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गुरु चरण में ज्ञान,शांति,भक्ति और योग शक्ति मिलती हैं : श्रीमती विजय लक्ष्मी कश्यप

गुरु पूर्णिमा पर विद्यालय में अमरूद,आम,कटहल,नींबू, बादाम आदि पौधे रोपित किए गए

जांजगीर-चांपा। विकासखंड बम्हनीडीह संकुल सेमरिया के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सेमरिया में गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर विद्यालय में गुरु पूजन का कार्यक्रम किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत शिक्षिका विजयलक्ष्मी कश्यप थे।उनका स्वागत विद्यालय परिवार ने श्रीफल,साल,पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि विजय लक्ष्मी कश्यप,प्रधान पाठक उमेश कुमार दुबे ने बताया कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूजा का विधान है। गुरू पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरंभ में आती है।इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ होते हैं।न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी।इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है,ऐसे ही गुरुचरण में उपस्थित साधकों को ज्ञान,शांति,भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।
शिक्षक पितांबर प्रसाद कश्यप ने कहा कि यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिवस भी है। व्यास जी ने ही चारों वेदों की भी रचना की थी। इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है।
टीकाराम गोपालन व कैलाश खूंटे ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के दिन ये करें -प्रातः घर की सफाई,स्नानादि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ-सुथरे वस्त्र धारण करके तैयार हो जाएं। घर के किसी पवित्र स्थान पर पटिए पर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर 12-12 रेखाएं बनाकर व्यास-पीठ बनाना चाहिए। फिर हमें ‘गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये’ मंत्र से पूजा का संकल्प लेना चाहिए। तत्पश्चात दसों दिशाओं में अक्षत छोड़ना चाहिए। अपने गुरु अथवा उनके चित्र की पूजा करके उन्हें यथा योग्य दक्षिणा देना चाहिए।गुरु पूर्णिमा पर यह भी है विशेष -गुरु पूर्णिमा पर व्यासजी द्वारा रचे हुए ग्रंथों का अध्ययन-मनन करके उनके उपदेशों पर आचरण करना चाहिए।यह पर्व श्रद्धा से मनाना चाहिए,अंधविश्वास के आधार पर नहीं। इस दिन वस्त्र, फल,फूल व माला अर्पण कर गुरु को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। गुरु का आशीर्वाद सभी-छोटे-बड़े तथा हर विद्यार्थी के लिए कल्याणकारी तथा ज्ञानवर्द्धक होता है। इस दिन केवल गुरु (शिक्षक)ही नहीं,अपितु माता-पिता,बड़े भाई-बहन आदि की भी पूजा का विधान है।गुरु पूर्णिमा पर विद्यालय में अमरूद,आम,कटहल,नींबू आदि पौधे रोपित किए गए। कार्यक्रम में प्रभारी प्रधान पाठक उमेश कुमार दुबे,पीतांबर प्रसाद, कश्यप,टीकाराम गोपालन, कैलाश खूंटे,अशोक जांगड़े आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन पीतांबर प्रसाद कश्यप ने किया। *”करता तेरी वंदना,नित्य सुबह और शाम। करबद्ध सर झुका करूं, गुरुवर तुझे प्रणाम।। *सर्वगुण संपन्न होत, ज्ञान का तू भंडार। अज्ञ को ज्ञानी बना दे, लीला अपरंपार।।*

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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