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छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

‘गोल-घेरा पठन ‘नवाचार बना एफएलएन की मिसाल,ग्रुप लर्निंग से बढ़ा आत्मविश्वास

जांजगीर-चांपा। बम्हनीडीह विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला सोंठी में नवाचार आधारित पठन की रणनीति से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है। समझ के साथ पठन यहाँ साकार हो रहा है। कक्षा में बच्चों को पंक्तियों में बैठाने के बजाय गोल घेरा यानि सर्कल में  बिठाकर ग्रुप लर्निंग करायी जा रही है। इससे बच्चों की सीखने की गति और रूचि दोनों में बेहतर सुधार हुआ है।यह पद्धति बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कारगर साबित हो रहा है। शाला में पदस्थ शिक्षिका ममता जायसवाल बच्चों को एफएलएन में शत प्रतिशत दक्ष करने के लिए नवाचार के तहत ग्रुप लर्निंग पर ज्यादा फोकस करती है। इसमें बच्चों को एक समूह में फर्श पर गोल घेरे में बैठा दी जाती है। हर समूह को नंबर, अक्षर चित्र वाली एक वर्कशीट दी जाती है बच्चें आपस मे चर्चा करते है। एक दूसरे को देखकर और मदद करके सवाल हल करते है। शिक्षक सिर्फ गाइड की भूमिका में रहते है। ममता जायसवाल का कहना है कि पहले बच्चें ब्लैकबोर्ड को देखकर डरते थे अब गोल घेरे में दोस्तों के साथ बैठते है तो झिझक खत्म होती है। जो बच्चा कमजोर है वो साथी से सीख लेता है। ग्रुप लर्निंग से बच्चों में पूछने और समझाने का आत्मविश्वास जागृत हुआ है। इस नवाचार से बच्चे एक दूसरे को देखकर सीखते है। उन्होंने बताया कि ग्रुप लर्निंग एफएलएन में बच्चों को दक्ष करने में सबसे अच्छा है। पहले जो बच्चा 10 मिनट में ऊब जाते थे अब 40 मिनट तक एक्टिव रहता है। ग्रुप लर्निंग से लीडरशीप और कम्युनिकेशन स्किल भी विकसित होता है। यह नवाचार बच्चों की पहली पसंद बन गया है। ग्रुप लर्निंग से बच्चों के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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