Reg No. CG-06-0026209
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-03).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-02).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-01).jpg
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

उबलते पानी से झुलसी कराह: रायपुर में दो पालतू कुत्तों पर क्रूरता, FIR दर्ज

⭕️ PETA इंडिया की शिकायत पर खमरडीह थाने में मामला दर्ज

⭕️ BNS 2023 की धारा 325 के तहत संज्ञेय अपराध

⭕️ पीड़ित पशुओं की तत्काल सुरक्षित जब्ती और उपचार की मांग

रायपुर, फ़रवरी 24, 2026 : एक शहर की असली पहचान उसकी सड़कों या रोशनी से नहीं, बल्कि उसके सबसे असहाय जीवों के प्रति उसके व्यवहार से होती है। राजधानी रायपुर में दो पालतू कुत्तों के साथ कथित मारपीट और उनमें से एक को उबलते पानी से झुलसाने की घटना ने संवेदनशील नागरिकों को भीतर तक झकझोर दिया है। यह मामला केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना की परीक्षा भी है।

घटना तब सामने आई जब एक चिंतित पड़ोसी ने कथित मारपीट का वीडियो साझा किया। फुटेज में दिखाई देने वाले दृश्य विचलित करने वाले बताए जा रहे हैं। स्थानीय स्वयंसेवकों वंचना लाबन, दीपेश मौर्य और उर्जा शृंगारपुरे ने मौके पर पहुंचकर कुत्तों की स्थिति प्रत्यक्ष रूप से देखी और गंभीर चिंता व्यक्त की। आरोप है कि एक कुत्ते को उबलते पानी से झुलसाया गया, जबकि दोनों के साथ मारपीट की गई।
मामले की जानकारी मिलते ही पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया, यानी People for the Ethical Treatment of Animals (PETA) ने डीसीपी नॉर्थ, एसीपी तथा खमरडीह पुलिस स्टेशन के अधिकारियों से संपर्क कर तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया। स्वयंसेवकों के सहयोग से भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई। यह धारा किसी भी पशु को अपंग करने या मारने को संज्ञेय अपराध के रूप में वर्गीकृत करती है, जिसके लिए पाँच वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। PETA इंडिया ने खमरडीह पुलिस स्टेशन से पीड़ित कुत्तों को तत्काल सुरक्षित जब्ती में लेकर समुचित चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि आगे किसी संभावित क्षति से बचाया जा सके।
कानून अपना काम करेगा, पर यह घटना समाज के लिए भी एक आईना है। पालतू पशु खिलौने या संपत्ति नहीं, संवेदनशील जीव हैं। वे अपने दर्द को शब्दों में नहीं ढाल सकते, पर उनकी कराह मौन नहीं होती। पशु-क्रूरता के मामलों को विशेषज्ञ सामाजिक हिंसा के व्यापक पैटर्न से जोड़कर देखते हैं। ऐसे संकेतों को समय रहते गंभीरता से लेना आवश्यक है।
यह भी उतना ही सच है कि किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना न्यायालय का विषय है और जांच प्रक्रिया अपने निष्कर्ष पर पहुंचेगी। किंतु नागरिक समाज की जिम्मेदारी इससे पहले शुरू होती है-जब वह अन्याय को देखता है और चुप रहने के बजाय आवाज उठाता है।
रायपुर की यह घटना चेतावनी है कि संवेदनहीनता धीरे-धीरे सामान्य न बन जाए। यदि बेजुबानों की रक्षा में हम उदासीन रहेंगे, तो करुणा का स्थान कठोरता ले लेगी। कानून की धाराएं आवश्यक हैं, पर सभ्यता का आधार दया है।
जांच जारी है। अब सबकी नजर इस पर है कि न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया कितनी तत्परता से आगे बढ़ती है। पर उससे भी बड़ा प्रश्न समाज के सामने है-क्या हम उन आंखों की दहशत को महसूस करेंगे, जो बोल नहीं सकतीं, या फिर इसे भी एक और खबर मानकर आगे बढ़ जाएंगे?

Advertisment
See also  भाजपा की दिग्गज महिला प्रत्याशियों के चुनावी रण में उतरते ही कांग्रेस "सकते" में विकल्प की गुंजाईश समाप्त...

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!