छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा
एक युवा शिक्षक जिसने विद्यालय की तस्वीर ही बदल दी…

एक युवा शिक्षक जिसने विद्यालय की तस्वीर ही बदल दी
जांजगीर-चांपा। विद्यालय ज्ञान का मंदिर होता है एक ऐसा मंदिर जिसमे केवल ज्ञान की पूजा होती है लेकिन उस ज्ञान के मंदिर का मुख्य पुजारी शिक्षक की होता है। ज्ञान रूपी देवता तभी प्रसन्न होते हैं जब शिक्षक अर्थात पुजारी विधि विधान से उस देवता की पूजा करें शासकीय विद्यालयों के लिए यह उदाहरण बिल्कुल सटीक बैठता है। यदि शिक्षक अच्छे होते हैं तो वे अपनी मेहनत से पूरे विद्यालय की तस्वीर ही बदल के रख देते हैं और लोगों में एक विश्वास कायम करने में सफल होते हैं कि देखें अनेक निजी विद्यालयों को आपने परखा है। लेकिन उससे कहीं योग्य और शिक्षित तंत्र शासन के पास है अतः आप एक बार शासन पर यकीन करिए, जब एक शिक्षक इस प्रकार का संदेश समाज के लोगों तक देने में सफल होता है तो निश्चित ही परिवर्तन शुरू हो जाता है।
यह परिवर्तन शिक्षा से शुरू होता है और इस परिवर्तन की झलक पूरे समाज और राष्ट्र तक देखने को मिलती है। इन सभी की चर्चा करने का तात्पर्य हम उदाहरण के रूप में एक ऐसे शिक्षक को सामने देख रहे हैं कि जिन की मांग गांव गांव तक फैली हुई है। 2009 में कुटरा विद्यालय में इस युवा व्याख्याता का पदार्पण हुआ। उस समय विद्यालय की स्थिति कुछ और ही थी गांव में 2 विद्यालय थे जो निजी स्तर पर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल हो रहे थे इनके पास संसाधन की बहुत कमी थी परंतु फिर भी वे निजी के नाम पर पैसा लोगों से वसूल रहे थे और बदले में वे अधूरी शिक्षा ही लोगों तक परोस रहे थे। 2009 में ही युवा व्याख्याता अनुराग तिवारी का पदार्पण इस विद्यालय में हुआ और देखते-देखते 44 बच्चों के साथ उन्होंने अपने सफर की शुरुआत की। सफर कठिन था क्योंकि लोगों का शिक्षा पर विश्वास उठ गया था उन्होंने जमीनी स्तर पर अपना कार्य शुरू किया लोगों का विश्वास कायम करने के लिए उन्होंने जी तोड़ मेहनत किया सबसे पहले विद्यालय में पहुंचना सभी विद्यार्थियों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित करना पलकों से संपर्क रखना यह उनके प्रारंभिक उपाय थे जिससे लोगों का विश्वास शासकीय विद्यालय की ओर बढ़ा। लोगों में यह विश्वास कायम होने लगा कि कोई तो ऐसा है जो उनके बारे में सोचता है जो उनके बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए उतना ही चिंतित है जितना कि वे 2009 और 2010 में जब उन्होंने मेहनत किया तो उसका परिणाम भी सकारात्मक आया बच्चे जो प्रारंभिक शिक्षा में ककहरा भी नहीं जान पाए थे अब वे संघर्ष करने लगे और उनके संघर्ष के परिणाम स्वरूप उनका परीक्षा परिणाम भी बहुत ही उत्साहजनक था। अनुराग ने अपने बच्चों को और आगे बढ़ाने की सोची देखा कि ऐसा क्या है जो बच्चे शासकीय विद्यालयों के प्रति उन्होंने इसकी शुरुआत विद्यालय के प्रधान परिवर्तन से किया सभी बालकों को उन्होंने एकत्र किया और कहा कि यदि हमें आगे बढ़ना है तो बच्चों के मन से यह भावना बाहर निकालनी पड़ेगी कि वह शासकीय विद्यालयों में पढ़ रहे हैं जो विकास से कोसों दूर है। पालक अनुराग जी की बात से सहमत हो गए और उन्होंने एक स्वर में कहा कि आप जो भी निर्णय लेंगे हम आपके साथ हैं 3 गांव के सरपंचों ने भी अनुराग जी के इस कदम की सराहना की और साथ देने का संकल्प लिया। इस युवा व्याख्याता ने सबसे पहले इस विद्यालय की पूरी तस्वीर बदल देने की पेशकश सामने रखी उन्होंने विद्यालय के परिधान में बड़ा परिवर्तन किया बहुत ही कम खर्च में अनुराग के प्रयास से जांजगीर के मदन लाल अग्रवाल के सहयोग से ₹350 की मामूली दर पर बच्चों के लिए परिधान की व्यवस्था की गई यह परिधान उनके लिए सूरत से मंगाने की व्यवस्था भी की गई। धान की खास बात रही कि जहां निजी विद्यालयों को यह परिधान ₹700 में उपलब्ध थे वही विद्यालय के आम बच्चों के लिए उन्होंने 350 रूपये की दर से शर्ट पैंट और छात्राओं के लिए सलवार और सूट की व्यवस्था कर दी। पालक शिक्षक की इस पहल से खासे प्रभावित हुए और उन्होंने बच्चों को नए कलेवर में विद्यालय भेजना प्रारंभ किया यहीं से बच्चों की मानसिकता में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला। प्रधान इतना आकर्षक था कि आस-पास के विद्यालय के शिक्षक प्राचार्य सभी यहां के बच्चों को ध्यान पूर्वक देखें और अपने भी विद्यालय में इस पहल को लागू करने का प्रयास करने लगे। धीरे-धीरे कुटरा विद्यालय पूरे जांजगीर जिले ही नहीं अपितु प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान बना पाने में सफल होने लगा। 2017 में बच्चों के सामने एक विकट समस्या उत्पन्न होते देख अनुराग जी ने संकल्प लिया कि वे जल्द से जल्द बच्चियों को 11वीं और 12वीं की शिक्षा किसी गांव में देने का प्रयास करेंगे। तीनों गांवों के सरपंचों के सामने उन्होंने यह बात रखें सभी ने एक ही मजबूरी बताई कि हम थक गए हैं परंतु हमारी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं। युवा व्याख्याता अनुराग ने तब इंटरनेट की तकनीक का सहायता लेते हुए 2017 में विधानसभा के तत्कालीन सचिव देवेंद्र वर्मा जी से दूरभाष से वार्तालाप की और यह निवेदन किया कि हमारे बच्चे विधानसभा की कार्यवाही को प्रत्यक्ष रूप से देखने को उत्सुक है। देवेंद्र वर्मा ने अनुराग की इस पहल का स्वागत किया और तुरंत ही 80 बच्चों के पास की व्यवस्था अपने प्रयास से कर दी। तीनों गांव के महिला सरपंच और पंच के साथ ही बच्चों के पालक और बच्चे दो बस में सवार होकर के रायपुर अनुराग एवं प्राचार्य एल आर साहू के नेतृत्व में चल पड़े वहां उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही को प्रत्यक्ष रूप से देखा सभी लोग हैरान थे कि एक सुदूर इलाके के Hands आज विधानसभा की कार्यवाही को देख रहे थे और उन्हें कानून की बनने प्रक्रिया का प्रत्यक्ष आभास हो रहा थ। इन बच्चों को यहां देखकर तत्कालीन शिक्षा सचिव अंबेश जांगड़े की पहल से तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से मुलाकात हुई। रमन सिंह ने अनुराग से भेंट की और उनकी इस पहल से काफी प्रभावित हुए और कहा कि आप बच्चों को लेकर कुटरा जैसे ही पहुंचेंगे आर्डर आपके हाथ में होगा और हमको कुटरा विद्यालय का उन्नयन करते हुए हर्ष की अनुभूति होगी। हुआ भी यही विद्यालय को जल्द ही हायर सेकंडरी विद्यालय में तब्दील कर दिया गया और बच्चों को पढ़ने की आजादी मिल गई। इसके बाद यहां का परीक्षा परिणाम भी दूसरे विद्यालयों के लिए नजीर रहा 2019 में जब प्रथम बार हायर सेकेंडरी विद्यालय का परीक्षा परिणाम आया तों लोगों की आंखें खुली की खुली रह गई इस बार 12वीं का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा पूरे बच्चे उत्तीर्ण हुए। 2020 22 में भी यह परीक्षा परिणाम दूसरे विद्यालयों के सामने एक नजीर के रूप में ही सामने रहा। 2023 में अपने पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए इस विद्यालय ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया इस वर्ष कक्षा दसवीं के 95% छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण कही वहीं 12वीं का परिणाम इस वर्ष भी शतप्रतिशत रहा। मां के पालक विद्यालय की प्रगति से अभिभूत है वह इस सभी का कारण अनुराग को ही मानते हैं। इस प्रकार से हम देखते हैं कि यदि एक शिक्षक शिक्षा के माध्यम से समाज में प्रगति का संदेश भेजना चाहता है तो यह संदेश पूरे प्रदेश इन्हीं राष्ट्र स्तर पर गूँजता है और इसका परिणाम भी सकारात्मक होता है।
आज अनुराग की पहचान प्रदेश स्तर पर एक उभरते युवा व्याख्याता के रूप में हो चुकी है उन्होंने अपने अभूतपूर्व संघर्ष के चलते विद्यालय के बच्चों को ना केवल संघर्षों से सूचना सिखाया अपितु उससे पार पाने की तकनीक भी उन्हें सिखाई यही कारण है कि प्रदेश की सरकार ने उन्हें कई महत्वपूर्ण पुरस्कारों से नवाजा जिसमें 2022 में मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण पुरस्कार 2023 में उन्हें राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त करने वाले व्याख्याताओं की सूची में रखा गया। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के द्वारा समय-समय पर उन्हें राज्य स्तरीय शिक्षक के रूप में भी सामने प्रस्तुत किया जाता है ताकि उनके अनुभव का लाभ आम शिक्षकों को मिल सके।



