खोखरा वितरक नहर पर अवैध पुल निर्माण का खेल, भूमाफियाओं ने नहर को बनाया कमाई का जरिया, बिना अनुमति नहर में गहरी खुदाई कर खड़े किए जा रहे विम, जल संसाधन विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

जांजगीर-चांपा। जिले में सिंचाई व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाने वाली खोखरा वितरक नहर इन दिनों अवैध निर्माण और भूमाफियाओं की गतिविधियों के कारण चर्चा में है। आरोप है कि नहर के विभिन्न स्थानों पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के पुलों का निर्माण कराया जा रहा है। पुल निर्माण के लिए नहर के भीतर गहरी खुदाई कर विम (पिलर) खड़े किए जा रहे हैं, जिससे न केवल नहर की संरचना प्रभावित हो रही है बल्कि भविष्य में सिंचाई व्यवस्था पर भी गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, नहर के आसपास की जमीनों को अधिक कीमत पर बेचने के उद्देश्य से कुछ भूमाफिया लंबे समय से सक्रिय हैं। कृषि भूमि और नहर किनारे स्थित क्षेत्रों को प्लॉटिंग के माध्यम से बेचने की तैयारी की जा रही है। इसी उद्देश्य से आवागमन की सुविधा दिखाने के लिए नहर पर जगह-जगह पुल बनाए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन निर्माण कार्यों के लिए जल संसाधन विभाग से किसी प्रकार की अनुमति लिए जाने की जानकारी नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण के दौरान नहर के भीतर जेसीबी मशीनों से गहरी खुदाई कराई गई है। कई स्थानों पर नहर की मूल संरचना को नुकसान पहुंचाया गया है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो बरसात और सिंचाई सीजन के दौरान नहर की दीवारों तथा जल प्रवाह पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इससे किसानों को सिंचाई सुविधा प्रभावित होने का भी खतरा है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नहर में खुलेआम निर्माण कार्य चल रहा है, भारी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, इसके बावजूद विभाग के अधिकारी कभी मौके पर निरीक्षण करने नहीं पहुंचे। विभाग की इस निष्क्रियता से लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी किसान द्वारा नहर के किनारे छोटा-सा निर्माण किया जाए तो विभाग तत्काल कार्रवाई करता है, लेकिन यहां बड़े पैमाने पर पुल निर्माण होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई है कि नहर के आसपास की जमीनों की कीमत बढ़ाने और उन्हें आवासीय या व्यावसायिक उपयोग के लिए बेचने की योजना के तहत यह पूरा खेल संचालित किया जा रहा है। पुल बनने से खरीदारों को बेहतर पहुंच का भरोसा दिया जा रहा है, जबकि निर्माण कार्य की वैधता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगे हुए हैं।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह पता लगाया जाए कि नहर पर पुल निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई है या बिना अनुमति के निर्माण हो रहा है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही नहर की संरचना को हुए नुकसान का आकलन कर उसे तत्काल दुरुस्त कराया जाए ताकि किसानों की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित न हो।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जल संसाधन विभाग इस गंभीर मामले को कितना गंभीरता से लेते हैं और अवैध निर्माण तथा भूमाफियाओं की कथित गतिविधियों पर कब तक अंकुश लगाया जाता है। फिलहाल खोखरा वितरक नहर पर चल रहे निर्माण कार्य ने विभागीय निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।



