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छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा

दर-दर भटक रहे छात्रावासों में नियम विरूद्ध नियुक्त किए गए दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, मोटी रकम लेनदेन कर नियम विरूद्ध नियुक्ति दिलाने वाले शातिर लोग भी हो गए हैं भूमिगत, जांजगीर-चांपा जिले के छात्रावासों में नियम के विरूद्ध 55 कर्मचारियों की नियुक्त का मामला…

जांजगीर-चांपा। आदिम जाति कल्याण विभाग अंतर्गत जांजगीर-चांपा जिले में संचालित छात्रावासों में मोटी रकम लेनदेन कर नियम विरूद्ध नियुक्त किए गए दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को विगत दिनों पद से पृथक किए जाने के बाद उनके समक्ष अब रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। मामले की शिकायत के बाद जिला स्तरीय जांच में नियम विरूद्ध हुई भर्ती की पुष्टि के बाद पद से पृथक किए गए करीब 55 कर्मचारी अब अपनी गुहार लेकर दर-दर भटक रहे हैं। मगर, उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं मोटी रकम लेनदेन कर उन्हें छात्रावासों में नियम विरूद्ध नियुक्ति दिलवाने वाले शातिर लोग भी भूमिगत हो गए हैं। ऐसे में काम से निकाले गए कर्मचारी अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, जांजगीर-चांपा जिले में संचालित छात्रावासों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सेटअप के विरूद्ध दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी (कलेक्टर दर) व आकस्मिक निधि के रिक्त पदो ंके विरूद्ध दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी एवं अंशकालीन सफाई कर्मचारी के अतिशेष अतिरिक्त दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की भर्ती की गई है, जिसकी शिकायत होने पर जिला स्तरीय जांच दल का गठन किया गया है। संयुक्त जांच दल द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के अनुसार, दस्तावेज एवं स्वीकृत पद संरचना के आधार पर यह पाया गया है कि 50 सीटर छात्रावासों में नियमानुसार तीन कर्मचारी आकस्मिक निधि एवं एक कर्मचारी स्वीपर के पद पर रखे जाने का प्रावधान है। प्रति सीट 20 तक के अतिरिक्त एक कर्मचारी आकस्मिक निधि के तहत रखे जाने का प्रावधान है। किन्तु, जांच में पाया गया है कि जिले छात्रावासों में लगभग 55 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के पद पर संरचना के स्वीकृत सेटअप के मान से नियम विरूद्ध नियुक्ति की गई है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर अपर कलेक्टर ने जांजगीर-चांपा जिले में संचालित छात्रावासों में नियम विरूद्ध नियुक्त किए गए दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को तत्काल पद से पृथक करने का आदेश जारी किया है, जिसके बाद से नियम विरूद्ध नियुक्त किए गए दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को मानदेय मिलना बंद हो गया है। इस कारण काम से पृथक किए गए दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के समक्ष अब रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।

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रिश्तेदारों के साथ मिलकर की गड़बड़ी

जिले में संचालित छात्रावासों में नियम विरूद्ध दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की भर्ती मामले की शिकायत के बाद जिला स्तरीय जांच टीम ने इस मामले की बारीकी से छानबीन की, तब पता चला कि तत्कालीन सहायक आयुक्त ने अपने कुछ लोगों के माध्यम से जिले में संचालित छात्रावासों में नियम विरूद्ध दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति की है। बताया जा रहा है कि नियुक्ति के एवज में प्रत्येक से डेढ़ से दो लाख रूपए तक लिए गए हैं। इस काम को सहायक आयुक्त के स्थानीय कुछ रिश्तेदारों ने बड़े ही शातिराना ढंग से अंजाम दिया है। इस बात की पुष्टि के बाद जिला प्रशासन के प्रतिवेदन पर राज्य शासन ने सहायक आयुक्त को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जबकि, शिकायत की प्रारंभिक जांच के दौरान ही तत्कालीन सहायक आयुक्त से समस्त वित्तीय अधिकार छीन लिया गया था।

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जिपं के एक सदस्य की अहम भूमिका

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जिले में संचालित छात्रावासों में नियम विरूद्ध हुई दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की भर्ती में जिला पंचायत जांजगीर-चांपा के एक सदस्य की अहम भूमिका बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि तत्कालीन सहायक आयुक्त उक्त जिपं सदस्य के रिश्तेदार हैं, जिनके माध्यम से ही छात्रावासों में नियुक्ति दिलाने के नाम पर लाखों की वसूली हुई है। जिला पंचायत सदस्य ने जिलेभर में घूम-घूम कर बेरोजगारों से मोटी रकम की वसूली की और फिर संबंधितों को नियम विरूद्ध दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में छात्रावासों में नियुक्ति दिलवाई। इसके बाद सबकुछ ठीक-ठीक चल रहा था मगर, इसी बीच मामले की शिकायत शासन-प्रशासन तक पहुंच गई, जिसके कारण यह मामला काफी सुर्खियों में आ गया और संबंधित कर्मचारी काम से पृथक कर दिए गए।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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