Reg No. CG-06-0026209
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.56.31 (1)
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.55.51 (1)
b5ce874a-8a3f-482a-9d4a-eaf6ab18dc7e
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

बिलासपुर में ‘नक्शा घोटाला’ का खुलासा: 60 फ्लैट की अनुमति, 90 फ्लैट का नक्शा पास; फर्जी आर्किटेक्ट के नाम पर सैकड़ों मंजूरियां

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में शहरी विकास से जुड़े एक बड़े कथित “नक्शा घोटाले” का मामला सामने आया है। दस्तावेजों की जांच में सामने आया है कि एक परियोजना में 60 फ्लैट की अनुमति के बावजूद 90 फ्लैट और छह मंजिल का नक्शा स्वीकृत कर दिया गया। वहीं एक ऐसे कथित आर्किटेक्ट के नाम पर 400 से अधिक भवन नक्शे और 150 से ज्यादा लेआउट मंजूर किए जाने का खुलासा हुआ है, जिसका शहर में कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं बताया जा रहा है।

मामला अज्ञया नगर क्षेत्र में प्रस्तावित ‘मेसर्स अनंत रियाल्टी’ प्रोजेक्ट से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि प्रोजेक्ट से जुड़े बिल्डर नमन गोयल ने विभागीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत से मास्टर प्लान और निर्माण नियमों को दरकिनार करते हुए प्रोजेक्ट की स्वीकृति हासिल की।

एरिया स्टेटमेंट और स्वीकृत नक्शे में बड़ा अंतर
दस्तावेजों के अनुसार प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तुत एरिया स्टेटमेंट में चार मंजिलों पर 60 फ्लैट प्रस्तावित बताए गए थे। लेकिन जब विभागीय स्वीकृति जारी हुई तो उसमें 90 फ्लैट और छह मंजिल का नक्शा पास कर दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि एरिया स्टेटमेंट और स्वीकृत नक्शे के बीच इतना बड़ा अंतर सामान्य प्रशासनिक त्रुटि नहीं माना जा सकता।

See also  CG NEWS : रिश्वतखोर लिपिक पर 6 साल बाद कोर्ट का फैसला 3 वर्ष की कैद

फर्जी आर्किटेक्ट के नाम पर मंजूरियां
जांच में यह भी सामने आया कि इस प्रोजेक्ट का नक्शा ‘विकास सिंह’ नामक कथित आर्किटेक्ट के माध्यम से तैयार बताया गया है। हालांकि नगर निगम और पेशेवर संस्थाओं के रिकॉर्ड में इस नाम का कोई पंजीकृत आर्किटेक्ट या इंजीनियर मौजूद नहीं है।
बताया जा रहा है कि इसी नाम का उपयोग पहले भी कई निर्माण परियोजनाओं के नक्शे पास कराने में किया गया था। बाद में संदेह होने पर नगर निगम ने इस नाम से जुड़े लाइसेंस को निलंबित और बाद में ब्लैकलिस्ट भी कर दिया था।

महुआ होटल मामले से जुड़ा कनेक्शन
नगर निगम द्वारा पुराने बस स्टैंड के पास महुआ होटल में अवैध निर्माण के खिलाफ की गई कार्रवाई के दौरान भी यही नाम सामने आया था। जांच में पाया गया था कि होटल निर्माण में स्वीकृत नक्शे की कई शर्तों का उल्लंघन किया गया और ओपन स्पेस व पार्किंग जैसे नियमों की अनदेखी की गई।

Advertisment

400 नक्शे और 150 लेआउट की मंजूरी
विभागीय फाइलों की जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि ‘विकास सिंह’ नाम के माध्यम से शहर में 400 से अधिक भवन नक्शे और 150 से ज्यादा लेआउट स्वीकृत किए जा चुके हैं। यानी एक ऐसे नाम के आधार पर वर्षों तक निर्माण स्वीकृतियां जारी होती रहीं, जिसका आधिकारिक अस्तित्व ही संदिग्ध है।

See also  नवनियुक्त कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने माँ चन्द्रहासिनी के दर्शन कर अपने कार्यों का विधिवत लिया दायित्व...

EWS जमीन को लेकर भी आरोप
मामले में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आवास निर्माण को लेकर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि बिल्डर ने विभाग को दिए शपथपत्र में ग्राम तिफरा के खसरा नंबर 407/7 पर EWS फ्लैट बनाने का दावा किया, जबकि राजस्व रिकॉर्ड में वह जमीन बिल्डर के नाम पर दर्ज नहीं पाई गई।

एक दिन में 29 लेआउट मंजूरी
जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि कुछ मामलों में एक ही दिन में 29 लेआउट फाइलों को मंजूरी दी गई। शहरी नियोजन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया में इतनी बड़ी संख्या में लेआउट स्वीकृत करना लगभग असंभव है, जिससे विभागीय मिलीभगत की आशंका और गहरा गई है।

See also  कलयुगी पिता की दरिंदगी! बेटे की हत्या के बाद खुद ने भी की जीवनलीला समाप्त...

करोड़ों के लेनदेन की आशंका
नगर निगम के अनुमान के अनुसार एक एकड़ रिहायशी लेआउट की मंजूरी के लिए 75 हजार से 2.5 लाख रुपये तक और मकान के नक्शे के लिए 8 हजार से 20 हजार रुपये तक शुल्क लिया जाता है। ऐसे में सैकड़ों नक्शे और लेआउट की मंजूरी से करोड़ों रुपये के कथित लेनदेन की आशंका जताई जा रही है।

जांच और कार्रवाई की मांग
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद बिलासपुर के शहरी विकास तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित बिल्डर और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है।

फिलहाल यह मामला बिलासपुर के रियल एस्टेट क्षेत्र और प्रशासनिक तंत्र में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है, और अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस कथित घोटाले पर आगे क्या कार्रवाई करता है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!