Reg No. CG-06-0026209
WhatsApp Image 2026-06-28 at 09.42.10
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.56.31 (1)
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.55.51 (1)
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

Bawa Mohatra Village: आस्था की अनोखी मिसाल: इस गांव में मगरमच्छ को माना जाता था भगवान का दूत, तालाब में साथ नहाते हैं इंसान!

बेमेतरा। मगरमच्छ को आमतौर पर बेहद खतरनाक वन्यजीव माना जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले का बावा मोहतरा गांव इस धारणा से बिल्कुल अलग एक अनोखी कहानी के लिए जाना जाता है। यहां वर्षों तक एक मगरमच्छ, जिसे ग्रामीण प्यार से “गंगाराम” कहते थे, गांव के तालाब में रहा और कभी किसी इंसान या मवेशी को नुकसान नहीं पहुंचाया। ग्रामीण उसे भगवान का दूत मानते थे और उसके साथ सह-अस्तित्व की मिसाल पेश करते थे।

गांव की पहचान बना गंगाराम

बावा मोहतरा गांव के बीच स्थित तालाब गंगाराम का निवास था। इसी तालाब से महिलाएं रोज पानी भरती थीं, किसान अपने मवेशियों को पानी पिलाने लाते थे और बच्चे तालाब के आसपास खेलते थे। कई बार ग्रामीणों का तालाब में नहाते समय गंगाराम से आमना-सामना भी हुआ। ग्रामीणों के अनुसार, पानी के भीतर कई बार लोग उससे टकरा भी जाते थे, लेकिन गंगाराम हमेशा खुद रास्ता बदल लेता था और कभी किसी पर हमला नहीं करता था।

See also  गोपालपुर गौठान से बदल गई गंगा मैया समूह की महिलाओं की किस्मत... जैविक खाद, सोनाली मुर्गी पालन, मछली पालन, सब्जी उत्पादन से कमा रही मुनाफा... गांव के पशुपालकों को गोबर भेजकर मिल रहा आर्थिक लाभ...

देश-विदेश तक पहुंची कहानी

गंगाराम के शांत स्वभाव और इंसानों के साथ उसके अनोखे रिश्ते की चर्चा धीरे-धीरे देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच गई। इस अनूठी मिसाल को देखने के लिए पर्यटक और वन्यजीव विशेषज्ञ भी बावा मोहतरा पहुंचे। इससे बेमेतरा जिले को भी एक अलग पहचान मिली।

Advertisment

अंतिम विदाई में उमड़ा पूरा गांव

गंगाराम की मौत के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल था। ग्रामीणों ने उसे परिवार के सदस्य की तरह सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी। उस समय यह भावुक दृश्य भी देशभर में चर्चा का विषय बना था।

 नई पीढ़ी को सुनाई जा रही है गंगाराम की कहानी

See also  मोबाइल के माध्यम से दूसरे व्यक्ति के नाम से 04 लाख रुपए का बैंक ऑफ बड़ौदा से लोन निकाल कर अपने खाते में पैसा को ट्रांसफर कर आहरण कर धोखाधड़ी करने वाला आरोपी  गिरफ्तार, जांजगीर पुलिस की कार्यवाही...

अब गंगाराम की कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बच्चों को कहानी के माध्यम से प्रकृति, वन्यजीव संरक्षण और इंसान-वन्यजीव सह-अस्तित्व का महत्व समझाया जा रहा है, ताकि उनके भीतर पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता विकसित हो सके।

हालांकि, वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी भी जंगली जानवर से सुरक्षित दूरी बनाए रखना और उसके प्राकृतिक आवास का सम्मान करना बेहद जरूरी है। किसी एक असाधारण उदाहरण को सामान्य व्यवहार का आधार नहीं माना जाना चाहिए।

सह-अस्तित्व का प्रेरक संदेश

गंगाराम की कहानी इस बात का दुर्लभ उदाहरण है कि प्रकृति के प्रति सम्मान और जिम्मेदार व्यवहार से इंसानों और वन्यजीवों के बीच संतुलित सह-अस्तित्व संभव हो सकता है। आज भले ही गंगाराम इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी यादें और उससे जुड़ी कहानी बावा मोहतरा गांव की पहचान बन चुकी हैं और आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीने की प्रेरणा देती रहेंगी।

See also  बंगाल चुनाव खत्म होते ही I-PAC निदेशक को मिली जमानत! ED के रुख पर उठे सवाल, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!