एनटीपीसी कालोनी प्रबंधन का फरमान, बेजुबानो पर आई शामत, लगाया होडिंग्स, कोई न दे कुत्तों को खाना, भूखे होने पर आक्रमक होने का अंदेशा…

एनटीपीसी कालोनी प्रबंधन का फरमान, बेजुबानो पर आई शामत
लगाया होडिंग्स,कोई न दे कुत्तों को खाना
भूखे होने पर आक्रमक होने का अंदेशा
रायगढ़। एनटीपीसी लारा कॉलोनी मैत्री नगर में कॉलोनी प्रबंधन के फरमान से बेजुबानों पर शामत आ गई है, प्रबंधन ने होर्डिंग लगाकर,बैनर पोस्टर चिपका कर एवं बड़े-बड़े डिस्प्ले बोर्ड में यह ऐलान किया है कि कॉलोनी के भीतर कुत्तों को कोई खाना ना दे इन मूक पशुओं पर रहम कर जो लोग इन्हें खाना दे देते थे उन्होंने इस फरमान के बाद उन्हें खाना देना बंद कर दिया है जिससे कुत्तों की जान पर बन आई है। जानकारी के अनुसार इस सम्बंध में पिछले 5 सितम्बर को नगर सलाह समिति की बैठक में ऐसा निर्णय लिया गया जिसमें कालोनी के बच्चों की सुरक्षा का हवाला देकर टॉउनशिप में कुत्तों को खाना देने से मनाही कर दी गई। इसके बाद जगह जगह यह चेतावनी प्रसारित होंने लगी डु नॉट फीड द डॉग्स यानी कुत्तो को खाना न दें।
जानवरों के लिए काम करने वाली संस्थाएं मौन
इस फरमान को कई लोगों ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म में ऐसे स्टेट्स बनाया है मानों इसे देखकर कुत्ते डर जाएंगे और कालोनी आना छोड़ देंगे। बेचारे मूक जानवर अपनी व्यथा भी नहीं बता सकते। आश्चर्य यह है कि कई स्वयं सेवी संस्थाएं दावा करती हैं कि वे इन बेजुबानों के लिए काम करते हैं परंतु विडंबना है कि इस फरमान को लेकर इनलोगों ने भी चुप्पी साध रखी है।
मारने व बधियाकरण पर भी लगी थी रोक
पूर्व में नगरीय व स्थानीय निकायों द्वारा आवारा कुत्तों को जहर वाले रसगुल्ला खिला के मारा गया था । जनसंख्या नियंत्रित करने बधियाकरण भी किया गया था। बाद में पशु कल्याण के लिये काम करने वाली संस्थाओं की आपत्ति के बाद इसमें रोक लगा दी गईं।
अब यह है कुत्तो पर कानून

धारा 428 और 429 के तहत आवारा कुत्तों को मारना अपराध है। अगर कोई आवारा कुत्तों को मारने या परेशान करने की कोशिश करता है तो इसकी शिकायत पुलिस में भी की जा सकती है। ऐसे जानवरों को मारने या फिर जहर देने के लिए आपको पांच साल तक की जेल हो सकती है, वहीं क्रूरता के लिए तीन महीने तक जेल में काटने पड़ सकते हैं।
भूखे होंने पर बढ़ सकती है कुत्तो की आक्रमकता
कॉलोनी प्रबंधन के इस फरमान के बाद कुत्तों के आक्रामक व हिंसक होने का खतरा बढ़ गया है क्योंकि खाना नहीं मिलने पर कुत्ते भूखे रहेंगे और पागल भी हो सकते हैं एवं लोगों पर हमले भी कर सकते हैं स्वाभाविक तौर पर उनकी आक्रामकता बढ़ जाएगी। इससे जुड़े एक मामले में शीर्ष अदालत को पशु कल्याण बोर्ड ने सूचित भी किया था कि भूखे रहने पर कुत्तो के ज्यादा हिंसक होने की संभावना है।
जानिए शीर्ष अदालत ने क्या कहा है इस मुद्दे पर
पिछले साल नवम्बर में नागपुर में कुत्तों को सार्वजनिक तौर पर खाना खिलाने पर रोक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई थी। अब सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक नहीं होगी। शीर्ष अदालत के अनुसार “सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की उन टिप्पणियों पर भी रोक लगाई जिसमें कहा गया था कि आवारा कुत्तों को खिलाने वाले लोग उन्हें गोद लेकर घर ले जाएं और वैक्सीन भी लगवाएं। अदालत ने नागपुर नगर निगम को यह सुनिश्चित करने और आम जनता के लिए उनके द्वारा निर्धारित उपयुक्त स्थानों पर आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए कदम उठाने का भी निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वाले व्यक्तियों से यह भी अपेक्षा की कि वे सार्वजनिक तौर पर समस्या पैदा न करें। आप इस बात पर जोर नही दे
सकते कि जो लोग आवारा कुत्तों को खिलाते हैं, उन्हें गोद लेना चाहिए। हरेक जगह की अपनी समस्या होती है। आवारा कुत्तों की समस्या हरेक जगह है। हम ये आदेश जारी नहीं कर सकते कि आवारा कुत्तों को कोई खाना ना दें।



