Reg No. CG-06-0026209
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-03).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-02).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-01).jpg
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा

बाघ की मौत पर विभाग के उच्च अफसर की बेतुकी बयानबाजी से विभाग की हुई जमकर फजीहत…

अजीत पाटकर

बैकुंठपुर-कोरिया। आ बैल मुझे मार से चरितार्थ होती वन अफसर की एक बेतुकी बात उन्हीं के विभाग की जोरदार किरकिरी साबित हुई। एक छोटी सी गलती की वजह से उठने लगे विभाग के ही कार्यप्रणाली पर सवाल। जमकर हुई फजीहत। वन विभाग के जमीनी अमले और अफसरों के सर नादानी से थोपा गया प्रोपेगेंडा पूरे कुनबे में चर्चा का विषय बना हुआ है। फिर सोचिए ये कितनी बड़ी बेइमानी है अगर खुद के विभाग की फजीहत खुद से कर दी जाए तो। मामला कोरिया वन मंडल के सोनहत वन परिक्षेत्र में मिले मृत बाघ से जुड़ा हुआ है। बतादें की 8 नवंबर को गरनई बीट में बाघ का 5 दिन पुराना शव मिला था। बाघ के मौत की खबर शासन प्रशासन सहित आमजनों में सनसनी का विषय लेकर आया। विषय बहुत गंभीर था। इसी बीच बाघ के मौत के कारणों को जानने व उसकी जांच करने विभाग के कई बड़े अफसर मौके पर पहुंचे उन्हीं अफसरों में एक जनाब प्रेम कुमार साहब भी थे जो छत्तीसगढ़ वन विभाग कुनबे के ऊंचे अफसर हैं वह मौजूदा वक्त में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी छत्तीसगढ़ के पद पर आसीन हैं। दरअसल बाघ की मौत पर बिना किसी जांच रिपोर्ट के ही जहरखुरानी की बात को मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप में इन अफसर का दिया बयान विभाग की फजीहत का बड़ा कारण माना जा रहा है। विभाग के बड़े अफसर की बात आखिर मीडिया भी गंभीरता से क्यों न लेती। नतीजा पूरे मामले में जहरखुरानी यानी की बाघ की हत्या का काल्पनिक कारण बताया जिसे पूरी प्रमुखता से मीडिया ने भी उठाया और मामला ऐसा प्रतीत होता दिखा जैसे सच में बाघ की हत्या कर दी गई है। साथ ही विभाग के इन अफसर की बेतुकी बातों से पूरे राज्य में जहरखुरानी से बाघ की मौत का मुद्दा चर्चा आम हो गया। जिससे लगातार वन विभाग की कार्यप्रणाली और बाघ जैसे प्राणी की सुरक्षा को लेकर आलोचनाएं होने लगी। विभाग सहित राज्य के बड़े अफसरों को मामले की गंभीरता पर जवाबदेही तय किया गया और इन सबके बीच सामान्य तौर पर हुई बाघ की मौत विभाग की बड़ी लापरवाही करार दी जाने लगी साथ ही यह मामला काफी हाई प्रोफाइल गंभीर बन गया। नतीजा यह निकला की सारा सिस्टम हलाकान हो गया और विभाग के छोटे कर्मचारियों सहित रेंजर को आनन फानन में निलंबित करते हुए माहौल को शांत करने का प्रयास किया गया। जिसकी पूरी वजह अगर देखी जाए तो ऐसे संवेदनशील मामलों में काफी सूझबूझ की आवश्यकता होती है। जिसको ध्यान में न रखते हुए आता ताई और जल्दबाजी में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी के द्वारा दिया गया यह बयान उनके खुद के विभाग की मुसीबत बन गया। जबकि अक्सर यही देखा गया है की संवेदनशील मामलों में बिना किसी ठोस आधार व प्रमाण के किसी भी संभावित कारणों पर आशंका जताना और फिर उसे सार्वजनिक रूप देना उचित नहीं माना जाता बल्कि काफी सूझबूझ बरतनी पड़ती है। बावजूद विभाग ने दोबारा मौके पर हुए पोस्ट मार्टम में बाघ के शव में जहरखुरानी से मौत के कोई भी संभावित लक्षण नहीं मिलने के बाद भी। बाघ जैसे संवेदनशील प्राणी की मौत पर बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जहरखुरानी से मौत की आशंका को जगजाहिर किया जो किसी मायनों में सही नहीं था। पूरे मामले पर जब संबंधित अधिकारी से उनकी प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने कहा की यह शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार था। मैंने कभी नहीं कहा कि यह निर्णायक है। मैंने कहा था कि सभी जांच और फोरेंसिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अंतिम निष्कर्ष निकलेगा। हालांकि संबंधित अफसर ने अपने कहे बात को शुरुआती पोस्ट मार्टम रिपोर्ट पर जहरखुरानी कहना स्वीकार किया है। जिसके बाद उन्होंने अपने बयान पर सफाई भी दी है।

See also  जांजगीर-चांपा सांसद कमलेश जांगड़े ने गृहमंत्री अमित शाह से दिल्ली में संसद सत्र के दौरान मुलाकात कर क्षेत्र के बारे में अवगत कराई...

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!