लिपाई-पुताई में लापरवाही उजागर, 2 करोड़ के इंडोर स्टेडियम निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल, जिम्मेदार अधिकारी बेपरवाह, बिना सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और सुरक्षा उपकरणों के ऊंचाई पर काम कर रहे मजदूर, घटिया फिनिशिंग से निर्माण कार्य पर उठे सवाल

जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय जांजगीर के हाईस्कूल मैदान के समीप लगभग 2 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन बैडमिंटन इंडोर स्टेडियम का कार्य अंतिम चरण में पहुंचता नजर आ रहा है, लेकिन जैसे-जैसे निर्माण आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े होने लगे हैं। वर्तमान में भवन की लिपाई-पुताई का कार्य किया जा रहा है, जहां पहली नजर में ही गुणवत्ता की कमी साफ दिखाई दे रही है। दीवारों की फिनिशिंग, प्लास्टर की समतलता और रंगाई-पुताई का स्तर अपेक्षित गुणवत्ता से काफी नीचे बताया जा रहा है।
इतना ही नहीं, निर्माण स्थल पर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी भारी लापरवाही सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मजदूर ऊंचाई पर केवल बांस के सहारे चढ़कर लिपाई-पुताई कर रहे हैं, जबकि उन्हें सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट, सुरक्षा जूते या अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। निर्माण कार्य में बरती जा रही यह लापरवाही श्रम सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
अनुभवहीन व्यक्ति को सौंपा गया काम
सूत्रों के अनुसार, लिपाई-पुताई का कार्य जिस व्यक्ति को सौंपा गया है, वह न तो पेशेवर ठेकेदार बताया जा रहा है और न ही इस प्रकार के बड़े निर्माण कार्यों का अनुभवी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि निर्माण एजेंसी ने किस आधार पर उसे यह महत्वपूर्ण कार्य सौंप दिया। यदि यह जानकारी सही है तो कार्य आवंटन की प्रक्रिया भी जांच का विषय बन सकती है।
खिलाड़ियों के लिए बन रहा आधुनिक स्टेडियम, लेकिन गुणवत्ता पर संकट
इस इंडोर बैडमिंटन स्टेडियम का निर्माण स्थानीय खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। योजना के अनुसार यहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली सिंथेटिक मैट, खिलाड़ियों के प्रदर्शन के अनुरूप बेहतरीन लाइटिंग सिस्टम, चेंजिंग रूम, प्रसाधन, तथा दर्शकों के बैठने के लिए गैलरी जैसी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। लेकिन निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति को देखकर आशंका जताई जा रही है कि यदि अभी से गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद खिलाड़ियों को अपेक्षित स्तर की सुविधा नहीं मिल पाएगी।
स्थानीय विधायक ने भी जताई थी नाराजगी

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप ने निर्माणाधीन स्टेडियम का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्य की गुणवत्ता पर असंतोष व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ कराया जाए और किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। इसके बावजूद वर्तमान में लिपाई-पुताई, बिजली फिटिंग सहित अन्य कार्यों में गुणवत्ता का अभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जनप्रतिनिधि के निर्देशों के बाद भी संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी ने सुधार के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए।
जिम्मेदारों की निगरानी पर उठे सवाल
निर्माण कार्य में सामने आ रही खामियों ने संबंधित विभाग, निर्माण एजेंसी और निगरानी करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। करोड़ों रुपए की सार्वजनिक राशि से तैयार हो रही इस महत्वपूर्ण खेल परियोजना में यदि अभी से गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है, तो भविष्य में भवन की मजबूती और खिलाड़ियों की सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े होना तय है। अब आवश्यकता इस बात की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए, गुणवत्ता की स्वतंत्र समीक्षा हो तथा मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, ताकि खिलाड़ियों के लिए बनाया जा रहा यह इंडोर स्टेडियम वास्तव में अपने उद्देश्य को पूरा कर सके।



