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बिलासपुर कलेक्टर को फटकार, अवैध उत्खनन पर ठोस कार्रवाई न होने पर जताई नाराजगी,अगली सुनवाई 22 अप्रैल को निर्धारित…

अरपा नदी के सूखने पर हाईकोर्ट की गहरी चिंता, खनिज विभाग के सचिव से मांगा हलफनामा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश की जीवनदायिनी अरपा नदी के सूखने और इसके संरक्षण में लापरवाही को लेकर गहरी चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने अवैध उत्खनन, परिवहन और खनिजों के भंडारण पर रोक लगाने के निर्देशों के बावजूद स्थिति में सुधार न होने पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। इस संबंध में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य के खनिज विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि वे इस मामले में अब तक उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करें।

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अवैध उत्खनन को रोकने के लिए उठाए गए कदमों को नाकाफी मानते हुए नाराजगी जाहिर की। साथ ही, बिलासपुर कलेक्टर द्वारा नदी संरक्षण के प्रयासों को सिर्फ औपचारिकता बताते हुए कड़ी फटकार भी लगाई।

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हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि “डीएम सफाई कर रहे हैं, फोटो खिंचवा रहे हैं..! क्या डीएम का यही काम है? यदि सफाई करनी है तो कलेक्ट्रेट का काम छोड़कर सफाई का ही कार्य करें..! यह कौन-सी व्यवस्था है? क्या यह डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का काम है?” कोर्ट ने आगे कहा कि कलेक्टर जिले के जिम्मेदार अधिकारी हैं और उन्हें अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सकारात्मक कदम उठाने चाहिए। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “अरपा नदी क्या दो फावड़ा चलाने से साफ हो जाएगी?”

सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन. भारत ने बताया कि कोर्ट के 12 फरवरी 2025 को दिए गए आदेश के पालन में राज्य गृह सचिव द्वारा शपथ पत्र पेश कर दिया गया है। साथ ही उन्होंने बताया कि अवैध उत्खनन पर रोक लगाने के लिए अन्य राज्यों के नियमों का अध्ययन करने हेतु एक छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसमें खनिज विभाग के उप संचालक और जिला खनिज अधिकारी शामिल हैं। समिति को 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, जिसके बाद माइन एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट के नियमों में संशोधन हेतु विधि विभाग को प्रस्ताव सौंपा जाएगा।

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हाईकोर्ट ने इस मामले में बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को भी निर्देश दिया कि वे अरपा नदी की सफाई और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की स्थापना के संबंध में विस्तृत शपथ पत्र प्रस्तुत करें। निगम के अधिवक्ता आर.एस. मरहास ने अदालत को सूचित किया कि पुणे की स्ट्रीम इंफ्रा डेवलपमेंट कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड से प्राप्त डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) का सत्यापन कर लिया गया है। इस रिपोर्ट को मुख्य अभियंता, पीएचई विभाग द्वारा मंजूरी दे दी गई है, जिसके बाद प्रशासनिक स्वीकृति मिलने पर टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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हाईकोर्ट ने इस पर भी गंभीर आपत्ति जताई कि माइन एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के तहत अवैध उत्खनन में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चलाने का कोई प्रावधान नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की कि केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं है क्योंकि यह अवैध गतिविधियों को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह इस संबंध में एक सख्त कानून बनाए ताकि अवैध उत्खनन करने वालों पर आपराधिक कार्रवाई हो सके।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि राज्य सरकार जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती है, तो न्यायालय स्वयं इस मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा।

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हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 22 अप्रैल 2025 की तिथि निर्धारित की है, जिसमें खनिज विभाग के सचिव और नगर निगम आयुक्त द्वारा विस्तृत हलफनामा पेश किए जाने का निर्देश दिया गया है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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