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BREAKING NEWS : बताशा फैक्ट्री में भारी गंदगी, लोगों की सेहत से खिलवाड़…

बिलासपुर,20अक्टूबर। दिवाली पर्व पर लक्ष्मी माता को बताशे का भोग लगाना बहुत शुभ और लाभदायक माना जाता है। मान्यता है कि इससे देवी प्रसन्न होती हैं और उनकी कृपा परिवार पर बनी रहती है। लेकिन, बिलासपुर में बनने वाले बताशे की न कोई शुद्धता है और न ही सफाई। जिस शीट पर बताशे की टिक्की तैयार किया जा रहा है, उस पर गंदगी के बीच चप्पल पहनकर मजदूर चाशनी गिराते नजर आया। दरअसल, दीपावली पर्व से जुड़ी अनेक मान्यताएं और परंपराएं हैं।

ऐसी ही एक परंपरा है दिवाली पूजन में देवी लक्ष्मी को खील-बताशे का भोग लगाना। दिवाली की इस परंपरा के पीछे व्यवहारिक, दार्शनिक और ज्योतिषीय कारण हैं। धन-वैभव का दाता शुक्र ग्रह माना गया है। शुक्र ग्रह का प्रमुख धान्य धान ही होता है। शुक्र को प्रसन्न करने के लिए हम लक्ष्मी को खील-बताशे का प्रसाद चढ़ाते हैं। खील यानी मूलत: धान (चावल) का ही एक रूप है। यह चावल से बनती है और यह प्रमुख अन्न भी है। दीपावली के पहले ही इसकी फसल तैयार होती है, इस कारण लक्ष्मी को फसल के पहले भोग के रूप में खील-बताशे चढ़ाए जाते हैं। बताशे को सुख और प्रेम का प्रतीक माना गया है।

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इसे मां लक्ष्मी को अर्पित करने से जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य बढ़ता है। जिस जगह पर बताशे बनाए जा रहे हैं, वहां न तो कोई साफ-सफाई है और न ही ढंकने के लिए बर्तन। बताशा बनाने वाले हलवाई और मजदूर चप्पल पहन उसी जगह पर आना-जाना कर रहे हैं, जहां बताशा बनाने के लिए चाशनी गिराई जा रही है। चाशनी उबालने वाला गंजा और बर्तन भी साफ नहीं है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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