शव छिपाने के साथ-साथ मृतक की तलाश का नाटक कर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया। तकनीकी साक्ष्यों और आरोपियों के बदलते बयानों ने आखिरकार इस पूरे षड्यंत्र की परतें खोल दीं।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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