छत्तीसगढ़ पुलिस में ‘महासमुंद एसपी’ की कुर्सी को लेकर मचा घमासान…वरिष्ठ खोजी पत्रकार मुकेश एस सिंह के वायरल ट्वीट से मचा सन्नाटा, ‘कौन बनेगा महासमुंद एसपी’ पर सस्पेंस बरकरार…

0 छत्तीसगढ़ पुलिस में ‘महासमुंद एसपी’ की कुर्सी को लेकर मचा घमासान…
0 वरिष्ठ खोजी पत्रकार मुकेश एस सिंह के वायरल ट्वीट से मचा सन्नाटा, ‘कौन बनेगा महासमुंद एसपी’ पर सस्पेंस बरकरार
रायपुर 11 नवंबर 2025। छत्तीसगढ़ पुलिस के भीतर इन दिनों सबसे चर्चित, सबसे प्रतिष्ठित और कहा जा सकता है कि सबसे लाभदायक कुर्सी बन चुकी है—महासमुंद जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) की पोस्टिंग।इस पर कौन बैठेगा, यह सवाल अब सत्ता गलियारों से लेकर पुलिस मुख्यालय (PHQ) तक गूंज रहा है।
राज्य के वरिष्ठ खोजी पत्रकार मुकेश एस सिंह के वायरल ट्वीट “महासमुंद ज़िले के नये पुलिस अधीक्षक का स्वागत है, मगर कौन होगा वो SP?” ने इस सस्पेंस को और गहरा कर दिया है।
ट्वीट में साझा की गई अंदरूनी जानकारियों और ब्यूरोक्रेटिक हलचल को लेकर अब पूरे पुलिस महकमे और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
यह पोस्टिंग अचानक इस कदर ‘हॉट सीट’ कैसे बन गई, इसका जवाब खुद अफसर भी नहीं ढूंढ पा रहे।
🔹 एक अनार और आठ बीमार
सूत्र बताते हैं कि महासमुंद एसपी की कुर्सी के लिए इस वक्त आठ आईपीएस अधिकारी रेस में हैं — जिनमें चार RR यानी Regular Recruit (सीधे यूपीएससी से चयनित) और चार SPS (Promotee IPS) यानी राज्य सेवा से प्रमोशन पाकर आईपीएस बने अधिकारी शामिल हैं।
यही वजह है कि अब इसे पुलिस विभाग के भीतर ‘RR बनाम SPS’ की जंग कहा जा रहा है।

ट्रांसफ़र नहीं, बल्कि पावर इक्वेशन और नेटवर्क इन्फ्लुएंस का खेल चल रहा है।
🔹 अंदरखाने में सस्पेंस बरकरार
सभी अटकलों के बावजूद फिलहाल इस पर अंतिम आदेश नहीं हुआ है।
राज्य पुलिस मुख्यालय में फाइल अब सीएम सचिवालय और गृह विभाग के बीच घूम रही है।
सूत्रों के मुताबिक, “Suspense अब भी बरकरार है, लेकिन इसकी चर्चा अब पूरे पुलिस नेटवर्क और मीडिया न्यूज़रूम तक पहुँच चुकी है।”
महासमुंद एसपी की कुर्सी अब केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ पुलिस के भीतर चल रहे शक्ति-संतुलन, प्रभाव और साख की लड़ाई बन चुकी है।
जहाँ एक ओर युवा अधिकारी मेहनत और प्रोफेशनलिज्म के दम पर पहचान बना रहे हैं, वहीं कुछ नियुक्तियाँ अब गॉसिप और पॉलिटिकल कनेक्शन का शिकार हो रही हैं।
राज्य की जनता और पुलिस दोनों अब इंतज़ार में हैं कि क्या यह “महासमुंद का सस्पेंस” आने वाले दिनों में खत्म होगा या यह फाइल एक बार फिर राजनीति की भूलभुलैया में उलझ जाएगी।



