ज्योतिष – वास्तु
धर्म: भगवान स्वयं नहीं आते |इंसान के रूप में ही भगवान स्वयं आते हैं,
बहुत से लोग कहते है हमने भगवान को कभी नहीं देखा|और आप कहते हो भगवान सर्वत्र है|
भगवान का दर्शन: बहुत से लोग कहते है- हमने भगवान को कभी नहीं देखा|और आप कहते हो भगवान सर्वत्र है| फिर हमें भी दिखाइए
भगवान शब्द पंच अक्षरों के मेल से बनता हैं।
भा -भूमि (जमीन)
गा – गगन (आकाश)
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व – वायु (हवा)
न नीर (जल)
यह पांच तत्व सर्वत्र दिखाई पड़ते है |इन्ही पंच तत्वों के योग से भगवान बनते है |और हमेशा धरती मे रहेंगे|मानव से लेके हर जीव जंतु|इन्ही पंच तत्वों में ही मिल जाना है अंतिम मे यही जीवन का सार है,



