ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल में द्वितीय चरण के ओरिएंटेशन कक्षा में विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीवन जीने के कौशलो का विषयावार प्रयोग पर आयोजित सेमीनार का समापन…

ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल में द्वितीय चरण के ओरिएंटेशन कक्षा में विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीवन जीने के कौशलो का विषयावार प्रयोग पर आयोजित सेमीनार का समापन
जांजगीर-चांपा। ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल, बनारी, जांजगीर में स्कूल के डायरेक्टर आलोक अग्रवाल व प्राचार्या सोनाली सिंह के निर्देशन में द्वितीय चरण के ओरिएंटेशन कक्षा में विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीवन जीने के कौशलो का विषयावर प्रयोग पर सेमीनार आयोजित हुआ। इस आयोजन का नेतृत्व मिनी मोल थाॅमस और वर्षा सिंह के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के शुरूआत में उन्होंने शिक्षको को उनके विषयानुसार अंग्रेजी, हिन्दी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान समूह में विभाजित किया। इस श्रृंखला के अंतिम दिवस पर सामाजिक विज्ञान विषय पर ओरिएंटेशन कक्षा आयोजित की गई। जिसमें सामाजिक विज्ञान विषय की शिक्षिकाओं मनदीप कौर, आरती सिंह और विनीता पाण्डेय के द्वारा अपनी प्रस्तुति दी गई। इस कड़ी में सर्वप्रथम शिक्षिका मनदीप कौर द्वारा जीवन कौशल के दो विषय आत्म जागरुकता एवं गंभीर सोच विषय पर बताते हुए कहा कि इन कौशलो के माध्यम से लोगों में मताधिकार के प्रति जागरुकता लाई जा सकती है। उन्होनें कहा कि नेता चुनने में जनता भ्रमित रहती है। इन कौशलो के माध्यम से भावी नागरिक (विद्यार्थी) में जागरुकता आएगी और वे भविष्य में एक सही नेता चुनने में सक्षम हो सकेगें। तत्पश्चात् शिक्षिका आरती सिंह द्वारा जीवन कौशल के दो विषय आत्म जागरुकता एवं गंभीर सोच पर जानकारी देते हुए कहा कि इन कौशलो के माध्यम से विद्र्यािर्थयों में सरकार द्वारा बनाए गए नियम एवं कानून की जानकारी दी जा सकती है। तत्पश्चात् शिक्षिका विनीता पाण्डेय द्वारा समस्या समाधान एवं निर्णय लेना जीवन कौशल विषय पर बताते हुए कहा कि भारत में नोटबंदी के इतिहास की जानकारी विद्र्यािर्थयों को इन कौशलो के माध्यम से सही ढंग से दी जा सकती है तथा उनके व्यवहार में परिवर्तन लाया जा सकता है।
अंत में जीवन कौशलो पर आधारित अप्रैल माह के मासिक सेमिनार का समापन करते हुए शिक्षिका मिनी मोल थाॅमस एवं शिक्षिका वर्षा सिंह ने समस्त शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को दो समूहों में विभाजित करते हुए एक गतिविधि करवाते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के आधारभूत जीवन कौशलो का प्रयोग सिखाया। इस गतिविधि के माघ्यम से उनके द्वारा संदेश दिया गया कि जिस प्रकार शिक्षक इन सभी जीवन कौशलो को विद्यार्थियों में विकसित करते है और इसे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाने का अपना कर्तव्य पूरा करते है उसी प्रकार इस धरती के प्रत्येक व्यक्ति को प्राकृतिक संसाधनो का उचित व सीमित प्रयोग कर, आने वाली पीढ़ी के लिये सुरक्षित रखना चाहिए। इस गतिविधि में भाग लेकर सभी शिक्षक एवं शिक्षिकाएँ आनंदित एवं उत्साहित हुए।
कार्यक्रम के अन्त में नई राष्टीय शिक्षा नीति पर आधारित विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीवन कौशलो के अप्रैल माह में होने वाले मासिक सेमीनार के समापन पर प्राचार्या सोनाली सिंह के द्वारा शिक्षको को आदर्श शिक्षक बन, विद्यार्थियों का सर्वागींण विकास करने के लिये प्रोत्साहित किया। आत्म जागरूकता और ‘निर्णय लेना’ एवं समस्या समाधान के कौशल के बारे में बताया गया। उन्होनें भोज्य पदार्थो के विषय पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए बताया कि हमारे भोजन मे उपस्थित विभिन्न पोषक तत्व हमारे स्वास्थ्य के लिए कितने लाभदायक है तथा इनकी कमी से विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ हो सकती है। उन्होने बताया कि हमे मानसिक व शारीरिक रुप से स्वस्थ रहने के लिए योग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अतः हमे स्वस्थ रहने के लिए पौष्टिक आहार के साथ-साथ योग को भी अपने जीवन में लाना चाहिए। ‘पोषक तत्वों एवं विभिन्न बीमारियों ’ विषयों के माध्यम से श्रीमती सीमा पाण्डेय द्वारा आत्म जागरूकता, निर्णय लेना और समस्या समाधान जीवन कौशलो तथा योग के माध्यम से तनाव से मुक्ति जीवन कौशल को विद्यार्थियों में विकसित करना सीखाया। तत्पश्चात विज्ञान विषय में सुश्री प्रीति कोसरे ने आत्म जागरूकता और महम्वपूर्ण सोच जीवन कौशलो के बारे में बताते हुए कहा कि हमारे जीवन से जुडे़ प्रत्येक कार्य में विज्ञान शामिल है। हमारे द्वारा किये गये प्रत्येक व्यवहार में विज्ञान का योगदान होता है। इसलिए छात्रों में विज्ञान विषय के माध्यम से जीवन कौशलो आसानी से विकसित किया जा सकता है। सुश्री प्रीति कोसरे के द्वारा एक वीडियों के माध्यम से ‘कोशिका संरचना’ को प्रदर्शित करते हुए आत्म जागरूकता जीवन कौशल को बहुत ही रोचक तरीके से समझाया गया। उनके द्वारा विज्ञान तकनीकी के माध्यम से जीवन में उनका महत्व समझाते महत्वपूर्ण सोच और समस्या समाधान जीवन कौशलो पर भी चर्चा की गई। ’मलेरिया जीवन-चक्र’ और ’लिंग-निर्धारण’ विषय का उदाहरण देते हुए उन्होने कहा कि आत्म जागरूकता, समस्या समाधान और महत्वपूर्ण सोच जीवन कौशल के द्वारा छात्रों को जागरूक कर छात्रों के द्वारा इन कौशलो को अपने जीवन में प्रयोग कर जीवन को सुचारू रूप से चलाया जा सकता है।



