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मार्च महापरीक्षा 2027 में बम्हनीडीह विकासखंड को 100 प्रतिशत साक्षर बनाने की तैयारी तेज
उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत घर-घर सर्वेक्षण, स्वयंसेवकों की मैपिंग और 200 घंटे के शिक्षण मॉड्यूल पर रहेगा जोर

बम्हनीडीह। उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम (ULLAS) के तहत विकासखंड बम्हनीडीह को मार्च महापरीक्षा 2027 तक 100 प्रतिशत साक्षर बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जिला परियोजना अधिकारी साक्षर भारत विजया सिंह राठौर ने मोबाइल पर हुई चर्चा में बताया कि जिला कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के स्पष्ट निर्देश हैं कि आगामी मार्च महापरीक्षा 2027 तक जिले और सभी विकासखंडों को पूर्ण साक्षर बनाने के लक्ष्य को हासिल किया जाए। इसी उद्देश्य से संबंधित अधिकारियों, ग्राम प्रभारियों, सर्वेयरों एवं स्वयंसेवकों को अभी से अभियान में जुटने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी क्रम में विकासखंड परियोजना अधिकारी साक्षर भारत डॉ. उमेश कुमार दुबे (बीपीओ) द्वारा ग्राम प्रभारी, सर्वेयर एवं स्वयंसेवी शिक्षकों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के ऐसे लोगों को साक्षर बनाना है, जो अभी पढ़ने-लिखने और बुनियादी संख्या ज्ञान से वंचित हैं।
घर-घर सर्वे कर असाक्षरों की होगी पहचान
अभियान के तहत सर्वेयर एवं शिक्षकों को ग्राम पंचायत और वार्ड की सीमा में आने वाले सभी घरों का घर-घर सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे के दौरान 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के असाक्षरों की पहचान कर उनका विवरण तैयार किया जाएगा। चिह्नित असाक्षरों को उल्लास कार्यक्रम से जोड़ते हुए उन्हें साक्षरता कक्षाओं में शामिल किया जाएगा।
सर्वेयरों को स्वयं ULLAS App पर पंजीकरण करने तथा चिह्नित असाक्षरों और स्वयंसेवी शिक्षकों की जानकारी समय पर ऑनलाइन अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। डेटा प्रविष्टि के दौरान आधार नंबर, मोबाइल नंबर, आयु, लिंग एवं सामाजिक श्रेणी सहित आवश्यक जानकारी को त्रुटिरहित दर्ज करने पर विशेष जोर दिया गया है।
विद्यालयों को बनाया जाएगा उल्लास केंद्र
ग्राम स्तर पर प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को उल्लास केंद्र के रूप में संचालित करने की योजना है। ग्राम प्रभारी एवं प्रधानाध्यापकों को स्थानीय स्तर पर जागरूक युवाओं, बीएड-डीएलएड छात्रों, 10वीं-12वीं के विद्यार्थियों, एनसीसी-एनएसएस कैडेटों तथा स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को स्वयंसेवक के रूप में अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रत्येक स्वयंसेवक को लगभग 5 से 10 असाक्षरों से जोड़कर उनकी नियमित पढ़ाई की जिम्मेदारी दी जाएगी। ग्राम में उल्लास केंद्र के लिए विद्यालय, पंचायत भवन या अन्य उपयुक्त सामुदायिक स्थल का चयन कर कक्षाओं के लिए सुविधाजनक समय निर्धारित किया जाएगा।
200 घंटे के मॉड्यूल से होगी पढ़ाई
स्वयंसेवी शिक्षकों के माध्यम से निर्धारित 200 घंटे के शिक्षण मॉड्यूल के अनुसार साक्षरता कक्षाएं संचालित की जाएंगी। यह अभियान पूर्णतः स्वैच्छिक होगा और स्वयंसेवकों को इसके लिए कोई मानदेय देय नहीं होगा।
पाठ्यक्रम में केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में उपयोगी बुनियादी ज्ञान को भी शामिल किया गया है। इसमें अक्षर पहचान, शब्द एवं वाक्य पढ़ना-लिखना तथा जोड़-घटाव जैसे बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (FLN) के साथ वित्तीय और डिजिटल साक्षरता पर भी ध्यान दिया जाएगा।
बैंकिंग, यूपीआई और स्मार्टफोन की भी दी जाएगी जानकारी
उल्लास कार्यक्रम के तहत शिक्षार्थियों को रोजमर्रा के जीवन में उपयोगी महत्वपूर्ण जीवन कौशल की जानकारी भी दी जाएगी। इसमें बैंकिंग कार्य, यूपीआई का सुरक्षित उपयोग, वित्तीय लेन-देन, स्मार्टफोन का संचालन, डिजिटल सेवाओं का उपयोग, कानूनी जागरूकता तथा स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी शामिल होगी।
पठन-पाठन को प्रभावी बनाने के लिए दीक्षा पोर्टल (DIKSHA), ULLAS App पर उपलब्ध शिक्षण सामग्री तथा ‘उल्लास प्रवेशिका’ का उपयोग किया जाएगा। कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध विभिन्न भाषाओं की शिक्षण सामग्री का भी आवश्यकतानुसार उपयोग किया जाएगा।
सितंबर की FLNAT परीक्षा के बाद अब मार्च महापरीक्षा की तैयारी
उल्लास कार्यक्रम के तहत वर्ष में दो बार FLNAT (Foundational Literacy and Numeracy Assessment Test) मूल्यांकन आयोजित किया जाता है। सितंबर 2026 में आयोजित परीक्षा के बाद अब मार्च 2027 में होने वाली महापरीक्षा को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संबंधित अधिकारियों को लक्षित सभी शिक्षार्थियों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मूल्यांकन में सफल शिक्षार्थियों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) द्वारा साक्षरता प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इससे नवसाक्षरों को उनकी उपलब्धि का औपचारिक प्रमाण भी प्राप्त होगा।
नियमित निगरानी और प्रगति रिपोर्टिंग पर जोर
ग्राम प्रभारी एवं संबंधित शिक्षकों को उल्लास केंद्रों में कक्षाओं के नियमित संचालन, शिक्षण सामग्री की उपलब्धता और स्वयंसेवकों द्वारा किए जा रहे कार्यों की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक स्तर से अभियान की प्रगति की जानकारी विकासखंड कार्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी।
अधिकारियों का लक्ष्य है कि सर्वेक्षण से लेकर शिक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणीकरण तक प्रत्येक चरण को व्यवस्थित ढंग से पूरा किया जाए, ताकि मार्च महापरीक्षा 2027 तक बम्हनीडीह विकासखंड को 100 प्रतिशत साक्षर बनाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। अभियान की सफलता के लिए प्रशासनिक अमले के साथ-साथ शिक्षकों, स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों, स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



