छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता की शुरुआत! UCC पर आज मंथन, होगी सबसे अहम बैठक

Chhattisgarh Uniform Civil Code: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इसी कड़ी में गठित पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति की पहली बैठक गुरुवार दोपहर रायपुर में आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में समान नागरिक संहिता से जुड़े कानूनी पहलुओं, सुझावों और प्रारूप तैयार करने पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता को लेकर यह बैठक 24 जुलाई को दोपहर 12 बजे मुख्य सचिव विकास शील के कक्ष में होगी। बैठक की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई करेंगी। सरकार ने इस समिति को राज्य में समान नागरिक संहिता के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
समिति में शामिल हैं ये सदस्य
छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता पर बनी समिति में जस्टिस रंजना देसाई के अलावा उत्तराखंड के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, छत्तीसगढ़ के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. रावत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह सदस्य के रूप में शामिल हैं।
इन विषयों पर होगा मंथन
छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया में समिति विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे विषयों की मौजूदा कानूनी व्यवस्था का अध्ययन करेगी। इसके बाद आवश्यक सुझावों के साथ प्रारूप तैयार कर राज्य सरकार को सौंपा जाएगा।
जनता और विशेषज्ञों से भी लिए जाएंगे सुझाव
सरकार ने छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता के मसौदे को व्यापक बनाने के लिए समिति को नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लेने की जिम्मेदारी भी दी है। इन सुझावों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
दूसरे राज्यों के मॉडल का भी होगा अध्ययन
छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले उन राज्यों की व्यवस्थाओं का भी अध्ययन किया जाएगा, जहां समान नागरिक संहिता लागू है या इस दिशा में ठोस पहल की गई है। समिति इन अनुभवों के आधार पर राज्य के लिए उपयुक्त सुझाव तैयार करेगी।
सरकार की अगली रणनीति पर रहेंगी नजरें
आज होने वाली पहली बैठक को छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता की दिशा में शुरुआती लेकिन अहम कदम माना जा रहा है। बैठक के बाद यह साफ हो सकता है कि समिति आगे किस तरह काम करेगी और सरकार को अपनी प्रारंभिक सिफारिशें कब तक सौंपेगी। फिलहाल इस बैठक पर कानूनी विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।



