तीन दिन में रिपोर्ट मांगी, 20 दिन बाद भी जांच जारी! नवोदय ग्रामीण कोटा मामले में जांच की रफ्तार पर सवाल
17 अगस्त को जिला शिक्षा अधिकारी ने तीन दिवस में रिपोर्ट देने के दिए थे निर्देश, सूरजपुर बीईओ अब भी बता रहे जांच प्रक्रिया में, प्रतापपुर बीईओ को जारी आदेश वापस होने के बाद संशोधित आदेश जारी हुआ या नहीं, स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं

सूरजपुर। कौशलेन्द्र यादव। पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय बसदेई में ग्रामीण कोटे के अंतर्गत छात्र के प्रवेश को लेकर उठी शिकायत के मामले में अब जांच की रफ्तार पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। पूर्व में प्रकाशित खबर के बाद सामने आए दस्तावेजों और अधिकारियों के बयानों से यह स्पष्ट हुआ था कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने मामले की जांच के लिए आदेश जारी किया था। वहीं, 17 अगस्त 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी को तीन दिवस के भीतर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
लेकिन निर्धारित समय-सीमा बीतने के बाद भी अब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। 6 सितंबर तक करीब 20 दिन बीत जाने के बावजूद सूरजपुर विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा केवल “जांच प्रक्रिया में है” कहकर स्थिति बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जिला शिक्षा अधिकारी ने तीन दिवस में रिपोर्ट मांगी थी तो आखिर जांच पूरी होने में इतना समय क्यों लग रहा है?
तीन दिन की समय-सीमा, फिर भी 20 दिन बाद भी जांच जारी
जिला शिक्षा अधिकारी के 17 अगस्त के आदेश में मामले की जांच कर तीन दिवस के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। आदेश का उद्देश्य छात्र के कक्षा 3 से 5 तक के शैक्षणिक अभिलेखों की जांच कर यह स्पष्ट करना था कि छात्र ने किन विद्यालयों में अध्ययन किया और संबंधित विद्यालय ग्रामीण अथवा शहरी क्षेत्र में आते हैं।
हालांकि, निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। इससे जांच की प्रगति और विभाग द्वारा निर्धारित समय-सीमा के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बीईओ बोले- जांच प्रक्रिया में, लेकिन रिपोर्ट कब?
मामले को लेकर सूरजपुर विकासखंड शिक्षा अधिकारी हरेंद्र सिंह से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि मामला जांच प्रक्रिया में है और जांच की जा रही है।
लेकिन सवाल यह है कि जब जिला शिक्षा अधिकारी ने तीन दिवस के भीतर रिपोर्ट मांगी थी, तो अब तक जांच पूरी क्यों नहीं हो सकी? क्या जांच के दौरान ऐसे नए तथ्य सामने आए हैं जिनके कारण समय लगा, या फिर जांच प्रक्रिया ही निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप आगे नहीं बढ़ पाई? विभाग की ओर से फिलहाल इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
प्रतापपुर बीईओ को जारी आदेश वापस, संशोधित आदेश का पता नहीं
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल जांच आदेश को लेकर बना हुआ है। पूर्व में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्रतापपुर विकासखंड शिक्षा अधिकारी को भी जांच संबंधी आदेश जारी हुआ था, जबकि संबंधित विद्यालय रामानुजनगर विकासखंड क्षेत्र में बताया गया था। प्रतापपुर बीईओ मुन्नु सिंह धुर्वे ने पूर्व में बताया था कि मामला उनके क्षेत्र का नहीं होने के कारण जांच संबंधी आदेश वापस कर दिया गया है।
अब सवाल यह है कि यदि प्रतापपुर के लिए जारी आदेश वापस कर दिया गया था, तो क्या इसके बाद रामानुजनगर विकासखंड के संबंधित अधिकारी के लिए संशोधित जांच आदेश जारी किया गया?
यह स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है।
सूरजपुर बीईओ को पत्र मिला, फिर भी रिपोर्ट क्यों नहीं?
मामले में यह भी सामने आया है कि सूरजपुर विकासखंड शिक्षा अधिकारी को जांच संबंधी पत्र प्राप्त हो चुका है। इसके बावजूद निर्धारित तीन दिवस की समय-सीमा में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।
ऐसे में विभाग के सामने कई सवाल खड़े हो रहे हैं—
जब आदेश स्पष्ट था तो रिपोर्ट समय पर क्यों नहीं दी गई?
क्या जांच के लिए अतिरिक्त समय की अनुमति ली गई?
यदि ली गई तो किस अधिकारी से और कितने दिनों की?
और यदि अतिरिक्त समय नहीं लिया गया तो निर्धारित समय-सीमा के बावजूद जांच अब तक लंबित क्यों है?
ग्रामीण कोटे की पात्रता से जुड़ा मामला, इसलिए जांच अहम
ग्रामीण कोटे के तहत नवोदय विद्यालय में प्रवेश से जुड़ा यह मामला सामान्य प्रशासनिक जांच भर नहीं है। शिकायत में छात्र के पूर्व अध्ययन और विद्यालयों के ग्रामीण अथवा शहरी क्षेत्र से संबंधित होने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में संबंधित विद्यालयों के मूल प्रवेश रजिस्टर, उपस्थिति पंजी, स्थानांतरण प्रमाण-पत्र, शैक्षणिक अभिलेख और अन्य संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है और छात्र ग्रामीण कोटे की निर्धारित पात्रता के अनुरूप प्रवेश का पात्र था या नहीं।
अब विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 17 अगस्त को तीन दिवस में रिपोर्ट देने का आदेश जारी होने के बावजूद 6 सितंबर तक जांच पूरी क्यों नहीं हुई? वहीं प्रतापपुर बीईओ को जारी आदेश वापस होने के बाद संशोधित आदेश किस अधिकारी के नाम जारी हुआ, इसकी भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
ऐसे में नवोदय ग्रामीण कोटा प्रवेश मामले में अब शिकायत से ज्यादा जांच की समय-सीमा और प्रक्रिया चर्चा का विषय बन गई है। जिला शिक्षा विभाग की ओर से जांच रिपोर्ट कब प्रस्तुत कराई जाती है और उसमें छात्र के शैक्षणिक अभिलेखों के सत्यापन के बाद क्या निष्कर्ष सामने आता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।


