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नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 29 साल का सश्रम कारावास, निरीक्षक मनोहर सिन्हा की विवेचना लाई रंग
शादी का झांसा देकर नाबालिग बालिका के साथ किया था अनाचार, पामगढ़ पुलिस की प्रभावी विवेचना और ठोस साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सुनाई सजा

जांजगीर-चांपा। नाबालिग बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के साथ मजबूत विवेचना किस तरह न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसका उदाहरण पामगढ़ थाना क्षेत्र के एक अनाचार प्रकरण में देखने को मिला है। नाबालिग बालिका को शादी का झांसा देकर उसके साथ अनाचार करने वाले आरोपी को न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए कुल 29 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इस प्रकरण में तत्कालीन थाना प्रभारी पामगढ़ निरीक्षक मनोहर सिन्हा द्वारा की गई गंभीर एवं प्रभावी विवेचना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पामगढ़ थाना क्षेत्र के आरोपी भुवनेश्वर कश्यप ने एक नाबालिग बालिका को शादी करने का झांसा देकर उसके साथ जबरन अनाचार किया था। घटना से पीड़ित बालिका ने मामले की शिकायत पुलिस से की थी। पीड़िता की रिपोर्ट पर थाना पामगढ़ में 19 सितंबर 2025 को आरोपी के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक मनोहर सिन्हा ने मामले की गंभीरता से जांच की। विवेचना के दौरान आरोपी की गिरफ्तारी कर उसके विरुद्ध अपराध से संबंधित आवश्यक साक्ष्य संकलित किए गए। पुलिस ने मामले में सभी जरूरी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध मजबूत अभियोग तैयार किया और प्रकरण को सुनवाई के लिए न्यायालय में प्रस्तुत किया।
मामले की सुनवाई माननीय अपर सत्र न्यायालय एफटीएससी (पॉक्सो) जांजगीर में हुई। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों एवं प्रकरण के तथ्यों के आधार पर आरोपी भुवनेश्वर कश्यप को दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं के तहत कुल 29 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया।
इस प्रकरण में निरीक्षक मनोहर सिन्हा की प्रभावी विवेचना और समय पर साक्ष्य संकलन महत्वपूर्ण साबित हुआ। पुलिस की मजबूत जांच के परिणामस्वरूप आरोपी को न्यायालय से सजा दिलाने में सफलता मिली। यह कार्रवाई नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों में पुलिस की गंभीरता और प्रभावी अनुसंधान की अहमियत को रेखांकित करती है।



