देश भर में धड़ल्ले से चल रहा डॉक्टर की उपाधि बेचने का गोरखधंधा, गैरकानूनी तरीके से कई संस्थाएं कुछ हजार रुपये में बेच रहीं फर्जी डिग्रियां…

जांजगीर-चांपा। अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखना सभी को अच्छा लगता है। लोगों का मानना है कि इससे समाज में बड़ी इज्जत मिलती है। लोग डॉक्टर के साथ सम्मानजनक तरीके से पेश आते हैं। ऐसे में डॉक्टर की डिग्री लेना भी अब व्यापार बन गया है। गैरकानूनी तरीके से कई संस्थाएं कुछ हजार रुपये में डॉक्टर की फर्जी डिग्रियां बेच रहीं हैं।
दरअसल, मात्र 20 हजार से 50 हजार तक खर्च करके लोग डॉक्टरेट की उपाधि खरीद रहे हैं। देश भर में करीब 100 से ज्यादा संस्थाएं फर्जी तरीके से डॉक्टरेट की उपाधियां बेच रही हैं। इस बात का खुलासा फर्जी संस्थाओं के ऑफर से हुआ है। बता दें कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म के साथ-साथ अब तो सीधे मोबाइल पर भी कॉल करके ऐसी संस्थाओं द्वारा 20 हजार से 50 हजार रुपये तक में डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान करने का खुला ऑफर दिया जा रहा है। जबकि, वह उपाधि पूरी तरह से फ़र्ज़ी है। गौरतलब है कि सामान्य तौर पर यदि किसी ने चिकित्सा क्षेत्र में पढ़ाई की है तो उसे डॉक्टर लिखने का अधिकार मिल जाता है। हालांकि, इस पर भी अक्सर बहस चलती है कि किस विधा के लोग डॉक्टर लिख सकते हैं और कौन नहीं लिख सकता लेकिन, फिर भी सामान्य तौर पर चिकित्सा क्षेत्र में डिग्री लेने वाले अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखते हैं। वही अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखने का अधिकार पीएचडी डिग्री के माध्यम से भी मिल जाता है लेकिन, इसमें छात्र को किसी विषय विशेष में शोध कार्य पेश करना पड़ता है और यह शोध पूरी दुनिया में अपनी तरह का अनोखा होता है, इसलिए शोधकर्ता को डॉक्टरेट की उपाधि दे दी जाती है और वह अपने नाम के आगे डॉ लिख सकता है।इसके अलावा एक तीसरा तरीका और है, जिसमें यदि किसी व्यक्ति का कार्य उसके अपने क्षेत्र में ऐसा है कि उसके काम की वजह से उसे दुनिया पहचानती है, उन्हें सरकार की रजिस्टर्ड यूनिवर्सिटी मानद उपाधि से सम्मानित कर सकती है। ऐसे लोगों को वैसे ही किसी पहचान की जरूरत नहीं होती, लेकिन यह चाहे तो अपने नाम के सामने डॉक्टर लिख सकते हैं। जबकि, दूसरी ओर देश भर में कई संस्थाओं ने डॉक्टर की फर्ज़ी डिग्री बेचने का कारोबार शुरू कर दिया है।
देश भर में 100 से अधिक संस्थाएं बेच रही हैं फर्जी डिग्री
जानकारी के अनुसार, देश भर में लगभग 100 से अधिक ऐसी संस्थाएं हैं, जो डॉक्टर की फर्ज़ी डिग्री महज कुछ रुपयों में बेच रही हैं। इनमें कुछ संस्थाएं भारत की हैं और कुछ संस्थाएं भारत के बाहर की हैं। इसमें से कुछ संस्थाएं एमएसएमई के तहत रजिस्टर्ड व्यावसायिक संस्थान हैं और कुछ समाजसेवी संगठन हैं, लेकिन उनके पास मानद उपाधि देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
रजिस्टर्ड यूनिवर्सिटी ही दे सकती है मानद उपाधि
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में यूनिवर्सिटी बनाने का और यूनिवर्सिटी के कामकाज का वर्णन है। ऐसी यूनिवर्सिटी ही किसी जानी-मानी हस्ती को डॉक्टरेट की मानद उपाधि दे सकती हैं। इसके अलावा यदि कोई और दे रहा है तो यह कानून का उल्लंघन है और इसको भारतीय कानून में धोखाधड़ी कहा जाएगा और इसके तहत धारा 420 के तहत ऐसे फर्जी संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।



