नवागढ़ ब्लॉक में दिव्यांगता पेंशन लेने वाले आधे से ज्यादा शिक्षक फर्जी, जिला मेडिकल बोर्ड से फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाकर हथियाई है नौकरी….

नवागढ़ ब्लॉक में दिव्यांगता पेंशन लेने वाले आधे से ज्यादा शिक्षक फर्जी
जिला मेडिकल बोर्ड से फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाकर हथियाई है नौकरी
जांजगीर-चांपा। जिले के नवागढ़ ब्लॉक में दिव्यांगता पेंशन लेने वाले आधे से ज्यादा शिक्षकों के फर्जी होने की बात सामने आ रही है।बताया जा रहा है कि शिक्षक की नौकरी हथियाने के लिए ज्यादातर लोगों ने जिला मेडिकल बोर्ड से फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाया है और उसी आधार पर वर्षों से शिक्षक के पद पर नौकरी कर सरकारी खजाने में सेंध लगा रहे है। खास बात यह है कि शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने राज्य मेडिकल बोर्ड से संबंधितों के दिव्यांगता प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराने कभी भी दिलचस्पी नहीं दिखाई है। यही वजह है कि फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर वर्षों से शिक्षक के पद पर नौकरी करने वाले जालसाज किस्म के लोग बड़ी आसानी से प्रत्येक माह दिव्यांगता पेंशन भी प्राप्त कर ले रहे हैं। दरअसल, छतीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश पर प्रदेशभर के समस्त विभागों में कार्यरत दिव्यांगों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र का सत्यापन प्रारंभ हो गया है। जिले के नवागढ़ विकासखंड में भी सत्यापन कार्य चल रहा है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नवागढ़ ने अपने अधीनस्थ कार्यरत 60 ऐसे सहायक शिक्षकों की सूची जारी की है, जो दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर न केवल शिक्षक पद पर नौकरी रहे है बल्कि, शासन से प्रतिमाह दिव्यांगता पेंशन भी प्राप्त कर रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि उक्त सूची में ऐसे-ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं, जो पूर्णरूप से स्वस्थ्य है। और उनमें किसी प्रकार की कोई दिव्यांगता नहीं है। इसके बावजूद, वे दिव्यांग बनकर नौकरी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिला मेडिकल बोर्ड जांजगीर ने मोटी रकम लेकर ऐसे लोगों के नाम पर फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया है, जिसके आधार पर ही जालसाज प्रवृत्ति के लोग असल दिव्यांगों का हक मारकर शिक्षक की नौकरी कर रहे हैं। बीईओ कार्यलय से जारी सूची पर गौर करे तो कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने स्थानांतरण और चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए एक हथियार के रूप में विभाग में दिव्यांगता प्रमाण पत्र पेश किया है और उसी प्रमाण पत्र के आधार पर प्रतिमाह दिव्यांगता पेंशन ले रहे हैं। वहीं, उक्त सूची में कुछ ऐसे भी नाम हैं, जो एक ही परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने एक साथ फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाकर शिक्षक की नौकरी हथियाई है। इन सबका खुलासा परत-दर-परत हो रहा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश के बाद फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर शिक्षा विभाग में नौकरी करने वालों पर राज्य सरकार नकेल कसती जा रही है। हालांकि, सभी फर्जी शिक्षकों को पकड़ पाना बहुत ही टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। क्योंकि, विभागीय अधिकारी ही ऐसे शिक्षकों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड के सामने फर्जी दिव्यांग शिक्षकों को पेश नहीं किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि दिव्यांगता का सर्टीफिकेट लगाकर नौकरी कर रहे शिक्षकों को राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड समक्ष जांच के लिए उपस्थित होने के निर्देश कई बार दिए गए हैं, लेकिन वे शिक्षक मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित नहीं हो रहे हैं क्योंकि, उन्हें पता है कि उनके द्वारा फर्जी तरीके से दिव्यांगता सर्टीफिकेट बनवाया गया है और उनमें दिव्यांगता का कोई भी लक्षण नहीं है।



