Reg No. CG-06-0026209
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.56.31 (1)
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.55.51 (1)
b5ce874a-8a3f-482a-9d4a-eaf6ab18dc7e
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

महिला दिवस पर विशेष – महिलाएं करें आत्मसम्मान के लिए संघर्ष

महिला पुरूष एक दूसरे के पूरक सहयोगी ,माने जाते हैं।आज दुनिया का कोई क्षेत्र अछूता नहीं रहा, जहां महिलाएं आसीन न हों। गर्व महसूस होती है।यह कहना लाजमी होगा कि दोनों को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार व्यवहारिक व कानूनी तौर पर मिलनी चाहिए। महिला और पुरुष दोनों के सहयोग से ही, परिवार,समाज,राष्ट्र में मानवता का पक्ष मजबूत व शक्तिशाली होगा।

महिला सभ्यता, संस्कृति, संस्कारों तथा संपूर्ण मानवता की जननी,पोषक व संरक्षिका है।नारी की शक्ति और सामर्थ्य के कारण ही उसे विश्व के सभी धार्मिक ग्रंथों में पूज्यनीय माना गया है। महिला अपनी योग्यता और क्षमताओं का प्रमाण प्राचीनकाल से ही देती आई है।पुरूष वादी सत्ता की क्रूर , अमानवीय एवं बर्बर सोच का ही परिणाम है, जिसके कारण महिलाओं के शोषण,व उत्पीड़न की घटनाओं में दिनों -दिन व‌द्धि हो रही है।

महिला – पुरूषों के बीच भेदभाव व असमानता बढ़ती जा रही है।बेटी,मां,बहन जैसे संबंधों को दरकिनार कर, अस्मिता तार- तार हो रही है।ये घटनाएं दिल दहला देने वाली होती हैं।

See also  गगन गुरुद्वान और महेंद्र कश्यप बने जिला उपाध्यक्ष, युवा कांग्रेस में संगठन विस्तार

भयादोहन की स्थिति निर्मित कर, मानसपटल पर अनेकों सवाल खड़ी कर देती हैं। जुबां कैद हो जाती है।मन कातर भाव से निरूत्तर हो जाता है। परिवार की आधारशिला जहां महिला पर टिकी होती है। वहीं दूसरी ओर समाज में महिलाओं के साथ दोयम दर्जे की होती जा रही है। सूचना प्रौद्योगिकी, संचार क्रांति के युग में महिला चाहे घर में,या कारपोरेट जगत में कर्तव्य निर्वहन करती हो, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होती है।तो कहीं शोषण की शिकार भी हो रही है।

समकालीन समय की आवश्यकता के कारण वर्तमान युग विश्व स्तर पर महिला विमर्श का युग बन गया है‌।आधुनिक युग में महिला विमर्श विषय में जहां एक ओर महिला स्वतंत्र्य को उभारा है, वहीं दूसरी ओर महिला जीवन में संबंधित असंख्य जटिलताओं, विषमताओं को भी शामिल किया गया है। पुरूष वादी व्यवस्था की तुच्छ और संकुचित मानसिकता के कारण महिलाओं के प्रति अविश्वास व भेदभाव पूर्ण व्यवहार से महिला जीवन में शोषण और अत्याचारों को बढ़ावा मिला है।इसी कारण स्त्री विमर्श विषय विश्व साहित्य का केन्द्र बिन्दु बन गया है।विश्व की आधी जनसंख्या महिला वादी साहित्य का अध्ययन प्रत्येक दृष्टि से समाज और पूरी

Advertisment

मानवता के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक बन गया है। महिला जीवन से संबंधित शोषण, अनाचार,व विसंगतियों से उत्पन्न महिला की दयनीय, सोचनीय दर्दनाक स्थिति को पुस्तकों में बंद न करके उसे व्यवहारिक जीवन में सार्वजनिक रूप से उजागर करनी चाहिए।तभी हम वर्तमान और भविष्य में महिलाओं को अमानवीय, विभत्स यंत्रणाओं से बचाव कर सकें।
महिलाओं को अपनी कोमलता के साथ मिली अद्भुत दैवी शक्तियों को जाग्रत करना होगा और संपूर्ण मानव जाति को बताने हेतु आगे आना होगा।
इसलिए तो कहा जाता है-
कोमल है कमजोर नहीं,
शक्ति का नाम ही नारी है।
सबको जीवन देने वाली,
मौत भी जिससे हारी है।
खास बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहूंगी
महिलाओं के प्रति पुरुष अपनी मानसिकता में बदलाव लायें‌। अपने साथ हो रहे शोषण व उत्पीड़न के लिए आगे आकर ईंट का जवाब पत्थर से दे।एक दूसरे के सहयोगी बनकर महिलाएं शोषण के विरूद्ध बिगुल फूंककर प्रतिकार करें। कमजोर कदापि न समझें।अपनी लड़ाई स्वयं को लड़नी होगी। सशक्त बनें, समझदार बनें।हर परिस्थिति में जज्बा, जुनून कायम रखें, हौसला बुलंद रखें।

See also  साहू से ‘भतरा’ बन हथियाई सरकारी नौकरी, पदोन्नति भी पाई,अब खुली पोल, बर्खास्तगी की मांग? आरक्षण पर डाका, ओबीसी वर्ग के गोबरू राम ने फर्जी एसटी ST प्रमाण पत्र के सहारे 33 सालों तक शासन को गुमराह करने की खबर?

डॉ.मनीषा त्रिपाठी (राज्य पाल पुरस्कार से सम्मानित)
प्रधान पाठक
शास.रविशंकर प्राथमिक शाला
रायगढ़ ( छत्तीसगढ़)

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!