रेंजर की शिकायत से बवाल, क्या SDO आरपी दुबे को बचाने की तैयारी? नंदनवन केस में अब किस पर गिरेगी गाज?

रायपुर। राजधानी रायपुर के नंदनवन पक्षी विहार में सामने आए कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। SDO आरपी दुबे पर भ्रष्टाचार, फर्जी बिल, कर्मचारियों के उत्पीड़न और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। हालांकि विभाग के अधिकारी जांच प्रक्रियाधीन होने का हवाला दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कई शिकायतें सही पाई गई हैं, लेकिन अब तक किसी बड़ी कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है।
मामले की शुरुआत नंदनवन में पदस्थ रेंजर हिमांचल साहू की शिकायत से हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि उन पर नियमों के विरुद्ध भुगतान करने और फर्जी बिल तैयार करने का दबाव बनाया गया। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि कथित तौर पर उनसे कहा गया कि “यह पैसा मंत्रीजी को देना है।” हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी जांच जारी है।
रेंजर ने यह भी आरोप लगाया कि गलत काम करने से इनकार करने पर उन्हें अपमानित किया गया। कथित तौर पर उनसे कहा गया, “अगर इतनी ईमानदारी है तो टीचिंग की नौकरी कर लो।” शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कई महत्वपूर्ण फाइलें, पत्राचार, प्राक्कलन और वाउचर समय पर आगे नहीं बढ़ाए गए, जिससे विभागीय कार्य प्रभावित हुए।
मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं रहा। नंदनवन के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने भी डीएफओ और कलेक्टर को शिकायत देकर आरोप लगाया कि उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, वेतन रोका गया और नौकरी से निकालने की धमकी दी गई। कुछ कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे सरकारी कार्यों के बजाय निजी काम कराए जाते थे।
जांच के दौरान SDO आरपी दुबे को नंदनवन से हटाकर डीएफओ कार्यालय रायपुर में अटैच किया गया है। वहीं शिकायतकर्ता रेंजर हिमांचल साहू को भी CCF कार्यालय से संबद्ध किया गया है। इस कार्रवाई के बाद भी यह सवाल बना हुआ है कि यदि जांच में अनियमितताएं सामने आई हैं तो अब तक विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
इस मामले में डीएफओ लोकनाथ पटेल ने कहा कि शिकायत मिली है। जांच CCF कार्यालय स्तर पर कराई जा रही है और रिपोर्ट शासन को जल्द ही भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर कार्रवाई होगी।
वहीं रायपुर के CCF मणिवासगन एस का कहना है कि विभागीय जांच की प्रक्रिया जारी है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी और आगे का निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।
अब पूरे मामले पर शासन और वन विभाग के अगले कदम पर सभी की नजर है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की उम्मीद है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद क्या ठोस कार्रवाई होगी या मामला लंबे समय तक लंबित रह जाएगा।



