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कक्षा शिक्षण में अनुदेशात्मक डिजाइन पर एक दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) आयोजित

जांजगीर-पामगढ़। स्टरलाइट एडइंडिया फाउंडेशन द्वारा छत्तीसगढ़ में संचालित Teacher Education Programme के अंतर्गत चैतन्य साइंस एंड आर्ट्स कॉलेज, पामगढ़ में “कक्षा शिक्षण में अनुदेशात्मक डिजाइन (Instructional Designing for Classroom Teaching)” विषय पर एक दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (Faculty Development Programme–FDP) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्राध्यापकों को आधुनिक एवं प्रभावी शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराते हुए कक्षा शिक्षण को अधिक विद्यार्थी-केंद्रित, सहभागितापूर्ण एवं परिणामोन्मुख बनाना रहा।
कार्यक्रम में संस्थान के संचालक वीरेंद्र तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति एवं मार्गदर्शन रहा। कार्यक्रम की प्रमुख सुविधादाता (Resource Person) सुश्री कविता शर्मा, सीनियर मैनेजर–ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट, Sterlite EdIndia Foundation रहीं। इस अवसर पर स्टरलाइट एडइंडिया फाउंडेशन के स्टेट हेड, छत्तीसगढ़ रघुनाथन नायर एवं प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर रितेश सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
संकाय विकास कार्यक्रम का आयोजन एवं समन्वय चैतन्य साइंस एंड आर्ट्स कॉलेज, पामगढ़ के प्राचार्य डॉ. विनोद गुप्ता एवं चैतन्य महाविद्यालय, पामगढ़ के प्राचार्य डॉ. अमित चंद्रा के मार्गदर्शन में चंचल यादव, IQAC Coordinator द्वारा किया गया।
ADDIE Model पर विस्तार से हुई चर्चा
FDP के दौरान अनुदेशात्मक डिजाइन के महत्व, प्रभावी निर्देशों की विशेषताओं तथा उन्हें कक्षा में स्पष्ट, व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के तरीकों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। प्रतिभागियों को अनुदेशात्मक डिजाइन के विभिन्न मॉडलों से परिचित कराया गया तथा विशेष रूप से ADDIE Model के पाँच चरणों—Analysis, Design, Development, Implementation एवं Evaluation—पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रशिक्षण में बताया गया कि सुव्यवस्थित अनुदेशात्मक डिजाइन के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों की आवश्यकताओं एवं सीखने के स्तर को ध्यान में रखते हुए प्रभावी पाठ-योजना तैयार कर सकते हैं तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक उद्देश्यपूर्ण एवं परिणामोन्मुख बना सकते हैं।
गतिविधि-आधारित एवं इंटरैक्टिव रहा प्रशिक्षण
कार्यक्रम को इंटरैक्टिव एवं गतिविधि-आधारित (Activity-Based Learning) स्वरूप दिया गया। प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों, समूह-चर्चाओं एवं व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से अनुदेशात्मक डिजाइन की अवधारणाओं को समझा और उन्हें वास्तविक कक्षा शिक्षण से जोड़कर देखा।
महाविद्यालय के फैकल्टी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपने शिक्षण अनुभव साझा किए तथा कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक, सहभागितापूर्ण एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।
प्रभावी शिक्षण के महत्वपूर्ण आयामों पर जोर
कार्यक्रम के दौरान प्रभावी पाठ-योजना (Effective Lesson Planning), शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण (Learner-Centred Teaching), कक्षा जुड़ाव (Classroom Engagement) तथा परिणाम-आधारित निर्देशात्मक अभ्यास (Outcome-Based Instructional Practices–OBIP) पर विशेष जोर दिया गया।
प्रशिक्षण में इस बात पर बल दिया गया कि प्रभावी शिक्षण केवल विषय-वस्तु के संप्रेषण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता, सीखने के अपेक्षित परिणाम, कक्षा में संवाद तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास को भी प्रमुख स्थान दिया जाना चाहिए।
कविता शर्मा का स्मृति-चिह्न एवं श्रीफल से सम्मान
कार्यक्रम के समापन अवसर पर महाविद्यालय परिवार की ओर से कविता शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया गया। उनके मार्गदर्शन एवं उपयोगी सुझावों के लिए चैतन्य महाविद्यालय, पामगढ़ के प्राचार्य डॉ. अमित चंद्रा द्वारा उन्हें स्मृति-चिह्न एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन से महाविद्यालय के प्राध्यापकों को आधुनिक अनुदेशात्मक डिजाइन, प्रभावी पाठ-योजना एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण रणनीतियों को समझने तथा उन्हें कक्षा शिक्षण में व्यावहारिक रूप से लागू करने का महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ।



