सोनम वांगचुक अनशन खत्म! 26 दिन बाद जूस से क्यों तुड़वाया गया अनशन? जानिए क्या है वजह

Sonam Wangchuk Hunger Strike: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अनशन खत्म होने की खबर के बाद एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि 26 दिन तक भूख हड़ताल करने के बाद उन्हें सबसे पहले जूस ही क्यों पिलाया गया। यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि मेडिकल साइंस पर आधारित प्रक्रिया है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक बिना भोजन रहने के बाद शरीर को धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लाना जरूरी होता है।
सोनम वांगचुक अनशन खत्म होने के साथ उनकी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल भी समाप्त हो गई। जानकारी के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने उनसे मुलाकात की। इसके बाद उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया गया। लंबे समय से अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था।
सीधे खाना क्यों नहीं दिया जाता?
सोनम वांगचुक अनशन खत्म होने के बाद डॉक्टरों ने ठोस भोजन देने की बजाय तरल पदार्थ से शुरुआत की। मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने पर शरीर अपनी ऊर्जा के लिए पहले जमा ग्लूकोज और बाद में फैट व मांसपेशियों का इस्तेमाल करने लगता है। ऐसे में पाचन तंत्र भी सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाता।अगर इस स्थिति में अचानक भारी या ठोस भोजन दे दिया जाए तो शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
रीफीडिंग सिंड्रोम का रहता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार सोनम वांगचुक अनशन खत्म होने के बाद सबसे बड़ा खतरा “रीफीडिंग सिंड्रोम” का होता है। यह ऐसी स्थिति है जिसमें लंबे समय तक भूखे रहने के बाद अचानक भोजन शुरू करने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है।इस वजह से ब्लड प्रेशर में बदलाव, दिल की धड़कन अनियमित होना, सांस लेने में परेशानी, शरीर में सूजन और गंभीर मामलों में हार्ट से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं। इसलिए डॉक्टर भोजन की शुरुआत धीरे-धीरे कराते हैं।
जूस और नारियल पानी से ही क्यों होती है शुरुआत?
सोनम वांगचुक अनशन खत्म होने के बाद जूस, नारियल पानी या ओआरएस जैसे तरल पदार्थ दिए जाते हैं। इनमें प्राकृतिक शुगर, पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स संतुलित मात्रा में होते हैं।इन पेयों से शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा मिलती है और ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता। नारियल पानी में पोटैशियम की अच्छी मात्रा होती है, जबकि फलों का जूस शरीर को आसानी से पचने वाला ग्लूकोज उपलब्ध कराता है।
डॉक्टरों की निगरानी क्यों जरूरी होती है?
सोनम वांगचुक अनशन खत्म होने के बाद डॉक्टर लगातार मरीज की हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और इलेक्ट्रोलाइट्स की जांच करते हैं। यदि किसी तरह की गड़बड़ी दिखाई देती है तो उसी के अनुसार डाइट और दवाओं में बदलाव किया जाता है।इसी वजह से लंबे अनशन के बाद किसी भी व्यक्ति को बिना डॉक्टर की सलाह के सामान्य भोजन शुरू नहीं करना चाहिए।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल या उपवास के बाद शरीर को सामान्य स्थिति में लाने के लिए धैर्य और सही मेडिकल देखभाल जरूरी होती है। पहले तरल आहार, फिर हल्का भोजन और उसके बाद सामान्य डाइट शुरू की जाती है। यही तरीका शरीर को सुरक्षित रखने और संभावित जटिलताओं से बचाने में सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है।



