भागवत का अर्थ है भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तारण : पं. मुकेश तिवारी…

भागवत का अर्थ है भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तारण : पं. मुकेश तिवारी
जांजगीर-चांपा। जब सौभाग्य का उदय होता है तभी भागवत कथा सुनने को मिलती है। भगवान सत्य स्वरूप हैं,चित्त स्वरूप हैं,आनंद स्वरूप हैं। दैहिक, देविक, भौतिक तापों का हरण करने वाले हैं। यह बाते खोखरा में भीम सिंह राठौर के निवास में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भागवताचार्य पंडित मुकेश तिवारी ने कही। उन्होंने कहा कि सूतजी महाराज ने 88 हजार ऋषियों को नैमीशारण्य में भागवत कथा सुनाई थी।वृंदावन में भक्ति का महत्व है। ज्ञान,वैराग्य नहीं है, नारद जी का अवतारों में तीसरा अवतार है। उन्होंने कहा कि भागवत का अर्थ है भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तारण। प्रेत योनि से मुक्त करने वाली भागवत कथा है। भागवताचार्य श्री तिवारी ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर कोई संकट आता है तो भगवान अवतार लेकर उस संकट को दूर करते हैं। भगवान शिव और भगवान विष्णु ने कई बार पृथ्वी पर अवतार लिया है। भगवान विष्णु के 24 वें अवतार के बारे में कहा जाता है कि ‘कल्कि अवतार’ के रूप में उनका आना सुनिश्चित है। उनके 23 अवतार अब तक पृथ्वी पर अवतरित हो चुके हैं। इन 24 अवतार में से 10 अवतार विष्णु जी के मुख्य अवतार माने जाते हैं। यह है मत्स्य अवतार, कूर्म अवतार,वराह अवतार, नृसिंह अवतार,वामन अवतार, परशुराम अवतार,राम अवतार, कृष्ण अवतार, बुद्ध अवतार, कल्कि अवतार मुख्य है।
कलश यात्रा निकली
श्रीमद् भागवत कथा के पूर्व बाजे गाजे के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा शिव मंदिर मेन रोड से शुरू होकर राठौर मोहल्ला,देवांगन पारा,राम मंदिर होते हुए मनका दाई मंदिर पहुंची। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर कलश धारण किए हुईं थीं।



