साइबर अपराधों पर आईजी राम गोपाल गर्ग ने कसी लगाम, सभी थानों में रोजाना साइबर पोर्टल लॉगिन अनिवार्य
फर्जी SIM बेचने वाले POS एजेंटों पर तत्काल FIR और गिरफ्तारी के निर्देश, 15 दिन से पुराने बैंक होल्ड मामलों में पीड़ितों को जल्द मिलेगी राशि

बिलासपुर। साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने के उद्देश्य से पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज राम गोपाल गर्ग ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को रेंज के साइबर थानों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय बिलासपुर रेंज के मीटिंग हॉल में आयोजित बैठक में रेंज के साइबर थानों के नोडल राजपत्रित अधिकारी (ASP/DSP), साइबर थाना प्रभारी एवं साइबर सेल प्रभारी मौजूद रहे।
बैठक में साइबर अपराधों, विभिन्न साइबर पोर्टलों से प्राप्त शिकायतों, दर्ज FIR, बैंक होल्ड मामलों, फर्जी SIM, mule accounts तथा साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जा रहे डिजिटल संसाधनों के संबंध में बिंदुवार समीक्षा की गई। आईजी श्री गर्ग ने अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के साथ ही साइबर अपराधियों के खिलाफ तकनीकी संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए।
सभी थानों में रोजाना साइबर पोर्टल लॉगिन अनिवार्य
आईजी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि केवल साइबर थानों तक ही साइबर अपराधों की कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। रेंज के सभी सामान्य थानों को भी प्रतिदिन नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर लॉगिन करना अनिवार्य होगा। पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों को उसी दिन स्वीकार कर तत्काल आवश्यक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
साइबर पोर्टल पर लंबित शिकायतों और दर्ज FIR की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को बिना किसी अनावश्यक विलंब के प्रकरणों का निराकरण करने के लिए कहा गया।
फर्जी SIM बेचने वाले POS एजेंटों पर होगी कड़ी कार्रवाई
बैठक में फर्जी या संदिग्ध SIM सक्रिय करने वाले POS एजेंटों को लेकर भी आईजी ने सख्त रुख अपनाया। ऐसे एजेंटों की पहचान कर उनके विरुद्ध तत्काल FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय से प्राप्त mule accounts की सूचियों के आधार पर तत्काल कार्रवाई करने और की गई कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट उच्च कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए। बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर सहित रेंज के विभिन्न जिलों से संबंधित मामलों में विशेष निगरानी रखने को कहा गया।
ठगी की राशि पीड़ितों को जल्द लौटाने पर जोर
साइबर ठगी के मामलों में बैंकों द्वारा होल्ड की गई रकम को पीड़ितों तक जल्द पहुंचाने के लिए भी आईजी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। 15 दिन से अधिक पुराने पेंडिंग बैंक होल्ड मामलों पर तत्काल कार्रवाई कर राशि पीड़ितों के खातों में वापस कराने की प्रक्रिया तेज करने को कहा गया।
इसके लिए धारा 106 के तहत आवश्यक न्यायालयीन प्रक्रिया और कोर्ट आदेश प्राप्त करने में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। बैंक समन्वय के दौरान पुलिस स्तर पर किसी भी प्रकार की रिक्वेस्ट अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखने की हिदायत दी गई।
साइबर अपराध में इस्तेमाल डिजिटल संसाधनों को कराया जाएगा ब्लॉक
साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, IP एड्रेस, WhatsApp और Telegram अकाउंट को प्राथमिकता के आधार पर ब्लॉक कराने के निर्देश भी दिए गए। इन कार्रवाइयों की प्रगति की नियमित समीक्षा करते हुए मासिक प्रगति रिपोर्ट उच्च कार्यालय को भेजने के लिए कहा गया।
‘समन्वय पोर्टल’ पर अपराधियों का पूरा डेटा अपलोड होगा
आईजी ने साइबर अपराधियों से संबंधित जानकारी को ‘समन्वय पोर्टल’ पर अपडेट करने पर भी विशेष जोर दिया। गिरफ्तार किए गए सभी साइबर अपराधियों का संपूर्ण विवरण, फिंगरप्रिंट और FIR स्टेटस पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए गए।
साथ ही पंजीकृत साइबर वालंटियर्स का सत्यापन शीघ्र पूरा करने और साइबर अपराधों के प्रति आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्थानीय युवाओं को अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए गए।
आईजी ने अधिकारियों को दिए पांच प्रमुख लक्ष्य
बैठक में आईजी राम गोपाल गर्ग ने अधिकारियों को साइबर अपराध नियंत्रण के लिए स्पष्ट एक्शन प्वाइंट दिए। इनमें रेंज के सभी थानों का साइबर पोर्टल पर शत-प्रतिशत नियमित लॉगिन, लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण, बैंक में होल्ड पीड़ितों की राशि की जल्द वापसी, साइबर वालंटियर्स का सत्यापन तथा फर्जी SIM बेचने वाले POS एजेंटों पर FIR व गिरफ्तारी शामिल हैं।
इसके अलावा साइबर अपराध में प्रयुक्त SIM, IP एड्रेस और WhatsApp खातों को ब्लॉक कराने तथा ‘समन्वय पोर्टल’ पर अपराधियों का डेटा समय पर अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए।
आधुनिक तकनीकी पुलिसिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता
आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि बैठक का मूल उद्देश्य तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण करना, पुलिस की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं त्वरित बनाना और आधुनिक तकनीकी पुलिसिंग को मजबूत करना है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशों का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा, ताकि साइबर अपराधों से जुड़े मामलों का जल्द निराकरण हो और आम जनता को सीधे राहत मिल सके।
बैठक में पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेशा चौबे, उप पुलिस अधीक्षक विवेक शर्मा, रेंज साइबर थाना प्रभारी एवं साइबर स्टाफ उपस्थित रहे।



