Iran Internet Cable: क्या UPI और WhatsApp हो जाएंगे बंद? समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल को लेकर क्यों बढ़ी दुनिया की चिंता

नई दिल्ली। आज के दौर में इंटरनेट हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन पेमेंट से लेकर WhatsApp पर मैसेज भेजने, YouTube पर वीडियो देखने और क्लाउड सेवाओं का इस्तेमाल करने तक, ज्यादातर डिजिटल गतिविधियां इंटरनेट पर निर्भर हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल को नुकसान पहुंच जाए, तो दुनिया की डिजिटल सेवाओं पर क्या असर पड़ेगा?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच समुद्र के नीचे बिछी कम्युनिकेशन केबल को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि अमेरिका और इजरायल दोबारा ईरान पर हमला करते हैं, तो ईरान खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अंडरसी इंटरनेट केबल को निशाना बनाने पर विचार कर सकता है। हालांकि, यह दावा रिपोर्ट में सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से किया गया है। इसे केबल काटे जाने की पुष्टि या भारत में इंटरनेट बंद होने की निश्चित घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है अहम?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी संख्या में तेल और अन्य सामान ले जाने वाले जहाज गुजरते हैं। इस क्षेत्र के आसपास समुद्र के नीचे कम्युनिकेशन केबल भी बिछी हुई हैं, जो एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच डेटा के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इन केबल के जरिए अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक, डिजिटल सेवाओं और संचार नेटवर्क को एक-दूसरे से जोड़ा जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में केबल को नुकसान पहुंचने से कई देशों के इंटरनेट नेटवर्क पर असर पड़ सकता है।
क्या UPI और WhatsApp हो जाएंगे बंद?
अगर समुद्र के नीचे बिछी प्रमुख इंटरनेट केबल को नुकसान पहुंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में WhatsApp, YouTube, सोशल मीडिया, क्लाउड सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्लेटफॉर्म पर कनेक्टिविटी की समस्या आ सकती है।
भारत में UPI पेमेंट भी प्रभावित हो सकते हैं, खासकर यदि संबंधित बैंक, पेमेंट नेटवर्क या इंटरनेट कनेक्टिविटी में बाधा आती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि एक केबल कटते ही भारत में सभी UPI सेवाएं और WhatsApp पूरी तरह बंद हो जाएंगे।
इंटरनेट का ट्रैफिक कई अलग-अलग केबल और नेटवर्क के जरिए संचालित होता है। वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने पर डेटा ट्रैफिक को दूसरे रास्तों से भेजा जा सकता है। इसलिए असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी केबल प्रभावित हुई हैं और नेटवर्क के पास कितने वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध हैं।
दुनिया का इंटरनेट समुद्र के नीचे बिछी केबल पर निर्भर
दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट डेटा का बहुत बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबल के जरिए एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है। ये केबल डिजिटल दुनिया की अहम आधारभूत संरचना हैं। अगर किसी महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र में कई केबल क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो इंटरनेट की गति धीमी हो सकती है, डेटा ट्रांसफर में देरी आ सकती है और ऑनलाइन सेवाओं में रुकावट पैदा हो सकती है। इसका असर कारोबार, बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, वीडियो स्ट्रीमिंग और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
क्या भारत में इंटरनेट पूरी तरह ठप हो सकता है?
सिर्फ एक केबल को नुकसान पहुंचने से पूरे भारत का इंटरनेट बंद हो जाना तय नहीं है। भारत के इंटरनेट नेटवर्क को कई अंतरराष्ट्रीय केबल और वैकल्पिक कनेक्टिविटी मार्गों का सहारा मिलता है। लेकिन यदि बड़े पैमाने पर केबल प्रभावित होती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी पर गंभीर दबाव पड़ सकता है।फिलहाल, ईरान द्वारा इंटरनेट केबल काटे जाने और भारत में UPI या WhatsApp पूरी तरह बंद होने की आशंका को निश्चित घटना की तरह पेश करना सही नहीं होगा। वास्तविक असर किसी भी संभावित नुकसान की गंभीरता, प्रभावित केबलों और उपलब्ध वैकल्पिक नेटवर्क पर निर्भर करेगा।



