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Thalassemia: क्या होती है थैलेसीमिया बीमारी? क्यों ब्लड चढ़ाने की पड़ती है जरूरत?

थैलेसीमिया एक जेनेटिक बीमारी है, जिसमें शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता. हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स में पाया जाने वाला प्रोटीन है, जो शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है. इस बीमारी में रेड ब्लड सेल्स जल्दी टूट जाते हैं, जिससे शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया हो जाता है. थैलेसीमिया दो प्रकार का होता है थैलेसीमिया मेजर और थैलेसीमिया माइनर. मेजर प्रकार गंभीर होता है, जबकि माइनर में लक्षण हल्के रहते हैं. यह बीमारी उन बच्चों को होती है जिनके मां और पिता दोनों के खून में थैलेसीमिया वाला जीन मौजूद होता है. दक्षिण एशियाई देशों, जैसे भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में इसका खतरा ज्यादा देखा जाता है.

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थैलेसीमिया का मुख्य कारण है, मां या पिता से बच्चे में खराब जीन का आ जाना. जब दोनों माता-पिता में यह जीन होता है, तो बच्चे को थैलेसीमिया मेजर हो सकता है. इसके लक्षणों में कमजोरी, पीली त्वचा, बार-बार थकान, सांस फूलना, भूख न लगना, हड्डियों का बढ़ना और बच्चे का विकास रुक जाना शामिल हैं. कई बार स्प्लीन और लिवर का आकार भी बढ़ जाता है. समय रहते इसका पता न चले तो यह गंभीर एनीमिया का रूप ले सकता है. इसलिए शुरुआती अवस्था में ही जांच और उपचार शुरू करना बेहद जरूरी है.

क्यों ब्लड चढ़ाने की पड़ती है जरूरत, कैसे होता है इलाज?
आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डॉ. सुभाष गिरी बताते हैं कि थैलेसीमिया मेजर के मरीज का शरीर खुद से पर्याप्त रेड ब्लड सेल्स नहीं बना पाता, जिससे खून की कमी बनी रहती है. इसलिए उन्हें हर 2 से 4 हफ्तों में ब्लड ट्रांसफ्यूज़न (खून चढ़ाना) पड़ता है, ताकि शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य रहे और ऑक्सीजन की कमी न हो. लगातार ब्लड ट्रांसफ्यूज़न से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जो हार्ट, लिवर और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है.

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इसे कंट्रोल करने के लिए मरीज को आयरन चिलेशन थेरेपी दी जाती है, जो शरीर से अतिरिक्त आयरन निकालती है. इसके अलावा बोन मैरो ट्रांसप्लांट एकमात्र स्थायी इलाज माना जाता है, लेकिन यह तभी संभव होता है जब डोनर और मरीज का मैच सही हो.

इन चीजों का ध्यान रखें
थैलेसीमिया की जांच शादी से पहले या प्रेगनेंसी के शुरुआती चरण में करवाएं.

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अगर परिवार में किसी को यह बीमारी है, तो नियमित ब्लड टेस्ट कराएं.

ब्लड ट्रांसफ्यूज़न के बाद डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयां समय पर लें.

आयरन सप्लीमेंट्स बिना सलाह के कभी न लें.

पौष्टिक डाइट, हरी सब्जियां और पर्याप्त पानी का सेवन करें.

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मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए तनाव कम रखें और पॉजिटिव रहें.

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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