एक स्कूल से हटाया, दूसरे में बैठाया! प्रधान पाठकों की कमी दूर करने का शिक्षा विभाग का अनोखा फार्मूला, दुरपा में प्रधान पाठक नहीं तो मुड़पार के संलग्न प्रधान पाठक को दे दिया अतिरिक्त प्रभार, व्यवस्था पर उठे सवाल

जांजगीर-चांपा। नवागढ़ विकासखंड में प्रधान पाठकों की कमी को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने ऐसा रास्ता निकाला है, जिस पर अब सवाल उठने लगे हैं। विभाग ने एक ऐसे प्रधान पाठक को दूसरे विद्यालय में कार्य करने का आदेश जारी कर दिया है, जो स्वयं पहले से अपने मूल विद्यालय से संलग्न होकर दूसरे स्कूल में कार्यरत हैं।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी नवागढ़ द्वारा जारी आदेश के अनुसार शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मुड़पार में कार्यरत प्रधान पाठक रमेश कुमार देवांगन को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला दुरपा में कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में दुरपा विद्यालय में प्रधान पाठक नहीं होने और शैक्षणिक गतिविधियों के प्रभावित होने की आशंका को आधार बनाया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि संबंधित प्रधान पाठक पहले से ही अपने मूल विद्यालय से संलग्न होकर दूसरे विद्यालय में कार्यरत बताए गए हैं। ऐसे में अब उन्हें एक और विद्यालय का दायित्व सौंपे जाने से विभागीय व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि यदि किसी स्कूल में प्रधान पाठक का पद रिक्त है तो उसके लिए स्थायी समाधान तलाशना चाहिए। अस्थायी व्यवस्था के नाम पर एक कर्मचारी को लगातार अलग-अलग विद्यालयों में जिम्मेदारी देना न केवल प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाता है बल्कि इससे शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
बहरहाल, यह आदेश अप्रत्यक्ष रूप से नवागढ़ विकासखंड में प्रधान पाठकों की कमी की भी पोल खोल रहा है। यदि एक विद्यालय में पद रिक्त होने पर दूसरे विद्यालय से कर्मचारी भेजना पड़ रहा है, तो यह दर्शाता है कि कई स्कूल लंबे समय से नियमित प्रधान पाठक की प्रतीक्षा कर रहे हैं।




