CG News: बस्तर में शांति के बाद विकास की बारी, अमित शाह ने खोला भविष्य का विजन

रायपुर : विकसित बस्तर मिशन के तहत छत्तीसगढ़ के बस्तर में सोमवार को एक ऐतिहासिक माहौल देखने को मिला। कभी माओवादी हिंसा और भय की पहचान रहे इस इलाके में अब विकास, शांति और नई उम्मीदों की चर्चा हो रही है। आसना स्थित बादल अकादमी के मंच से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अगले चार से पांच साल में बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प दोहराया।कार्यक्रम में हजारों ग्रामीण, सुरक्षा बलों के जवान, बलिदानी परिवार और समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे। मंच से दिया गया यह संदेश बस्तर के बदलते दौर की नई तस्वीर बनकर सामने आया।
माओवादी मुक्त बस्तर को लेकर अमित शाह ने कहा कि जनवरी 2024 में रायपुर में हुई समन्वय बैठक में 31 मार्च 2026 तक देश को माओवादी हिंसा से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया था। उस समय कई लोगों को यह असंभव लग रहा था, लेकिन सुरक्षा बलों की रणनीति और लगातार अभियान ने हालात बदल दिए।उन्होंने कहा कि दशकों तक माओवादियों ने बस्तर को विकास की मुख्यधारा से दूर रखा। सड़कें, स्कूल और सरकारी योजनाएं गांवों तक नहीं पहुंचने दी गईं। अब वही बस्तर तेजी से बदल रहा है।
सुरक्षा कैंप अब बनेंगे जनसुविधा केंद्र
बस्तर विकास योजना के तहत अब सुरक्षा कैंपों की भूमिका भी बदलने वाली है। अमित शाह ने नेतानार में सुरक्षा कैंप को जनसुविधा केंद्र में बदलने की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि अब इन्हीं केंद्रों से गांवों तक बैंकिंग, राशन, स्वास्थ्य सेवाएं और सरकारी योजनाएं पहुंचाई जाएंगी।सरकार का मानना है कि बस्तर के दूरस्थ इलाकों तक सुविधाएं पहुंचाना ही स्थायी शांति का आधार बनेगा।
ग्रामीणों ने साझा किए दर्द और उम्मीद
बस्तर शांति अभियान के दौरान कार्यक्रम में कई ग्रामीण और माओवादी हिंसा से प्रभावित परिवार भावुक नजर आए। लोगों ने बताया कि कैसे वर्षों तक भय और असुरक्षा के बीच जीवन गुजरा।सुरक्षा बलों के जवानों ने भी साझा किया कि घने जंगलों, पहाड़ियों और कठिन इलाकों में लगातार ऑपरेशन चलाकर माओवादी नेटवर्क को कमजोर किया गया।
‘बस्तर उद्योगपतियों को नहीं सौंपेंगे’
विष्णुदेव साय बयान भी कार्यक्रम का अहम हिस्सा रहा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि सरकार बस्तर की जमीन उद्योगपतियों को सौंपने नहीं जा रही। उन्होंने साफ कहा कि बस्तर का विकास यहां के आदिवासियों और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। देउरगांव और मटनार बैराज जैसी सिंचाई परियोजनाओं से खेती को मजबूत किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने बताया ‘साहस और सामर्थ्य’
विजय शर्मा माओवादी अभियान को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि दो साल में माओवादी हिंसा खत्म करने का लक्ष्य तय करना अपने आप में बड़ा साहस था।उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री के स्पष्ट विजन और सुरक्षा बलों के समन्वय से ही यह संभव हो पाया है।
आठ राज्यों की पुलिस का सम्मान
सुरक्षा बल सम्मान समारोह में माओवादी हिंसा के खिलाफ अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले आठ राज्यों की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को सम्मानित किया गया।छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और बिहार के अधिकारियों को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।
तकनीक बनी निर्णायक हथियार
एंटी नक्सल ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक की भूमिका को भी कार्यक्रम में रेखांकित किया गया। एनटीआरओ, इसरो, डीआरडीओ और खुफिया एजेंसियों से मिली तकनीकी सहायता को माओवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता का आधार बताया गया।अमित शाह ने कहा कि बस्तर देश के सबसे कठिन ऑपरेशनल क्षेत्रों में से एक रहा है, लेकिन सुरक्षा बलों ने समर्पण और रणनीति से हालात बदल दिए।



