CG News: सीक्रेट चेंबर, फर्जी GPS और करोड़ों का लोहा… BSP का हाईटेक चोरी सिंडिकेट बेनकाब

Bhilai Steel Plant Iron Theft Case: देश के प्रमुख इस्पात संयंत्रों में शामिल भिलाई स्टील प्लांट इन दिनों भिलाई स्टील प्लांट लोहा चोरी कांड को लेकर चर्चा में है। पुलिस जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और प्लांट के अंदरूनी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार भिलाई स्टील प्लांट लोहा चोरी कांड में चोरी का तरीका बेहद सुनियोजित था। ट्रकों में पहले भारी स्टील प्लेट और कीमती स्क्रैप रखा जाता था। इसके बाद ऊपर फ्लाई एश की मोटी परत डाल दी जाती थी, जिससे देखने पर ट्रक में केवल औद्योगिक कचरा नजर आए और किसी को शक न हो।
सीक्रेट चेंबर और वजन का पूरा गणित
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि ट्रकों में गुप्त चेंबर बनाए गए थे। इतना ही नहीं, वजन जांच से बचने के लिए कुछ ट्रकों के अतिरिक्त टायर हटाकर उनका वजन कम किया जाता था। फिर उतने ही वजन का अतिरिक्त लोहा भर दिया जाता था ताकि कुल वजन सामान्य दिखाई दे। भिलाई स्टील प्लांट लोहा चोरी कांड में यह तरीका सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है।
GPS और नंबर प्लेट बदलकर दिया जाता था चकमा
जांच में यह भी सामने आया कि प्लांट के भीतर प्रवेश करने के बाद कुछ ट्रकों के GPS ट्रैकर हटाए जाते थे। कई मामलों में नंबर प्लेट भी बदल दी जाती थी ताकि वाहन की वास्तविक आवाजाही का रिकॉर्ड आसानी से न मिल सके। पुलिस इन तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है।
पुलिस ने जब्त किया करोड़ों का सामान
दुर्ग पुलिस ने कार्रवाई के दौरान एक स्क्रैप यार्ड से करीब 250 टन लोहा, भारी मशीनें, ट्रक, हाइड्रा क्रेन और अन्य उपकरण जब्त किए हैं। शुरुआती आकलन के अनुसार जब्त सामग्री की कीमत ₹3.22 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। भिलाई स्टील प्लांट लोहा चोरी कांड में यह अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी मानी जा रही है।
बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी से बढ़ी जांच
मामले में भिलाई स्टील प्लांट के दो अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि तकनीकी जांच और दस्तावेजों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। हालांकि आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया और आगे की जांच के बाद ही होगी।
फर्जी कंपनियों और बैंक खातों की भी जांच
मुख्य आरोपी से जुड़े कई बैंक खातों, पासबुक और अलग-अलग कंपनियों के दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अवैध लेनदेन का पैसा कहां-कहां भेजा गया और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। भिलाई स्टील प्लांट लोहा चोरी कांड की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
CBI जांच की मांग भी तेज
मामला सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े इस्पात संयंत्र से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं। कई लोगों ने पूरे प्रकरण की CBI या अन्य केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है।
जांच अभी जारी है
पुलिस का कहना है कि भिलाई स्टील प्लांट लोहा चोरी कांड में फरार आरोपियों की तलाश जारी है। साथ ही वित्तीय रिकॉर्ड, ट्रांजेक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल जांच जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।



