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फैटी लिवर का असर शरीर के किन अंगों पर पड़ सकता है?

फैटी लिवर की समस्या आजकल तेजी से बढ़ रही है और कई लोग इसके शुरुआती लक्षणों को पहचान नहीं पाते. यह स्थिति तब होती है जब लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है. शुरुआत में यह समस्या सामान्य लग सकती है, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसका असर सिर्फ लिवर तक सीमित नहीं रहता. धीरे-धीरे फैटी लिवर शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है.

लिवर शरीर से टॉक्सिक पदार्थ बाहर निकालने, पाचन में मदद करने और एनर्जी संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है. जब इसकी क्षमता प्रभावित होती है, तो शरीर के अन्य हिस्सों पर भी असर पड़ने लगता है. कई बार लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि फैटी लिवर का असर शरीर के किन अंगों पर पड़ सकता है और समय रहते सही देखभाल क्यों जरूरी है.

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फैटी लिवर का असर किन अंगों पर पड़ सकता है?
लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर एचओडी डॉ. एल.एच. घोटेकर बताते हैं कि फैटी लिवर का असर केवल लिवर तक सीमित नहीं रहता. समय के साथ यह हार्ट, किडनी, पैंक्रियाज और शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकता है. फैटी लिवर वाले लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है. जब लिवर ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर में सूजन बढ़ने लगती है, जिसका असर हार्ट और ब्लड वेसल्स पर पड़ सकता है.

कुछ मामलों में किडनी की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है. पैंक्रियाज पर असर पड़ने से ब्लड शुगर कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है. अगर स्थिति गंभीर हो जाए, तो लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर फेल होने का खतरा भी बढ़ सकता है. इसलिए फैटी लिवर को केवल एक सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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फैटी लिवर से बचाव के लिए क्या करें?
फैटी लिवर से बचाव के लिए संतुलित डाइट और नियमित व्यायाम बेहद जरूरी है. तला-भुना, ज्यादा मीठा, सफेद मैदा और प्रोसेस्ड फूड कम करें. फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर आहार को प्राथमिकता दें. वजन कंट्रोल रखना और रोजाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक एक्टिविटी करना लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है.

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इसके अलावा, पर्याप्त पानी पिएं और देर रात तक जागने से बचें. अगर ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल या वजन बढ़ा हुआ है, तो उसे कंट्रोल रखना भी जरूरी है. डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड करवाना फायदेमंद हो सकता है.

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ये भी जरूरी
फैटी लिवर की शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए नियमित जांच करवाना बहुत जरूरी है. अगर रिपोर्ट में फैटी लिवर आए, तो इसे हल्के में न लें और समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव करें.

धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव कम रखना भी लिवर की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. अगर लगातार थकान, पेट में भारीपन या भूख कम लगने जैसी समस्याएं बनी रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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