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नवोदय प्रवेश मामला: सरकारी स्कूल के रिकॉर्ड से उठे सवाल, अब प्रधान पाठक की भूमिका पर कार्रवाई का इंतजार

दो अलग-अलग स्कूलों में अध्ययन के विरोधाभासी अभिलेख सामने आने के बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं, यू-डाइस में कक्षा पांचवीं की प्रविष्टि भी सवालों के घेरे में

सूरजपुर। पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय बसदेई में ग्रामीण कोटे से हुए प्रवेश मामले में छात्र का प्रवेश निरस्त होने और विभागीय जांच में अलग-अलग विद्यालयों के शैक्षणिक अभिलेख सामने आने के बाद अब मामला केवल प्रवेश तक सीमित नहीं रह गया है। जांच के दौरान सामने आए रिकॉर्ड यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि यदि संबंधित छात्र के अध्ययन से जुड़े अभिलेख दो अलग-अलग विद्यालयों में अलग-अलग अवधि का अध्ययन दर्शाते हैं, तो सरकारी विद्यालय के स्तर पर इन अभिलेखों का सत्यापन किस तरह किया गया और यू-डाइस में छात्र की कक्षा पांचवीं की प्रविष्टि किस आधार पर दर्ज हुई।

दबंग दुनिया द्वारा पूर्व में प्रकाशित खबरों के बाद मामले की जांच सूरजपुर और रामानुजनगर विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के स्तर से हुई। जांच में एक ओर शहर के निजी विद्यालय में अध्ययन का रिकॉर्ड सामने आया, वहीं दूसरी ओर शासकीय प्राथमिक शाला के अभिलेखों में छात्र के कक्षा दूसरी से पांचवीं तक अध्ययन और परीक्षा परिणाम का उल्लेख सामने आया। अब इन दोनों रिकॉर्डों के बीच अंतर की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

सरकारी स्कूल के रिकॉर्ड ने बढ़ाई जिम्मेदारी की पड़ताल

मामले में सबसे अहम बिंदु यह है कि शासकीय प्राथमिक शाला के रिकॉर्ड में छात्र के कक्षा दूसरी से अध्ययनरत होने तथा आगे की कक्षाओं के परिणाम दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वहीं जांच से संबंधित अभिलेखों में शहर के एक निजी विद्यालय में भी छात्र के अध्ययन का रिकॉर्ड सामने आया है।

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यदि दोनों विद्यालयों के अभिलेख अपने-अपने स्तर पर सही हैं, तो एक ही अवधि में दोनों जगह अध्ययन का रिकॉर्ड कैसे बना, यह विभागीय जांच का महत्वपूर्ण विषय है। और यदि किसी एक रिकॉर्ड में गलत प्रविष्टि हुई है, तो उसे तैयार करने, संधारित करने और सत्यापित करने वाले जिम्मेदारों की भूमिका स्पष्ट की जानी चाहिए।

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यू-डाइस में सीधे कक्षा पांचवीं की प्रविष्टि क्यों?

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यू-डाइस रिकॉर्ड है। जांच से सामने आई जानकारी के अनुसार शासकीय प्राथमिक शाला के यू-डाइस रिकॉर्ड में छात्र का नाम सत्र 2025-26 में दिखाई देता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि यदि विद्यालय के अभिलेखों में छात्र के कक्षा दूसरी से अध्ययनरत होने की जानकारी थी, तो यू-डाइस में कक्षा पांचवीं की प्रविष्टि किस आधार पर दर्ज की गई।

क्या पूर्व कक्षाओं के अभिलेखों का सत्यापन किया गया था? क्या छात्र के प्रवेश, उपस्थिति और परीक्षा परिणाम से संबंधित रिकॉर्ड का मिलान किया गया? और यदि सत्यापन किया गया था तो निजी विद्यालय के रिकॉर्ड से सामने आए अंतर का पता पहले क्यों नहीं चला?

प्रधान पाठक की भूमिका क्यों नहीं हुई स्पष्ट?

शासकीय विद्यालय के अभिलेखों और संबंधित जानकारी की जिम्मेदारी विद्यालय स्तर पर भी होती है। ऐसे में विभागीय जांच में यदि विद्यालय के रिकॉर्ड से जुड़े तथ्य सामने आए हैं, तो प्रधान पाठक की भूमिका की भी स्पष्ट जांच होना जरूरी है।

यह सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि रिकॉर्ड की जिम्मेदारी तय करने के लिए है। यदि प्रधान पाठक द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और विद्यालय के अभिलेख सही पाए जाते हैं, तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि फिर दूसरे विद्यालय के रिकॉर्ड से विरोधाभास क्यों सामने आया। वहीं यदि रिकॉर्ड में गलत प्रविष्टि या गलत प्रमाणन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

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प्रवेश निरस्त हुआ, लेकिन रिकॉर्ड का सवाल अब भी बाकी

नवोदय विद्यालय द्वारा प्रवेश निरस्त किए जाने के बाद दूसरे बच्चे को अवसर मिल चुका है। यानी प्रवेश से जुड़ी तत्काल स्थिति बदल गई, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में सामने आए दस्तावेजी विरोधाभास अभी भी कायम हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे का प्रवेश निरस्त करना और गलत अथवा विरोधाभासी रिकॉर्ड तैयार होने की जिम्मेदारी तय करना दो अलग-अलग विषय हैं। यदि किसी स्तर पर दस्तावेजों या शैक्षणिक अभिलेखों में गंभीर विसंगति हुई है तो केवल प्रवेश निरस्त कर देने से उस विसंगति का समाधान नहीं होता।

अब विभाग को स्पष्ट करना होगा

शिक्षा विभाग को अब यह स्पष्ट करना चाहिए कि—

• शासकीय विद्यालय के अभिलेखों में छात्र के कक्षा दूसरी से अध्ययनरत होने की जानकारी किस आधार पर दर्ज थी?
• यू-डाइस में कक्षा पांचवीं की प्रविष्टि किसके स्तर से और किस दस्तावेज के आधार पर की गई?
• छात्र के पूर्व अध्ययन से संबंधित निजी और शासकीय विद्यालय के रिकॉर्ड का आपसी सत्यापन क्यों नहीं हुआ?
• जांच रिपोर्ट में सामने आए विरोधाभासी रिकॉर्ड की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की गई?
• प्रधान पाठक की भूमिका की जांच की गई या नहीं?
• यदि जांच में रिकॉर्ड सही पाए जाते हैं तो दोनों विद्यालयों के अभिलेखों में अंतर की आधिकारिक वजह क्या है?
• और यदि किसी रिकॉर्ड में गलत प्रविष्टि अथवा गलत प्रमाणन पाया जाता है तो जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई कब होगी?

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जांच पूरी होने के बाद भी कार्रवाई का इंतजार

इस पूरे मामले में अब सवाल केवल यह नहीं है कि छात्र को ग्रामीण कोटे का लाभ कैसे मिला। इससे आगे बढ़कर सवाल यह है कि शैक्षणिक रिकॉर्ड और आधिकारिक यू-डाइस प्रविष्टि में अंतर पैदा कैसे हुआ।

दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ चुकी है और अलग-अलग विद्यालयों के रिकॉर्ड सामने आ चुके हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग को अब केवल प्रवेश निरस्त होने की कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय रिकॉर्ड तैयार करने और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी स्पष्ट करनी चाहिए।

यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही, गलत प्रविष्टि अथवा गलत प्रमाणन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होना तय प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए। वहीं यदि सभी रिकॉर्ड सही पाए जाते हैं तो विभाग को यह भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि एक ही छात्र के संबंध में दो अलग-अलग विद्यालयों के रिकॉर्ड में अंतर आखिर क्यों सामने आया।

अब नजर शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर है—क्या मामला केवल प्रवेश निरस्तीकरण तक रहेगा या रिकॉर्ड तैयार करने और सत्यापन करने वालों की जिम्मेदारी भी तय होगी?

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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