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छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा

मनेंद्रगढ़ वन मंडल में काट दिए गए 100 सरई के पेड़, करतूत बाज अफसरों का घिनौना रवैया हुआ उजागर, विभाग के स्थानीय अफसर की सह पर मध्य प्रदेश भेजी जाती है लकड़ी, सूत्र…

मनेंद्रगढ़। मनेंद्रगढ़ वन मंडल में निकम्मे अफसरों की एक बड़ी जमात वन मंडल मनेंद्रगढ़ के वनों के लिए दीमग साबित हो रही है। इन भ्रष्ट और घटिया कार्यशैली के नुमाइंदों की वजह से आए दिन वन मंडल के बड़े बड़े जंगल अपनी विनाशलीला पर आंसू बहा रहे हैं। यहां पर कई वर्षों से पदस्थ वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की हठधर्मिता से हर रोज जंगल क्षत विक्षत कर दिए जा रहे हैं।अवगत करा दें की विश्वस्त सूत्रों से यह भी पता चला है की जनकपुर उप वनमण्डल क्षेत्र में वहीं के स्थानीय लोग जो कई वर्षों से वन विभाग में एक जगह जड़ जमाए हुए हैं उनकी घटिया कार्यशैली और मिलीभगत से जनकपुर उप वन मंडल क्षेत्र अंतर्गत कुंवारपुर और बहरासी के मध्य प्रदेश से लगे सीमा क्षेत्रों के जंगलों से बड़े पैमाने पर सरई की कीमती लकड़ियां मध्य प्रदेश में तस्करी की जाती है और यह गोरखधंधा काफी समय से चल रहा है। सूत्र कहते हैं की कुंवारपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत कक्ष क्रमांक 1234 कुदरा बीट में लगभग दो महीने पूर्व एक साथ सैकड़ों सरई के राष्ट्रीयकृत विशाल पेड़ों को इसी उद्देश्य पूर्ति के लिए काटा गया था। हालांकि यह तो जांच का विषय है। परंतु जिस जंगल के मैन्युअल में लिखा है की प्रतिदिन सशक्त रूप में जंगलों की निगरानी करनी होती है।तो यह वाक्या बड़े ही ताज्जुब और हैरान करने वाला है की एक दो नहीं बल्कि 100 से ज्यादा झाड़ बीहड़ जंगल में काट दिए गए और महीनों तक इन करतूत बाज जंगल के नुमाइंदों को भनक तक नहीं लगी जिसके बाद अब ये लगभग सिद्ध भी हो जाता है की स्थानीय वन अमला सैलरी तो वन विभाग से ले रहा लेकिन जंगल बचाने का नही बल्कि जंगल को उजाड़ने और जंगल बेचने का। बहरहाल कुंवारपुर के कुदरा में कटे सैकड़ों सरई के पेड़ों की बलि तो चढ़ गई पर अब क्या ऐसे करतूत बाज निकम्मे जिम्मेदार भी कार्रवाई की बलि चढ़ेंगे या फिर चोर चोर मौसेरे भाई की कहावत फिर से चरितार्थ होगी वन मंडल मनेंद्रगढ़ में।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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