Reg No. CG-06-0026209
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.56.31 (1)
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.55.51 (1)
b5ce874a-8a3f-482a-9d4a-eaf6ab18dc7e
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

15 साल की उम्र में चुना सेवा का रास्ता, आज राष्ट्रपति ने किया सम्मानित, जानें कौन हैं पद्मश्री बुधरी ताती

Padma Shri Budhri Tati: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा की रहने वाली पद्मश्री बुधरी ताती इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में आयोजित समारोह में पद्मश्री बुधरी ताती को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया। समाज सेवा के क्षेत्र में दशकों से किए गए उनके योगदान को देखते हुए यह सम्मान दिया गया है।

पद्मश्री बुधरी ताती दंतेवाड़ा जिले के हीरानगर क्षेत्र की रहने वाली हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। खास बात यह है कि पद्मश्री बुधरी ताती ने बहुत कम उम्र में ही यह तय कर लिया था कि वे अपना जीवन लोगों की सेवा में बिताएंगी।आज जिस सम्मान तक पद्मश्री बुधरी ताती पहुंची हैं, उसके पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और समर्पण की कहानी छिपी हुई है।

See also  महामहिम उपराष्ट्रपति पर मिमिक्री और राहुल गांधी की शर्मनाक करतूत से संसद की मर्यादा हुई आहत - कृष्ण बिहारी जायसवाल, विरोध में कोरिया भाजपा ने राहुल गांधी और टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी का किया पुतला दहन...

15 साल की उम्र में मिली समाज सेवा की प्रेरणा
पद्मश्री बुधरी ताती को समाज सेवा की प्रेरणा किशोरावस्था में ही मिल गई थी। बताया जाता है कि वर्ष 1984-85 के दौरान गुरमगुंडा आश्रम के लखमू बाबा से प्रभावित होकर उन्होंने सेवा का रास्ता चुना। उस समय पद्मश्री बुधरी ताती की उम्र केवल 15 वर्ष थी।इसके बाद उन्होंने नागपुर में प्रशिक्षण प्राप्त किया और फिर बस्तर के दूरस्थ इलाकों में लोगों के बीच काम शुरू कर दिया।

आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
पद्मश्री बुधरी ताती ने सबसे अधिक काम महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किया। उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का अभियान चलाया।पद्मश्री बुधरी ताती ने सिलाई, कढ़ाई और अन्य छोटे रोजगार के माध्यम से हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। उनके प्रयासों से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया।

See also  जांजगीर पुलिस द्वारा “विश्वास”जन जागरूता अभियान चलाकर विद्यार्थियों को दी गई जानकारी...

शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर दिया जोर
सिर्फ रोजगार ही नहीं, पद्मश्री बुधरी ताती ने शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर भी लगातार काम किया। उन्होंने दूर-दराज के गांवों में जाकर लोगों को जागरूक किया।पद्मश्री बुधरी ताती ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को लेकर भी कई अभियान चलाए। इसके अलावा उन्होंने नशे के खिलाफ भी लोगों को जागरूक करने का काम किया।

Advertisment

शादी नहीं की, समाज को ही बनाया परिवार
पद्मश्री बुधरी ताती की सबसे बड़ी पहचान उनका त्याग है। उन्होंने विवाह नहीं किया और अपना पूरा जीवन समाज के नाम कर दिया।ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पद्मश्री बुधरी ताती को प्यार से ‘बुआ’ और ‘ताती’ कहकर बुलाते हैं। यही अपनापन उनके काम की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।

See also  चैंपियंस ट्रॉफी : पाकिस्तान के पूर्व कप्तान ने अय्यर की आलोचना की…, कहा -श्रेयस को आउट करना सबसे आसान...

पहले भी मिल चुके हैं कई बड़े सम्मान
पद्मश्री मिलने से पहले भी पद्मश्री बुधरी ताती को कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें अब तक 22 पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है, जिनमें कई राष्ट्रीय स्तर के सम्मान शामिल हैं।अब पद्मश्री के रूप में मिला यह सम्मान पद्मश्री बुधरी ताती की वर्षों की सेवा और समर्पण की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान माना जा रहा है।

बस्तर की बेटी बनी पूरे देश की प्रेरणा
आज पद्मश्री बुधरी ताती सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी कहानी बताती है कि यदि सेवा का भाव सच्चा हो तो सीमित संसाधनों में भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।पद्मश्री बुधरी ताती का यह सम्मान बस्तर, दंतेवाड़ा और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!