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करतला तहसील में किसानों की बड़ी परेशानी : 35 दिनों से चक्कर लगा रहे किसान, पटवारी ने बिना मौके पर गए धान की फसल को बता दिया मूंगफली

कोरबा,09 दिसंबर। किसानों को हितैषी बताने वाली राज्य सरकार किसान समस्याओं के समाधान को लेकर कितनी गंभीर है, इसका अंदाज़ा करतला तहसील के किसानों की स्थिति देखकर लगाया जा सकता है। धान बेचने के लिए किसानों को लगातार तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन तहसीलदार से लेकर पटवारी और राजस्व विभाग के अधिकारी तक किसी भी स्तर पर समस्या के समाधान के लिए तैयार नहीं दिख रहे। गिरदावरी में हुई भारी त्रुटि ने किसानों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है।

नवापारा (चैनपुर) के किसान रामप्रसाद पटेल 35 दिनों से चक्कर काटने को मजबूर

करतला तहसील के ग्राम पंचायत नवापारा (चैनपुर) निवासी किसान रामप्रसाद पटेल ने बताया कि वे हर वर्ष कुल 5.80 एकड़ भूमि में धान की खेती करते हैं। लेकिन इस वर्ष की गिरदावरी रिपोर्ट में पटवारी ने बड़ी लापरवाही बरतते हुए सिर्फ 1 एकड़ में ही धान की फसल दर्ज कर दी, जबकि शेष 4.80 एकड़ भूमि में खड़ी धान की फसल को मूंगफली बता दिया।

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रामप्रसाद पटेल ने यह त्रुटि सुधारने के लिए जिला कलेक्टर, तहसीलदार, पटवारी और मंडी समिति के अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचाई, लेकिन 35 दिन बीत जाने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
किसान का कहना है कि दोबारा गिरदावरी रिपोर्ट जमा कर दी गई, फिर भी फसल विवरण सुधार नहीं होने के कारण वे समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित हो रहे हैं। इससे किसान और उनका परिवार बेहद परेशान है।

घिनारा के छत्रपाल सिंह राठिया भी रोजाना लगा रहे तहसील के चक्कर

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ग्राम घिनारा निवासी किसान छत्रपाल सिंह राठिया के साथ भी इसी प्रकार की समस्या सामने आई है। उनकी कुल 15.50 एकड़ भूमि में धान की फसल लगी हुई है, लेकिन गिरदावरी रिपोर्ट में 7 एकड़ भूमि में अन्य फसल दर्ज कर दी गई।
किसान की शिकायत पर मौका जांच करवाए जाने पर यह स्पष्ट हुआ कि उक्त भूमि में धान की ही फसल थी, लेकिन इसके बाद भी उनके फसल विवरण में सुधार नहीं किया गया।छत्रपाल सिंह राठिया ने बताया कि वे एक माह से लगातार करतला तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं। फसल विवरण संशोधन न होने से उन्हें धान बिक्री में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

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किसानों की सुनवाई नहीं, जिम्मेदार अधिकारियों की बेरुखी उजागर

गिरदावरी में हुई इस बड़ी त्रुटि के कारण किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित होते जा रहे हैं। दोनों किसानों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण उनका पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक परेशानी झेल रहा है। इसके बावजूद अभी तक जिम्मेदार विभाग किसी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रहा है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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