आंकड़ों की जुबानी : कौन कितना प्रभावी?
विधानसभा के पटल पर जनता की समस्याओं को ‘सवाल’ की शक्ल देने की रेस में शेषराज हरबंश निर्विवाद रूप से नंबर वन पर काबिज हैं। आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से यह साफ होता है कि महिला नेतृत्व सदन में अधिक मुखर है।
शेषराज हरबंश (पामगढ़): कुल प्रश्न – 189 | सदन में उपस्थिति – 54
राघवेंद्र कुमार सिंह (अकलतरा): कुल प्रश्न – 176 | सदन में उपस्थिति – 53
व्यास कश्यप (जांजगीर-चांपा): कुल प्रश्न – 160 | सदन में उपस्थिति – 54
सदन में दहाड़, सड़क पर सक्रियता
ये तीनों विधायक केवल विधानसभा की ‘वीआईपी कुर्सी’ तक सीमित नहीं हैं। जहां जांजगीर-चांपा में व्यास कश्यप की जमीनी पकड़ और अकलतरा में राघवेंद्र सिंह का युवा जोश विपक्ष की ताकत बना हुआ है, वहीं पामगढ़ में शेषराज हरबंश का ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ सबसे शानदार है। उन्होंने क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ महिला सुरक्षा, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे प्रादेशिक मुद्दों पर सरकार को मजबूती से घेरा है। तीनों ही विधायकों का रिकॉर्ड बताता है कि पहली बार चुनकर आने के बावजूद वे सदन की कार्यवाही को बारीकी से समझते हैं।
विपक्षी दल कांग्रेस के इन तीनों ‘फर्स्ट टाइम’ विधायकों का परफॉरमेंस यह बताने के लिए काफी है कि जांजगीर-चांपा जिले की कमान ऊर्जावान हाथों में है। विशेषकर महिला विधायक की यह मुखरता प्रदेश की अन्य महिला जनप्रतिनिधियों के लिए एक नई नजीर पेश करती है।
“पामगढ़ की जनता ने मुझ पर जो भरोसा जताया है, उसे बनाए रखना मेरी पहली प्राथमिकता है। सदन में मेरे द्वारा पूछे गए 189 सवाल केवल आंकड़े नहीं, बल्कि मेरे क्षेत्र की जनता की वे उम्मीदें हैं जिन्हें शासन तक पहुँचाना मेरा कर्तव्य है। उपस्थिति हो या प्रश्नों की संख्या, मेरा लक्ष्य सिर्फ एक है – मेरे क्षेत्र के विकास का पहिया कभी न रुके। यह तो बस शुरुआत है, जनता के हक की लड़ाई अभी और मजबूती से लड़ी जाएगी।”
शेषराज हरबंश
विधायक,पामगढ़