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पुलिस की कार्यप्रणाली में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, लंबित मामलों के निराकरण में लाएं तेजी: आईजी रामगोपाल गर्ग

बिलासपुर रेंज के पुलिस अधीक्षकों और राजपत्रित अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, थानों के निरीक्षण से लेकर एनडीपीएस मामलों की विवेचना तक दिए सख्त निर्देश

बिलासपुर। बिलासपुर रेंज में पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रामगोपाल गर्ग ने 9 अक्टूबर को रेंज के पुलिस अधीक्षकों एवं राजपत्रित अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में थानों की कार्यप्रणाली, बेसिक पुलिसिंग, फील्ड सुपरविजन, लंबित आपराधिक प्रकरणों के निराकरण, मालखाना जांच, विभागीय जांच, सड़क दुर्घटनाओं की विवेचना और न्यायालयों में लंबित मामलों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में आईजी गर्ग ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को पुलिसिंग की गुणवत्ता सुधारने और कार्यप्रणाली में अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधों की विवेचना केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर प्रभावी सुपरविजन करना होगा। लंबित मामलों के निराकरण में तेजी लाने के साथ ही प्रत्येक कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

थानों के निरीक्षण और मालखाने की जांच में बरतें गंभीरता

आईजी रामगोपाल गर्ग ने सभी एसडीओपी और नगर पुलिस अधीक्षकों (सीएसपी) को नियमित रूप से थानों का भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान थानों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए और निरीक्षण रिपोर्ट मौके पर ही हस्तलिखित रूप में तैयार की जाए, ताकि निरीक्षण की प्रक्रिया प्रभावी और जवाबदेह बनी रहे।

वार्षिक निरीक्षण के दौरान थानों के मालखाने (प्रॉपर्टी रूम) की बारीकी से जांच करने और जब्त सामग्री एवं प्रकरणों से संबंधित संपत्ति का अभिलेखों से मिलान करने के निर्देश भी दिए गए। जब्त संपत्ति की सुरक्षा, उसके रखरखाव और एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी अथवा संबंधित अभिरक्षक तक उसके हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया यानी ‘चेन ऑफ कस्टडी’ का सही संधारण सुनिश्चित करने को कहा गया। इसका उद्देश्य जब्त माल में गड़बड़ी, विसंगति अथवा उसके गायब होने जैसी घटनाओं को रोकना है।

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इसके साथ ही सभी राजपत्रित अधिकारियों को अपनी दैनिक डायरी अनिवार्य रूप से संधारित करने के निर्देश दिए गए, ताकि उनके कार्यों, निरीक्षणों और विभागीय गतिविधियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

गंभीर अपराधों में मौके पर पहुंचकर करें सुपरविजन

बैठक में गंभीर एवं सनसनीखेज अपराधों की विवेचना को लेकर विशेष निर्देश दिए गए। आईजी ने कहा कि ऐसे मामलों में अधिकारी केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि घटनास्थल पर पहुंचकर विवेचकों को आवश्यक मार्गदर्शन दें। मर्ग जांच के दौरान भी परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी निगरानी और विवेचना की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए।

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अधिकारियों को मौके पर किए गए सुपरविजन का हस्तलिखित नोट तैयार कर उसे केस डायरी का हिस्सा बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही संबंधित सुपरविजन नोट को क्राइम रिव्यू एप्लीकेशन (CRA) पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करने को कहा गया। इससे गंभीर अपराधों की जांच में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका, विवेचना की प्रगति और आवश्यक दिशा-निर्देशों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखा जा सकेगा।

आम नागरिकों और पीड़ितों से सम्मानजनक व्यवहार जरूरी

आईजी ने थानों में शिकायत लेकर आने वाले नागरिकों और पीड़ितों के साथ पुलिसकर्मियों को शालीन, संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि पुलिस थाने आम जनता की समस्याओं के समाधान का प्रमुख माध्यम हैं। ऐसे में शिकायतकर्ताओं के साथ अच्छा व्यवहार और उनकी शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

पुलिस कर्मचारियों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की प्राथमिक एवं विभागीय जांच निष्पक्षता से करने के निर्देश भी दिए गए। किसी भी शिकायत को अनावश्यक रूप से लंबित रखने के बजाय तथ्यों के आधार पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

इसके अतिरिक्त लंबित स्थायी वारंटों की शत-प्रतिशत तामीली के लिए विशेष अभियान जारी रखने के निर्देश दिए गए, ताकि फरार आरोपियों और न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं होने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

एनडीपीएस मामलों में कानूनी प्रक्रिया का सख्ती से पालन

नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की विवेचना को लेकर आईजी ने अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कानूनी प्रावधानों और निर्धारित प्रक्रियाओं का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिए, ताकि विवेचना में किसी प्रकार की कमी के कारण आरोपी को न्यायालय से दोषमुक्त होने का लाभ न मिले।
एनडीपीएस अधिनियम की धारा 50 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने पर विशेष जोर दिया गया। निर्देशानुसार, कम से कम 25 से 50 प्रतिशत मामलों में एएनटीएफ प्रभारी अथवा राजपत्रित अधिकारी स्वयं मौके पर उपस्थित रहकर पंचनामा और जब्ती की कार्रवाई अपनी निगरानी में कराएंगे।

आईजी ने यह भी निर्देश दिया कि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में वाहन मालिकों को आरोपी बनाने से पहले उनकी संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य जुटाए जाएं। संबंधित वाहनों के संबंध में नियमानुसार राजसात करने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए। इन निर्देशों का उद्देश्य विवेचना को मजबूत बनाना और न्यायालय में मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना है।

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सड़क दुर्घटनाओं की जांच में तकनीक का उपयोग अनिवार्य

सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े प्रकरणों की समीक्षा करते हुए आईजी ने दुर्घटना स्थल से ही ई-डीएआर (e-DAR) पोर्टल पर तत्काल आवश्यक जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए। दुर्घटना संबंधी आंकड़ों और दस्तावेजों को समय पर पोर्टल पर दर्ज करने से प्रकरणों के प्रबंधन और संबंधित कार्रवाई में मदद मिलेगी।

फर्जी बीमा क्लेम और दुर्घटना के बाद वास्तविक चालक को बदलने जैसी अनियमितताओं को रोकने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। निर्देश दिए गए कि दुर्घटना प्रकरणों में वाहन चालक की टावर लोकेशन और घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज को अनिवार्य रूप से प्राप्त कर जब्ती की कार्रवाई की जाए। इससे दुर्घटना के समय वाहन की स्थिति, चालक की भूमिका और घटना से संबंधित तथ्यों की जांच में सहायता मिलेगी।

मर्ग जांच में अपराध मिलने पर तत्काल दर्ज करें एफआईआर

मर्ग जांच और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर भी आईजी ने स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मर्ग जांच के दौरान यदि किसी संज्ञेय अपराध के घटित होने के तथ्य सामने आते हैं, तो बिना अनावश्यक विलंब के एफआईआर दर्ज की जाए।
अस्पतालों अथवा पुलिस चौकियों में कायम किए गए जीरो मर्ग की डायरी तत्काल संबंधित थाने को भेजने के निर्देश दिए गए, ताकि संबंधित थाना समय पर आवश्यक जांच और वैधानिक कार्रवाई शुरू कर सके।

थाना प्रभारियों को एफआईआर में दर्ज की जाने वाली धाराओं का स्वयं बारीकी से परीक्षण करने और घटना के तथ्यों के अनुरूप सही धाराएं लागू करने को कहा गया। विशेष रूप से महिला संबंधी अपराधों में कानूनी प्रावधानों का उचित उपयोग सुनिश्चित करने और एफआईआर पर थाना प्रभारी के स्वयं हस्ताक्षर करने के निर्देश दिए गए।

जमानत पर छूटकर दोबारा अपराध करने वालों पर होगी कार्रवाई

आदतन अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए आईजी ने जमानत निरस्तीकरण की प्रक्रिया को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई आदतन अपराधी जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद दोबारा अपराध करता है, तो उसके विरुद्ध उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर संबंधित न्यायालय में जमानत निरस्त कराने के लिए तत्काल आवेदन प्रस्तुत किया जाए।
इस कदम का उद्देश्य बार-बार अपराध करने वाले व्यक्तियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

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विभागीय और प्राथमिक जांचों का समय-सीमा में करें निराकरण

बैठक में लंबित विभागीय एवं प्राथमिक जांचों की भी समीक्षा की गई। आईजी ने एसडीओपी और सीएसपी स्तर के जांच अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्वयं संबंधित प्रार्थियों और गवाहों के बयान दर्ज करें। जांच की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से बचते हुए प्रत्येक प्रकरण का निर्धारित समय-सीमा के भीतर निराकरण किया जाए।

उन्होंने अधिकारियों को लंबित जांचों की नियमित समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी मामले को बिना उचित कारण लंबे समय तक लंबित न रखा जाए। जांच में निष्पक्षता, तथ्यों की पुष्टि और नियमानुसार कार्रवाई को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

पुराने मामलों और हाईकोर्ट से संबंधित प्रकरणों पर विशेष कार्ययोजना

एक वर्ष से अधिक समय से लंबित आपराधिक एवं अन्य संबंधित प्रकरणों के साथ-साथ उच्च न्यायालय से जुड़े मामलों के शीघ्र निराकरण के लिए भी आईजी ने विशेष निर्देश जारी किए। उन्होंने अधिकारियों को अनुभागवार कार्ययोजना तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने को कहा।

लंबित मामलों की समीक्षा कर उनमें आ रही बाधाओं की पहचान करने और संबंधित अधिकारियों के माध्यम से समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कम करना और मामलों के निपटारे में तेजी लाना है।

अनुशासन, गुणवत्ता और त्वरित न्याय सर्वोच्च प्राथमिकता

बैठक के अंत में आईजी रामगोपाल गर्ग ने सभी पुलिस अधीक्षकों एवं राजपत्रित अधिकारियों को निर्देशों का गंभीरता से पालन करने की हिदायत दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्यप्रणाली में अनुशासन, विवेचना की गुणवत्ता, पारदर्शिता और त्वरित न्याय सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अधिकारियों को अपने दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करना होगा।
उन्होंने निर्देशों के पालन में किसी भी प्रकार की शिथिलता अथवा लापरवाही नहीं बरतने को कहा। बैठक में बिलासपुर रेंज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक तथा समस्त राजपत्रित अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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