ऐतिहासिक भीमा तालाब की बदहाली पर फूटा जनाक्रोश, 14 अक्टूबर को निकलेगी विशाल रैली
बदबू और गंदगी से परेशान नगरवासी हुए लामबंद, तालाब से कलेक्ट्रेट तक करेंगे प्रदर्शन, दलगत राजनीति से ऊपर उठकर नागरिकों ने शुरू की मुहिम, प्रशासन का ध्यान खींचने की तैयारी

जांजगीर-नैला। नगर की ऐतिहासिक धरोहर भीमा तालाब (भीम्भा तालाब) इन दिनों गंदगी और दुर्गंध की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। तालाब की बदहाल स्थिति से आसपास रहने वाले नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से बनी इस समस्या को लेकर अब नगरवासियों का आक्रोश सामने आने लगा है। नगरपालिका की उदासीनता से नाराज नागरिकों ने तालाब के संरक्षण, साफ-सफाई और व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर स्वस्फूर्त जनजागरण अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है।
इसी कड़ी में 14 अक्टूबर को ‘भीम्भा तालाब बचाओ अभियान’ के तहत सुबह 10 बजे से तालाब परिसर से कलेक्ट्रेट तक विशाल रैली निकालकर प्रदर्शन किया जाएगा। इस रैली के माध्यम से प्रशासन का ध्यान ऐतिहासिक तालाब की बदहाली और उससे उत्पन्न हो रही जनसमस्याओं की ओर आकर्षित किया जाएगा। नगरवासी चाहते हैं कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता से लेते हुए तालाब की सफाई और उसके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए।
दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होंगे नगरवासी
इस अभियान की खास बात यह है कि इसमें किसी एक राजनीतिक दल, संस्था या क्षेत्र तक सीमित रहने के बजाय नगर के सभी नागरिकों की भागीदारी का आह्वान किया जा रहा है। अभियान से जुड़े नागरिकों का मानना है कि ऐतिहासिक भीमा तालाब नगर की साझा धरोहर है और इसकी दुर्दशा पूरे शहर के लिए चिंता का विषय है। इसलिए इसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी सामूहिक है।
नगरवासियों से अपील की जा रही है कि वे दलगत विचारधाराओं और व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर इस जनहित के अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपनी एकजुटता का परिचय दें।
सफाई और संरक्षण के लिए ठोस पहल की मांग
भीमा तालाब में फैली गंदगी और उससे उठने वाली दुर्गंध के कारण आसपास के रहवासियों को रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी हो रही है। नागरिकों की मांग है कि तालाब की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए, गंदगी के स्रोतों पर रोक लगाई जाए तथा तालाब के संरक्षण के लिए स्थायी कार्ययोजना तैयार की जाए।
14 अक्टूबर को प्रस्तावित रैली और प्रदर्शन के जरिए नगरवासी प्रशासन को यह संदेश देना चाहते हैं कि ऐतिहासिक भीमा तालाब की उपेक्षा अब स्वीकार्य नहीं है। यह अभियान केवल सफाई की मांग तक सीमित नहीं, बल्कि नगर की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने और भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने की सामूहिक पहल भी है।



