छात्रों ने कलेक्टर अमृत विकास टोप्पो को भेंट किए सीड बॉल, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

जांजगीर-चांपा। शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय झालरौंदा के विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल करते हुए अपने हाथों से तैयार किए गए सीड बॉल जिला कलेक्टर श्री अमृत विकास टोप्पो को भेंट किए। इस अवसर पर विद्यार्थियों की पर्यावरण के प्रति जागरूकता, मेहनत और नवाचार की सराहना की गई।
विद्यालय में प्रकृति शिक्षण समूह के सहयोग से शिक्षक महेन्द्र कुमार चन्द्रा के मार्गदर्शन में सीड बॉल निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई थी। कार्यशाला में विद्यार्थियों को बीज, मिट्टी और जैविक खाद की सहायता से सीड बॉल तैयार करने की विधि सिखाई गई। साथ ही उन्हें पौधरोपण, जैव विविधता संरक्षण और हरित वातावरण के महत्व से भी अवगत कराया गया।
शिक्षक महेन्द्र कुमार चन्द्रा ने विद्यार्थियों को बताया कि सीड बॉल की अवधारणा नई नहीं है। प्राचीन भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथ चरक संहिता में भी बीज को गोबर में लपेटकर बोने का उल्लेख मिलता है। आज भी कई आदिवासी समुदाय महुआ, आम सहित अन्य वृक्षों के बीजों को गोबर में लपेटकर जंगलों में फैलाते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से नए पौधे विकसित होते हैं।
उन्होंने बताया कि सीड बॉल बीजों को पक्षियों द्वारा खाए जाने से बचाता है। मिट्टी का कवच बीज को सुरक्षित रखता है, वर्षा में बहने से रोकता है, धूप में नमी बनाए रखता है तथा जैविक खाद अंकुरण के लिए आवश्यक पोषण प्रदान करती है। इसके कारण खरपतवार भी बीज को आसानी से दबा नहीं पाते और पौधों को शुरुआती दो सप्ताह का बेहतर विकास मिलता है। सामान्य रूप से खुले में फेंके गए बीजों की अंकुरण सफलता लगभग 5 प्रतिशत होती है, जबकि सीड बॉल के माध्यम से यह 70 से 80 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
इस जानकारी से प्रेरित होकर विद्यालय के प्रत्येक छात्र ने कम से कम 100 सीड बॉल तैयार करने का संकल्प लिया। अधिकांश विद्यार्थियों ने अपना लक्ष्य पूरा कर लिया है। तैयार किए गए सीड बॉल को जिले के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर अभियान चला रहे हैं। इन्हें सड़क किनारे, खाली मैदानों, बंजर भूमि और अन्य उपयुक्त स्थानों पर फेंका जाएगा, ताकि वर्षा ऋतु में अधिक से अधिक पौधे विकसित होकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकें।
विद्यालय के इस प्रयास को स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल माना जा रहा है। विद्यार्थियों का मानना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति इस प्रकार छोटे-छोटे प्रयास करे तो आने वाले वर्षों में हरियाली बढ़ेगी और प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।



