India Oil Reserve : क्या देश में ईंधन संकट का खतरा? पेट्रोलियम मंत्री ने बताया भारत के पास कितने दिन का तेल और LPG स्टॉक मौजूद है

नई दिल्ली : नई दिल्ली में आयोजित CII एनुअल बिजनेस समिट में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पास फिलहाल 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की प्राकृतिक गैस (LNG) और 45 दिनों का LPG स्टॉक उपलब्ध है। ऐसे में देश में ईंधन की सप्लाई को लेकर किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है। मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और आम जनता तक ईंधन की आपूर्ति प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।
पुरी ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचत की अपील को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की बातों का गलत मतलब निकालने की जरूरत नहीं है। पीएम ने लोगों से केवल संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करने की अपील की है। दरअसल, प्रधानमंत्री लगातार दो दिनों से लोगों को पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने, मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा उपयोग करने तथा अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने की सलाह दे रहे हैं।
पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में आई बाधाओं के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती थी और भारत के कच्चे तेल आयात का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग पर निर्भर था। इतना ही नहीं, घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाली करीब 60 प्रतिशत LPG सप्लाई भी इसी रूट से आती थी। ऐसे में संकट बढ़ने के बाद सरकार ने तेजी से वैकल्पिक इंतजाम किए।
पुरी ने कहा कि संकट से पहले भारत में रोजाना करीब 35 से 36 हजार मीट्रिक टन LPG का घरेलू उत्पादन होता था, जिसे बढ़ाकर 54 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंचा दिया गया है। उन्होंने इसे सरकार और ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि बताया। मंत्री के मुताबिक, इस कदम से देश में रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिली है।
उन्होंने तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर भी चिंता जताई। पुरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। पहले जहां तेल की कीमत करीब 64 से 65 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं अब यह बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है। इसका सीधा असर सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ा है। मंत्री के अनुसार तेल कंपनियों को रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है और कुल घाटा लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत रोजाना करीब 50 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत करता है। पश्चिम एशिया संकट से पहले देश को प्रतिदिन लगभग 3,141 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 4,760 करोड़ रुपए प्रतिदिन हो गया है। यानी हर दिन करीब 1,600 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
भारत के रणनीतिक भंडार की बात करें तो विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में भूमिगत तेल भंडारण सुविधाएं मौजूद हैं, जहां कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल संग्रहित किया जा सकता है। फिलहाल इनमें लगभग 64 प्रतिशत स्टॉक भरा हुआ है। सरकारी कंपनियों के भंडार को मिलाकर देश के पास करीब 60 दिनों का तेल और गैस बैकअप मौजूद है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मानकों के अनुसार देशों को कम से कम 90 दिनों का आयात भंडार रखना चाहिए। भारत अभी इस लक्ष्य से थोड़ा पीछे है, लेकिन विशेषज्ञ 60 से 74 दिनों के बैकअप को सुरक्षित स्तर मानते हैं।
इस बीच, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका भी जताई जा रही है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे को कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 4 से 5 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं घरेलू LPG सिलेंडर भी करीब 50 रुपए तक महंगा हो सकता है।
सरकार फिलहाल जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और सप्लाई सामान्य बनी हुई है। हालांकि वैश्विक हालात और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए ऊर्जा बचत और वैकल्पिक संसाधनों के उपयोग पर लगातार जोर दिया जा रहा है।



