तालाब में मिल रहा गंदा पानी, नागरिक परेशान-समिति ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि शहर की नालियों और मल-जल का गंदा पानी सीधे भीमा तालाब में मिल रहा है। इससे तालाब का पानी प्रदूषित हो गया है और आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध की समस्या बढ़ रही है। समिति ने शारदा चौक के पास मुख्य नाले की ओर ड्रेनेज डायवर्ट कर तालाब में गंदे पानी का प्रवेश स्थायी रूप से बंद करने की मांग की। साथ ही पानी की वैज्ञानिक जांच कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक करने और आवश्यक शुद्धिकरण उपाय करने की बात कही।
सफाई, लाइट और सौंदर्याकरण की उठी मांग-समिति ने बताया कि वर्ष 2017-18 में DMF मद से तालाब परिसर में लगभग छह करोड़ रुपये खर्च कर सौंदर्याकरण के कार्य कराए गए थे, लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में परिसर की स्थिति खराब हो रही है। ज्ञापन में नियमित साफ-सफाई, जलकुंभी और सिल्ट हटाने, स्थायी कर्मचारियों की तैनाती, खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत, वॉकिंग ट्रैक और बेंचों का सुधार, हरियाली विकसित करने तथा तालाब की सीमाओं का सत्यापन कर अतिक्रमण हटाने की मांग की गई।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम-समिति ने कहा कि केवल निर्माण कार्य कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तालाब के स्थायी रखरखाव के लिए जिम्मेदारी तय कर नियमित बजट का प्रावधान भी जरूरी है। ज्ञापन के माध्यम से कलेक्टर से स्थल निरीक्षण कराकर सभी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया गया। समिति और नगरवासियों ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर मांगों पर ठोस पहल नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।