Reg No. CG-06-0026209
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-03).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-02).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-01).jpg
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

india-heritage-case: किंग चार्ल्स को भारत का अल्टीमेटम! शिवाजी महाराज की तलवार लौटाओ, वरना 5 ट्रिलियन डॉलर का केस

रायपुर : छत्तीसगढ़ की एक सामाजिक संस्था ने ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स-III को ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी को लेकर बड़ा कानूनी अल्टीमेटम दिया है। छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी (CCS) ने मांग की है कि छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रसिद्ध ‘जगदंबा’ तलवार, ‘वाघ नख’ समेत भारत की 211 ऐतिहासिक धरोहरों को 6 जून 2026 तक भारत वापस किया जाए। ऐसा नहीं होने पर संस्था ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में 5 ट्रिलियन डॉलर का मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी है।

“ये सिर्फ वस्तुएं नहीं, भारत की अस्मिता हैं”

CCS के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने कहा कि यह सिर्फ पुरानी चीजों की वापसी का मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और सम्मान से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक दौर में भारत से कई ऐतिहासिक धरोहरें ले जाई गईं और अब उन्हें वापस लौटाने का समय आ गया है।

See also  बूंद बूंद से चलता जीवन...

क्यों चुनी गई 6 जून 2026 की तारीख?

संस्था ने 6 जून 2026 की डेडलाइन इसलिए तय की है क्योंकि इसी दिन छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था। CCS का कहना है कि यह तारीख भारतीय गौरव और इतिहास का प्रतीक है।

Advertisment

 5 ट्रिलियन डॉलर के दावे का आधार

संस्था का दावा है कि ब्रिटिश संग्रहालयों ने पिछले करीब 150 वर्षों से भारतीय धरोहरों का प्रदर्शन कर भारी आर्थिक लाभ कमाया है। CCS ने कमाई, ब्याज और मुद्रास्फीति को जोड़कर 5 ट्रिलियन डॉलर के मुआवजे का आंकड़ा तैयार किया है।

संस्था ने इसे “सांस्कृतिक शोषण” और “अवैध लाभ” करार दिया है।

See also  जांजगीर चाम्पा क्षेत्र में नेता प्रतिपक्ष चंदेल के अनुशंसा से प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में शामिल किया गया अनेक गांव...

संस्था की रिक्लेमेशन लिस्ट में कई ऐतिहासिक धरोहरें शामिल हैं, जिनमें—

छत्रपति शिवाजी महाराज की ‘जगदंबा’ तलवार
2000 साल पुराने अमरावती मार्बल्स
चोल कालीन नटराज प्रतिमाएं
ब्राह्मी लिपि वाले अशोक शिलालेख
मुगल और राजपूतकालीन दुर्लभ चित्रकला
“औपनिवेशिक लूट का हिसाब मांगेगा भारत

‘वाघ नख’ (टाइगर क्लॉ)
CCS ने अपने पत्र में कहा कि ब्रिटेन का खुद को “विश्व इतिहास का संरक्षक” बताना केवल बहाना है। संस्था के मुताबिक भारत अब अपनी सांस्कृतिक विरासत वापस लेने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लड़ाई लड़ने को तैयार है।

पत्र में लिखा गया है,
“अन्याय की नींव पर खड़े साम्राज्य ज्यादा समय तक नहीं टिकते। आत्मनिर्भर भारत अब अपनी धरोहर वापस लेना जानता है।”

See also  अधर में लटका राम वन गमन पथ परिपथ प्रोजेक्ट, शिवरीनारायण नगर में हो रहे कार्य बीते कई महीनों से ठप...

अंतरराष्ट्रीय असर भी संभव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मामला ICJ तक पहुंचता है, तो इसका असर दुनिया के कई पूर्व उपनिवेश देशों पर पड़ सकता है। अफ्रीका और एशिया के कई देश भी यूरोपीय देशों से अपनी सांस्कृतिक धरोहरों और मुआवजे की मांग तेज कर सकते हैं।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!