Reg No. CG-06-0026209
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.56.31 (1)
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.55.51 (1)
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

17वीं सदी का छोटा सा गांव आज नगर बनने की राह पर, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में माँडल कुटरा, ग्रामीण भारत के लिए मिसाल, हाईस्कूल की नींव बनी प्रगति का आधार,

जांजगीर-चांपा। कभी हिंसा,अतिक्रमण और सामाजिक तनाव से जूझने वाला कुटरा गांव आज शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मॉडल ग्राम बनकर उभर रहा है। 17वीं शताब्दी में स्थापित यह छोटा सा गांव अब नगर बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। जहाँ कभी बच्चों की पढ़ाई आठवीं कक्षा के बाद रुक जाती थी, आज वहीं हायर सेकेंडरी स्कूल है, कन्या छात्रावास, अस्पताल और मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े शासकीय संस्थानों का निर्माण हो रहा है। यह बदलाव केवल सरकारी योजनाओं का परिणाम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और स्थानीय नेतृत्व की मिसाल है।

समानता की सोच से बसा था कुटरा

ग्राम कुटरा की स्थापना आज से लगभग 350वर्ष पुर्व 17वीं शताब्दी के आखरी दशक में प्रथम मालगुजार स्व. अजीतराम पाण्डेय ने अपने सहयोगियों जिनमें सतनामी, सूर्यवंशी, कश्यप, यादव, लोहार, नाई, रोहिदास, निर्मलकर, सोनी, महंत सहित विभिन्न समाजों के लगभग 300 लोगों के साथ सामाजिक समरसता की परिकल्पना लेकर इस गांव की नींव रखी गई थी । आज यह बढ़कर 700 घरों और 3500 से अधिक आबादी वाला सशक्त समुदाय बन चुका है।

तालाब और मयूर हवेली: ऐतिहासिक पहचान

See also  विशेष केन्द्रीय सहायता योजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की बैठक सम्पन्न

स्व.अजीतराम जी ने शुरुआती दौर में आठ एकड़ क्षेत्र में तालाब निर्माण कराया जिसे बाद में उनके पुत्र रामदयाल ने विस्तार कराया अब यह 18 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला है। बाद की पीढ़ी में स्व. मालिक राम जी द्वारा बनवाये गये तीन मंजिला ‘मयूर हवेली’ उस समय गांव का आकर्षण केंद्र थी। इसकी छत पर लगा टीन का विशाल मयूर दूर से दिखाई देता था और इसे समय संकेतक के रूप में भी जाना जाता था। मयुर हवेली और उनकी पैतृक तालाब आज भी कुटरा की ऐतिहासिक पहचान और धरोहर है।

Advertisment

हाईस्कूल बना बदलाव का आधार

वर्ष 2008 में शासन ने हाईस्कूल की स्वीकृति तो दी, लेकिन सामाजिक तनाव और भूमि विवादों के कारण भवन निर्माण अगले छह वर्षों तक अटका रहा। प्रशासन स्कूल को दूसरे गांव स्थानांतरित करने पर विचार करने लगा। ऐसे समय में ग्राम के संस्थापक परिवार की छठी पीढ़ी के सदस्य राघवेन्द्र रामसरकार पाण्डेय आगे आए। ग्रामीणों के अनुरोध पर उन्होंने अपनी पैतृक निजी तालाब से लगी भूमि पर हाईस्कूल की नींव रखी। इसके साथ ही उन्होंने अपने पिता की स्मृति में समीप के ग्राम कुथुर में आंगनबाड़ी और सामुदायिक भवन हेतु भी पैतृक भूमि शासन को दान में दे दिया। जो कुटरा के भविष्य को दिशा देने वाला ऐतिहासिक निर्णय साबित हुआ। आज एक एक ईंच जमीन के लिए विवाद की स्थिति निर्मित हो जाती है एैसे दौर में पैतृक भुमि को दान करना साहसिक और अनुकरणीय माना जा रहा है, उनके पहल का असर यह हुआ कि ग्रामीणों ने स्वेच्छा से सैकड़ों एकड़ शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटा लिया, जिससे विकास कार्यों का रास्ता साफ हुआ। आज उसी भूमि पर कन्या छात्रावास, अस्पताल,नर्सिंग और मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो रहा है।

See also  ग्राम बोड़सरा के शराब दुकान में चोरी करने वाले आरोपी को किया गिरफ्तार, चौकी नैला पुलिस की कार्यवाही

परिवार की विरासत

स्व. हनुमान प्रसाद जी कुटरा के अंतिम मालगुजार थे। उन्होंने गांव में प्राथमिक शाला और पुर्व माध्यमिक शाला की नींव रखी थी। राघवेन्द्र पाण्डेय ने हाईस्कूल की नींव रखी तथा हाल ही में मेडिकल काॅलेज का भुमिपुजन किया है, उनके पिता स्व. रामसरकार पाण्डेय को सामाजिक उत्थान और कृषि योगदान के लिए मध्यप्रदेश शासन ने ‘कृषि रत्न’ सम्मान दिया था। छत्तीसगढ़ शासन ने स्कूल का नाम रामसरकार शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल रखकर उनकी स्मृति को सहेज कर रखा है।

आज का कुटरा ग्रामीण भारत के लिए प्रेरणा 

लोगों का मानना है कि यदि समय पर हाईस्कूल की नींव नहीं रखी जाती, तो आज कुटरा में इतने बड़े संस्थानों की कल्पना भी संभव नहीं थी। जो गांव कभी विवादों से घिरा था, वही अब शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिक सुविधाओं के साथ नगर के रूप में आकार ले रहा है। कुटरा का यह बदलाव न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पुरे ग्रामीण भारत के लिए प्रेरणा है।

See also  भारत को कबड्डी विश्वकप और एशियन चैंपियन बनाने वाली संजू देवी को 50 लाख की प्रोत्साहन राशि, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सौंपा चेक, राज्य में पहली बार किसी खिलाड़ी को दी गई है इतनी बड़ी प्रोत्साहन राशि

ग्राम कुटरा के संस्थापक परिवार के छठं पीढ़ी के राघवेन्द्र रामसरकार पाण्डेय ने युवाओं की एक टीम बनाकर गांव के नव-निर्माण को गति दी। इस टीम में राजू कश्यप, देवी निर्मलकर, सुखसागर कश्यप, लेखराम कश्यप, सुखसागर सोनी, ताराचंद कश्यप,उमेन्द्र कश्यप, राजकुमार कश्यप, रामकुमार खरे, छतराम कश्यप, रामधन कश्यप, पवन दिनकर, हरदेव कश्यप, वेद डिग्रसकर, विदुर कश्यप, कुमार बंधु लाठिया,मनोज आरले, मोहित डिग्रस्कर, रामनाथ खरे, अमृत कश्यप, कुंजराम बंसल तथा शिक्षक अनुराग तिवारी, देवेन्द्र साहु सहित अनेक लोगों का सहयोग रहा। गांव के लोग स्नेहपूर्वक राघवेन्द्र रामसरकार को”कुटरा का सरकार” कहकर संबोधित करते हैं।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!