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सुशासन तिहार में कड़वा सच: सूरजपुर में पटवारी 20 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, राजस्व विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल…

कौशलेन्द्र यादव,  सूरजपुर। जिले में सुशासन तिहार के तहत जहां एक ओर प्रशासन जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान में जुटा है, वहीं दूसरी ओर राजस्व विभाग में फैले भ्रष्टाचार की जड़ें इस अभियान की साख को गहरा धक्का पहुंचा रही हैं। गुरुवार को एंटी करप्शन ब्यूरो एसीबी ने डूमरिया में पटवारी भानु प्रताप सोनी को जमीन के नामांतरण और सीमांकन के एवज में 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।यह मामला उजागर होते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया। लोगों के बीच आक्रोश है कि जब एक आम नागरिक को अपने वैध कार्यों के लिए भी रिश्वत देनी पड़े, तो शासन-प्रशासन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो जाते हैं। बहरहाल

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एसीबी की यह कार्रवाई निश्चित रूप से साहसिक है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस कार्रवाई को मिसाल बनाकर आगे की व्यवस्था में सुधार लाता है या फिर सब कुछ जस का तस चलता रहेगा।

क्या है पूरा मामला…..?

एक स्थानीय रहवासी अपनी जमीन के नामांतरण और सीमांकन को लेकर कई दिनों से पटवारी के चक्कर काट रहा था। बार-बार टालमटोल करने के बाद पटवारी ने आखिरकार उससे 20 हजार रुपए की मांग की। परेशान व्यवसायी ने यह बात सीधे
एसीबी को बताई। शिकायत मिलते ही एसीबी ने योजना के तहत जाल बिछाया।जैसे ही पीड़ित ने तय राशि पटवारी को उसके कार्यालय में सौंपी, टीम ने मौके पर दबिश देकर उसे रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। उसके पास से रिश्वत की रकम भी बरामद हुई। गिरफ्तारी के बाद पटवारी कार्यालय से लेकर जिला मुख्यालय तक हड़कंप मच गया।

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आवाज दबेगी या बनेगी नज़ीर..…?

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इस कार्रवाई के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या जिला प्रशासन इस घटना को एक उदाहरण बनाकर आगे भी भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाएगा या फिर यह महज एक “चार दिन की चांदनी” बनकर रह जाएगी।इस घटना ने न सिर्फ सुशासन तिहार की वास्तविकता को कठघरे में खड़ा किया है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि आम जनता की आवाज़ कितनी बार भ्रष्ट तंत्र में दबा दी जाती है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब भी कोई ठोस बदलाव आएगा या फिर यह कार्रवाई भी कागजों तक सीमित रह जाएगी।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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